विवेकपूर्ण उपयोग के साथ एआई तकनीक को अपनाना जरूरी
अच्युत गोडबोले का प्रतिपादन; ऑल इंडिया बैंक ऑफ महाराष्ट्र एम्प्लॉईज फेडरेशन के अधिवेशन में मार्गदर्शन
‘एआईबीओएमईएफ’ के चेयरमैन देविदास तुळजापुरकर, महासचिव कॉ. धनंजय कुलकर्णी निर्वाचित
पुणे: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का तकनीक आने वाले समय में जीवन के लगभग हर क्षेत्र में तेजी से प्रभाव बढ़ाने वाली है। इसे नकारना संभव नहीं होगा। इसलिए एआई तकनीक को विवेकपूर्ण और जिम्मेदारी के साथ अपनाना आवश्यक है, ऐसा प्रतिपादन वरिष्ठ संगणक तज्ज्ञ और लेखक अच्युत गोडबोले ने किया। उन्होंने एआई युग की शुरुआत से लेकर अब तक के तकनीकी विकास का आढावा लेते हुए संगणक तकनीक के विभिन्न चरणों को स्पष्ट किया।
ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉईज एसोसिएशन (AIBEA) से संबद्ध ऑल इंडिया बैंक ऑफ महाराष्ट्र एम्प्लॉईज फेडरेशन (AIBOMEF) के दो दिवसीय नववें अखिल भारतीय अधिवेशन में ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता और श्रमिक वर्ग – अवसर, चुनौतियां और आगे की राह’ विषय पर आयोजित व्याख्यान में गोडबोले बोल रहे थे। बीएमसीसी रोड स्थित दादासाहेब दरोडे सभागृह में आयोजित इस कार्यक्रम में एआईबीओएमईएफ के महासचिव देविदास तुळजापुरकर, अध्यक्ष स्वयंप्रकाश तिवारी, सचिव धनंजय कुलकर्णी, संयोजक शैलेश टिळेकर सहित पदाधिकारी उपस्थित थे।
गोडबोले ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग को न रोका जा सकता है और न ही नकारा जा सकता है। ऐसी स्थिति में इस तकनीक को विवेक के साथ स्वीकार करना ही बेहतर विकल्प है। एआई का सबसे अधिक प्रभाव सेवा और स्वास्थ्य क्षेत्र पर पड़ेगा। अनेक प्रचलित बीमारियों पर नियंत्रण पाना आसान होगा। आर्टिफिशियल न्यूरल नेटवर्क के माध्यम से मशीनों को डेटा देकर पैटर्न पहचानने की क्षमता को लगातार विकसित किया जा रहा है। उद्योग, व्यवसाय, सेवाओं के साथ-साथ सृजनात्मक क्षेत्र भी एआई से प्रभावित होंगे। हालांकि एआई से कई सकारात्मक बदलाव होंगे, लेकिन यदि इसका उपयोग अनैतिक या गलत तरीके से किया गया तो इसके दुष्परिणाम भी संभव हैं। इसलिए एआई का उपयोग हमेशा जिम्मेदारी और विवेक के साथ किया जाना चाहिए।
कार्यक्रम का सूत्रसंचालन धनंजय कुलकर्णी ने किया। स्वयंप्रकाश तिवारी ने स्वागत और प्रस्तावना रखी, जबकि देविदास तुळजापुरकर ने आभार व्यक्त किया।
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एआईबीओएमईएफ की नई कार्यकारिणी का गठन
ऑल इंडिया बैंक ऑफ महाराष्ट्र एम्प्लॉईज फेडरेशन (एआईबीओएमईएफ) के दो दिवसीय नववें अखिल भारतीय अधिवेशन में नई कार्यकारिणी का चयन किया गया। चेयरमैन पद पर देविदास तुळजापुरकर और महासचिव पद पर कॉ. धनंजय कुलकर्णी का चयन किया गया। अध्यक्ष के रूप में कॉ. स्वयंप्रकाश तिवारी, कार्याध्यक्ष के रूप में कॉ. सुधीर पाटील, संयोजन सचिव के रूप में कॉ. शैलेश टिळेकर, उपाध्यक्ष के रूप में अरविंद मोरे, पांडुरंग भोगले, हुसेन मालवत, महेश पारखी, मनोज कुमार व कोषाध्यक्ष के रूप में राजेंद्र देवळे का चयन हुआ.

