अजरामर मराठी गीतों की सुरमयी सौगात पुणेकरों को समर्पित
विद्यार्थी साहाय्यक समिति द्वारा ‘शतजन्म शोधताना’ में दिग्गज गीतकारों-संगीतकारों को किया याद
पुणे: शब्दांवाचून कळले सारे… रिमझिम पाऊस पडे, गेला मोहन कुणीकडे… कौसल्येचा राम बाई… शुक्रतारा मंदवारा… निज माझ्या नंदलाला रे… ही कुणी छेडिली तार… जैसे एक से बढ़कर एक अजरामर मराठी गीतों की सुरमयी सौगात ने पुणेकर रसिकों के दिलों को छू लिया। विद्यार्थी साहाय्यक समिति द्वारा दानदाताओं और हितचिंतकों के प्रति कृतज्ञता स्वरूप आयोजित सैब इवेंट्स प्रस्तुत लाइव कॉन्सर्ट ‘शतजन्म शोधताना’ यह कार्यक्रम गणेश कला क्रीड़ा मंच पर भव्य रूप से दर्शकों के उत्स्फूर्त प्रतिसाद में संपन्न हुआ।
संगीतकार-निर्देशक देवेंद्र भोमे की संकल्पना और अभिनेत्री-कवयित्री स्पृहा जोशी के सहज-प्रभावी निवेदन से सजे इस कार्यक्रम में दिग्गज गीतकारों और संगीतकारों की अविस्मरणीय रचनाओं के साथ उनसे जुड़े संस्मरणों और किस्सों ने माहौल को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम में समिति के अध्यक्ष प्रतापराव पवार, कार्यकारी विश्वस्त तुषार रंजनकर, क्रिसेंट म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर्स के भूषण वाणी सहित विश्वस्त, पूर्व छात्र, दानदाता और हितचिंतक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के मध्यांतर में गायक-वादकों के साथ-साथ प्रायोजक भूषण वाणी और अंजली अंतुरकर का सम्मान किया गया। इसी अवसर पर समिति की नई डॉक्यूमेंट्री फिल्म और अमेरिका में शुरू की गई विद्यार्थी सहाय्यक समिति फाउंडेशन की वेबसाइट का भी उद्घाटन किया गया।
इस सुरमयी संध्या में ग. दि. माडगूळकर, पु. ल. देशपांडे, मंगेश पाडगांवकर, वसंत प्रभु, पी. सावळाराम, सुधीर फडके, वसंत देसाई, राम कदम जैसे दिग्गजों की हृदयस्पर्शी रचनाओं का गायन हुआ। देवेंद्र भोमे और स्पृहा जोशी ने इन महान रचनाकारों से जुड़े अनसुने किस्सों और यादों को साझा कर महफिल को और भी रंगीन बनाया। कुछ दुर्लभ ऑडियो-वीडियो क्लिप्स भी प्रदर्शित की गईं।
गायन प्रस्तुतियों में मुक्ता जोशी, आशुतोष मुंगले, जयदीप वैद्य, राजेश्वरी पवार, शमिका भिड़े और भूषण मराठे ने श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी। मात्र 13 वर्षीय वायलिन वादक रितिका जोगळेकर के सधे हुए वादन को भी जमकर तालियां मिलीं। तबले पर केतन पवार, ढोलकी पर मंदार बगाड़े, बांसुरी पर धवल जोशी, वायलिन पर रितिका जोगळेकर तथा कोरस में अर्णव जोशी, इशिता सावळे, नम्रता निमये और केदार चिखलकर ने प्रभावी संगत की। कार्यक्रम का संयोजन मयूर वैद्य ने किया।
कार्यक्रम में स्पृहा जोशी द्वारा प्रस्तुत कविता ‘यांचं हे असं का होतं मला कळत नाही’, आशुतोष मुंगले की प्रस्तुति ‘बटाट्याची चाळ’ (पु. ल. देशपांडे), इसके बाद भक्तिगीतों का विशेष संयोजन, ‘येग येग विठाबाई’, ‘विठूमाऊली तू’, ‘विठ्ठला तू वेडा कुंभार’, ‘खेळ मांडियेला वाळवंटी’ ने श्रोताओं को भक्ति रस में डुबो दिया। वहीं ‘पदरावरती झरतारीचा’, ‘बाई माझी करंगळी मोडली’, ‘फड सांभाळ तुऱ्याला आला’ जैसे लावणी ने ताल पर झूमने को मजबूर किया। ‘सांगा मुकुंद कुणी हा पाहिला’ और ‘घननीळा लडिवाळा’ जैसी भावगीतों के बाद भीमपलास राग में प्रस्तुत अभंग ‘इंद्रायणी काठी, देवाची आळंदी’ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
इस अवसर पर देवेंद्र भोमे ने कहा कि मराठी रसिकों के दिलों में बसे इन गीतों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का यह प्रयास है। स्पृहा जोशी ने बताया कि ‘शतजन्म शोधताना’ को और व्यापक बनाकर इस अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया है। वहीं भूषण वाणी ने समिति के कार्यों की सराहना करते हुए दानदाताओं से आगे आने का आह्वान किया।
समिति अध्यक्ष प्रतापराव पवार ने कहा, “ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को आवास और भोजन के साथ-साथ सर्वांगीण विकास के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं। अब उद्यमिता और कौशल विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है। ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों को खेती में एआई तकनीक के उपयोग का प्रात्यक्षिक प्रशिक्षण देने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। समिति की भावी योजनाओं को सभी का सहयोग मिले, यही अपेक्षा है।”

