दिल्लीराजनीतिलखनऊ

**योगी आदित्यनाथ को ‘साइड लाइन’ करने की सियासत

**योगी आदित्यनाथ कोसाइड लाइन’ करने की सियासत?

यूपी की सत्ता से दिल्ली तक हिला देने वाला योगी फैक्टर और बीजेपी की अग्निपरीक्षा**

✍️ विशाल | विशेष रिपोर्ट/लखनऊ/दिल्ली

भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक घटनाक्रमों के बीच उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर उबाल पर है। पंकज चौधरी को दिल्ली भाजपा द्वारा अध्यक्ष नियुक्त किए जाने के बाद, यूपी भाजपा संगठन के भीतर हुई कुछ गतिविधियों ने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। सवाल अब सिर्फ संगठन का नहीं, बल्कि उस चेहरे का है जो उत्तर प्रदेश की राजनीति में सत्ता, प्रशासन और लोकप्रियता—तीनों का पर्याय बन चुका है: योगी आदित्यनाथ।

गोपनीय बैठक और उठते सवाल

राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष द्वारा सांसदों की एक गोपनीय बैठक बुलाई गई, जिसकी औपचारिक जानकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पहले नहीं दी गई। यह खबर जैसे ही सत्ता के शीर्ष तक पहुंची, प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसके बाद अपने कार्यालय में शासन से जुड़ी फाइलों की गहन समीक्षा शुरू की।

हालांकि यह प्रक्रिया शासन के सामान्य कामकाज का हिस्सा बताई जा रही है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे यूं ही नहीं देख रहे। उनके मुताबिक, यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब योगी आदित्यनाथ की भूमिका और कद को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर लगातार चर्चाएं हो रही हैं।

जेपी नड्डा–योगी बैठक: संकेत या संदेश?

इसी बीच भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ हुई बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि यह मुलाकात संगठन और सरकार के बीच समन्वय को मजबूत करने के उद्देश्य से हुई। लेकिन राजनीति में “संयोग” कम और “संकेत” ज्यादा होते हैं—और यही वजह है कि इस बैठक को यूपी की सत्ता के भविष्य से जोड़कर देखा जा रहा है।

क्या ठाकुर चेहरे से कमान छीनने की तैयारी?

राजनीतिक गलियारों में यह सवाल अब खुलेआम पूछा जा रहा है कि क्या उत्तर प्रदेश जैसे रणनीतिक राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की कोई सियासी पटकथा लिखी जा रही है? क्या योगी आदित्यनाथ जैसे मजबूत ‘ठाकुर चेहरे’ को धीरे-धीरे साइड लाइन करने की कोशिशें हो रही हैं?

हालांकि, जमीनी सच्चाई इससे बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करती है। योगी आदित्यनाथ आज केवल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री नहीं हैं, बल्कि वे एक ब्रांड, एक सख्त प्रशासक और एक निर्णायक नेता के रूप में पहचाने जाते हैं। यूपी से लेकर देश-विदेश तक उनके नाम की चर्चा राजनीतिक गलियारों में होती है।

योगी: जिसे नजरअंदाज करना भी आसान नहीं

कानून-व्यवस्था पर सख्त नियंत्रण, माफिया के खिलाफ कार्रवाई, बिना भेदभाव के प्रशासन और स्पष्ट निर्णय क्षमता—इन सबने योगी आदित्यनाथ को एक ऐसे नेता के रूप में स्थापित किया है, जिसे हटाना तो दूर, नजर उठाकर भी देख पाना हर किसी के बस की बात नहीं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह सोच लिया जाए कि “खीचड़ी पकाई जाएगी और योगी आदित्यनाथ को कानों-कान खबर नहीं लगेगी”, तो यह भाजपा की अब तक की सबसे बड़ी रणनीतिक भूल साबित हो सकती है।

दिल्ली की गद्दी, यूपी की कमान और सियासी गणित

राजनीतिक चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि अगर दिल्ली में सत्ता संतुलन बदला और अमित शाह को बड़ी जिम्मेदारी मिली, तो यूपी की कमान किसी और को सौंपी जा सकती है। कुछ नामों को आगे किया जा रहा है, लेकिन जानकारों के मुताबिक यह सब कयास उस वक्त धराशायी हो जाते हैं, जब योगी आदित्यनाथ की जमीनी पकड़ और प्रशासनिक ताकत को परखा जाता है।

योगी की ‘दिल्ली मांग’ और अंदरूनी बेचैनी

बीते कुछ समय से योगी आदित्यनाथ की राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका को लेकर जो मांग और चर्चा उठती रही है, वह भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं को खटकती जरूर है। लेकिन यह भी उतना ही सच है कि योगी आदित्यनाथ को लेकर फैसला लेना आसान नहीं—क्योंकि उनके पीछे सिर्फ सत्ता नहीं, जनसमर्थन की ताकत खड़ी है।

निष्कर्ष: योगी कोई मोहरा नहीं, धुरी हैं

उत्तर प्रदेश की राजनीति में योगी आदित्यनाथ कोई ऐसा मोहरा नहीं हैं जिसे चुपचाप हटा दिया जाए। वे इस समय यूपी शासन की वह धुरी हैं, जिसके इर्द-गिर्द सत्ता, संगठन और जनता का भरोसा घूमता है। संगठनात्मक चर्चाएं अपनी जगह हैं, लेकिन योगी आदित्यनाथ को साइड करने की सोच—अगर कहीं है भी—तो वह हकीकत से बहुत दूर नजर आती है।

राजनीति में प्रयोग बहुत होते हैं,

लेकिन कुछ चेहरे प्रयोग नहीं, इतिहास बनते हैं—

और योगी आदित्यनाथ उसी श्रेणी में खड़े दिखाई देते हैं। या भाजपा का पतन शुरू हो गया है?

यह रिपोर्ट राजनीतिक घटनाक्रमों और सूत्रों पर आधारित विश्लेषण है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button