
यूपीआई का वैश्विक विस्तार तेज़, लेकिन सुरक्षा और नियामकीय चुनौतियाँ भी अहम : मेधा कुलकर्णी
रिपोर्ट:विशाल समाचार संवाददाता
स्थान:नई दिल्ली/पुणे
दिनांक:03 फरवरी 2026
भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) का विस्तार विश्व स्तर पर लगातार बढ़ रहा है। वर्तमान में यूपीआई आठ देशों में सक्रिय है अथवा स्थानीय भुगतान प्रणालियों से जुड़ी हुई है। हालांकि, इसके अंतरराष्ट्रीय विस्तार के दौरान नियामकीय, तकनीकी और सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियाँ भी सामने आ रही हैं। इन मुद्दों की ओर राज्यसभा सांसद प्रो. डॉ. मेधा कुलकर्णी ने सदन में तारांकित प्रश्न के माध्यम से सरकार का ध्यान आकर्षित किया।
प्रश्नोत्तर काल के दौरान सांसद डॉ. कुलकर्णी ने सरकार से यह जानकारी मांगी कि यूपीआई किन-किन देशों में कार्यरत है, अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी के माध्यम से अब तक कितने और कितने मूल्य के लेन-देन हुए हैं, तथा भारतीय यात्रियों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के दृष्टिकोण से यूपीआई के भविष्य के विस्तार की क्या योजना है।
इस पर लिखित उत्तर देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि यूपीआई वर्तमान में भूटान, फ्रांस, मॉरीशस, नेपाल, कतर, सिंगापुर, श्रीलंका और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में कार्यरत है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन वित्तीय वर्षों में अंतरराष्ट्रीय यूपीआई लेन-देन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2023-24 में जहां 37,060 लेन-देन हुए थे, वहीं 2025-26 (दिसंबर 2025 तक) यह संख्या बढ़कर 14.86 लाख से अधिक हो गई है। इसी अवधि में लेन-देन का मूल्य 1,970 लाख रुपये से बढ़कर 33,043 लाख रुपये हो गया है।
पूरक प्रश्नों के माध्यम से सांसद डॉ. कुलकर्णी ने यूपीआई को अन्य देशों की भुगतान प्रणालियों से जोड़ने में आने वाली नियामकीय, तकनीकी और द्विपक्षीय समन्वय संबंधी कठिनाइयों, साथ ही इनके कारण क्रियान्वयन की समय-सीमा और दायरे पर पड़ने वाले प्रभाव को स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने डेटा लोकलाइजेशन, साइबर सुरक्षा, मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद वित्तपोषण रोकथाम नियमों के अनुपालन तथा सेटलमेंट जोखिम जैसे मुद्दों पर भी सरकार से जवाब मांगा।
इस पर उत्तर देते हुए वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि यूपीआई के वैश्विक विस्तार की जिम्मेदारी नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) और उसकी सहायक इकाई एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (एनआईपीएल) के पास है। विभिन्न देशों की तकनीकी संरचना, मुद्रा विनिमय व्यवस्था, भुगतान योजनाओं के स्वामित्व अधिकार और अलग-अलग नियामकीय ढांचे के कारण चुनौतियाँ उत्पन्न होती हैं। हालांकि, भारतीय रिज़र्व बैंक और साझेदार देशों के सहयोग से तकनीकी समाधान और द्विपक्षीय समन्वय के माध्यम से इन समस्याओं का समाधान किया जा रहा है।
सरकार ने कहा कि इन सभी चुनौतियों के बावजूद आठ देशों में यूपीआई का सफल संचालन भारत की डिजिटल अवसंरचना पर वैश्विक विश्वास को दर्शाता है। विदेशों में यूपीआई का बढ़ता उपयोग भारतीय यात्रियों के लिए लेन-देन को सरल बना रहा है और डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में भारत की वैश्विक नेतृत्वकारी भूमिका को और सशक्त कर रहा है। सरकार ने भविष्य में भी यूपीआई के अंतरराष्ट्रीय विस्तार को बढ़ावा देते हुए सुरक्षित, तेज़ और किफायती सीमापार डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने की प्रतिबद्धता दोहराई है।



