
प्रदूषित पानी को पीने योग्य बनाने वाली तकनीक का प्रभावी प्रदर्शन:-पुणे के डॉ. करण चव्हाण का शोध
पुणे:वर्तमान समय की सबसे गंभीर समस्याओं में शामिल जल और वायु प्रदूषण पर आधुनिक तकनीक के माध्यम से समाधान संभव है—इस बात को सिद्ध करने वाला एक प्रभावशाली प्रदर्शन आज बोट क्लब में इको आइस की ओर से प्रस्तुत किया गया।
इस अवसर पर प्रोजेक्ट ड्रॉपलेट और जलशुद्धि नामक दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं का प्रदर्शन किया गया। प्रोजेक्ट ड्रॉपलेट के अंतर्गत सौर ऊर्जा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की सहायता से एक विशेष नाव के माध्यम से नदियों और अन्य जलस्रोतों के पानी की गुणवत्ता, प्रदूषण स्तर और पर्यावरणीय स्थिति की जांच की जाती है। जल परिसंस्था से जुड़ी पूरी जानकारी तुरंत एक डैशबोर्ड पर उपलब्ध हो जाती है।
यह परियोजना फ्लुइड एनालिटिक्स के सहयोग से विकसित की गई है और इसे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम द्वारा वर्ष 2024 का को-प्रोन्योर ऑफ द ईयर का अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुआ है। यह जानकारी इको आइस के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. करण चव्हाण ने दी। इस कार्यक्रम में विद्या प्रतिष्ठान की निदेशक रजनी इंदुलकर, अतुल चंद्र, श्रुति बापट सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
इसके साथ ही प्रदूषित पानी के दूषित अंशों को नष्ट कर आरओ तकनीक के माध्यम से उसे पीने योग्य बनाने वाली जलशुद्धि प्रणाली का भी प्रदर्शन किया गया। यह प्रणाली घरेलू उपयोग से लेकर बड़े जलस्रोतों तक पानी को शुद्ध करने में सक्षम है। इस तकनीक के माध्यम से जल का पुनः उपयोग संभव है और जल संकट से निपटने में मदद मिल सकती है, ऐसा दावा डॉ. चव्हाण ने किया।
उन्होंने यह भी बताया कि पानी के साथ-साथ ड्रोन तकनीक के जरिए हवा को शुद्ध करने की तकनीक भी उपलब्ध है।
इस अवसर पर रजनी इंदुलकर ने कहा कि शुद्ध पानी की कमी, प्रदूषित हवा और अनियंत्रित कचरा आज की सबसे बड़ी समस्याएं हैं। ऐसे में हवा और पानी को शुद्ध करने के लिए शोध कर तकनीक विकसित करने वाले युवाओं का यह कार्य अत्यंत सराहनीय है और उन्हें हर स्तर पर प्रोत्साहन मिलना चाहिए।



