मीडिया एडवोकेसी कार्यशाला में फाइलेरिया अभियान की दी गई जानकारी
समस्त लक्षित पात्र जनसंख्या को खिलाई जाएगी फाइलेरिया रोधी दवा – सीएमएचओ
रिपोर्ट :विशाल समाचार संवाददाता
स्थान: रीवा,मध्य प्रदेश
मऊगंज मऊगंज जिले के हनुमना ब्लॉक में फाइलेरिया (हाथीपांव) से बचाव के लिए 10 से 24 फरवरी तक सामूहित दवा सेवन अभियान चलाया जाएगा। अभियान के सफल क्रियान्वयन एवं व्यापक जनजागरूकता के लिए जिला स्तरीय मीडिया एडवोकेसी कार्यशाला का आयोजन जिला अस्पताल रीवा में किया गया। कार्यशाला में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. यत्नेश त्रिपाठी ने मीडिया कर्मियों को जानकारी दी कि अभियान के दौरान ब्लॉक के समस्त लक्षित पात्र जनसंख्या को फाइलेरिया रोधी दवा डीईसी सौ एमजी की गोली एवं चार सौ एमजी गोली का सेवन उम्र के अनुसार कराया जाएगा। पाँच वर्ष से ऊपर के लोगों को आइवरमैक्टीन दवा की एक खुराक ऊंचाई के अनुसार दी जाएगी। दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं एवं अति वृद्ध अथवा गंभीर बीमारी वाले व्यक्तियों को दवा का सेवन नहीं कराया जाएगा। दवाओं का सेवन प्रशिक्षित स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा कराया जाएगा। उन्होंने मीडिया कर्मियों से फाइलेरिया अभियान के व्यापक प्रचार-प्रसार के सहयोग के लिए अनुरोध किया।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि फाइलेरिया मच्छरों के काटने से फैलने वाला एक परजीवी रोग है। इसके लक्षण (पैरों या अंगों में सूजन) संक्रमण के कई सालों बाद दिखाई देते हैं। अभियान के दौरान 10 और 13 फरवरी को चिन्हित बूथों पर एवं 14 से 24 फरवरी तक घर-घर जाकर समस्त लक्षित जनसमुदाय को दवा का सेवन कराया जाएगा। यह दवा फ़ाइलेरिया के परजीवीयो को मार देती है और हांथीपाँव व् हाइड्रोसील जैसी बीमारी से बचाने में मदद करती है। दवा पेट के अन्य खतरनाक कीड़ों को भी ख़त्म कर देती है तथा खुजली एवं जू के खात्मे में भी मदद करती है। चूंकि इस बीमारी में हाथ और पैर हाथी के पांव जितने सूज जाते हैं इसलिए इस बीमारी को हाथीपांव कहा जाता है। रोग की प्रारंभिक अवस्था मे बुखार, बदन में खुजली और पुरुषों के जननांग और उसके आस-पास दर्द व सूजन की समस्या होती है। इसके अलावा पैरों और हाथों में सूजन, हाइड्रोसिल (अंडकोषों की सूजन) भी फाइलेरिया के लक्षण हैं।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि इस बीमारी का कारगर इलाज नहीं है। इसकी रोकथाम ही इसका समाधान है। इस रोग से बचाव के लिए मॉस ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन प्रोग्राम में सभी लाभार्थियों को दवा अनिवार्यतः लेने की जरूरत है जो रामबाण होने के साथ ही सुरक्षित भी है। फाइलेरिया चूंकि मच्छर के काटने से फैलता है, इसलिए बेहतर है कि मच्छरों से बचाव किया जाए। इसके लिए घर के आस-पास व अंदर साफ-सफाई रखें। पानी के आस-पास पानी जमा न होने दें, समय-समय पर कीटनाशक का छिड़काव करें। घर में मच्छर भगाने वाली लिक्विड दवाओं का उपयोग करें और पूरी बाजू के कपड़े पहनकर रहें। सोते वक्त हाथ-पैर व अन्य खुले भागों पर सरसों या नीम का तेल लगाएं। डब्ल्यूएचओ विश्व स्वास्थ्य संगठन मुताबिक भारतीयों पर फाइलेरिया रोग का खतरा मंडरा रहा है। फाइलेरिया दुनिया की दूसरे नंबर की ऐसी बीमारी है जो बड़े पैमाने पर लोगों को विकलांग बना रही है। फाइलेरिया एक गंभीर बीमारी है। यह जान तो नहीं लेती है, लेकिन जिंदा आदमी को मृत के समान बना देती है। फाइलेरिया न सिर्फ व्यक्ति को विकलांग बना देती है बल्कि इससे मरीज की मानसिक स्थिति पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। अगर समय पर फाइलेरिया की पहचान कर ली जाए तो जल्द इलाज शुरू किया जा सकता है और मरीज़ के स्वस्थ होने की संभावना भी ज्यादा होती है।



