
शिवाजी विश्वविद्यालय के शोधकर्ता ललित भोसले को बायोमास आधारित औषध निर्माण पद्धति पर UK से अंतरराष्ट्रीय पेटेंट
बार्टी पुणे संस्थान के सहयोग से ललित भोसले का विश्व स्तर पर शोध में ऐतिहासिक योगदान
पुणे सोहन सिंह: डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर शोध एवं प्रशिक्षण संस्था (BARTI), पुणे के शोधकर्ता और शिवाजी विश्वविद्यालय के छात्र ललित भोसले ने रसायन विज्ञान के क्षेत्र में विश्व स्तर पर ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। बायोमास (Biomass) से प्राप्त ‘हाइड्रॉक्सी मिथिल फुरफुराल’ (HMF) का उपयोग कर औषध निर्माण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण ‘हाइड्राज़िनिल थायाजोल’ संयुग को पर्यावरण अनुकूल पद्धति से तैयार करने पर उन्हें यूनाइटेड किंगडम (UK) से अंतरराष्ट्रीय पेटेंट प्रदान किया गया है।
शोध का विशेष पहलू:ललित भोसले के शोध में ‘ग्राइंडस्टोन केमिस्ट्री’ (Grindstone Chemistry) तकनीक का उपयोग किया गया है। यह एक सरल और पर्यावरण अनुकूल विधि है, जिसमें पारंपरिक रासायनिक प्रक्रियाओं में प्रयुक्त हानिकारक सॉल्वेंट्स और उत्प्रेरक (Catalyst) का उपयोग नहीं किया जाता। इसके बावजूद इस पद्धति से कम समय में उच्च गुणवत्ता का उत्पादन (Yield) संभव हुआ है।
औषध निर्माण क्षेत्र में क्रांति:इस शोध का मुख्य महत्व यह है कि बायोमास से प्राप्त फुरफुराल का उपयोग कर हाइड्राज़िनिल थायाजोल संयुगों की एक बड़ी ‘लाइब्रेरी’ तैयार की गई है। ये संयुग एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-ऑक्सिडेंट और एंटी-कैंसर (कर्करोग निरोधक) औषधों के निर्माण में अत्यंत उपयोगी साबित होंगे।
बार्टी संस्थान का सहयोग:इस शोध कार्य को सफल बनाने में BARTI, पुणे के वरिष्ठ प्रशासन का विशेष मार्गदर्शन और सहयोग रहा। विशेष रूप से संस्थान के महासंचालक सुनील वारे, निबंधक एवं अधिछात्रवृत्ति विभाग प्रमुख विशाल लोंढे, प्रोजेक्ट मैनेजर डॉ. सारिका थोरात और सहायक प्रोजेक्ट मैनेजर डॉ. अंकुश गायकवाड ने निरंतर सहयोग एवं प्रोत्साहन प्रदान किया।
इस उपलब्धि पर बार्टी के महासंचालक ने ललित भोसले को बधाई दी और आगामी शोध कार्यों के लिए शुभकामनाएं प्रदान की हैं।


