फॉर्म-7 को लेकर बड़े षड्यंत्र के आरोप, न्यायालय व निर्वाचन आयोग से संज्ञान लेने की अपील
सोशल मीडिया पर प्रसारित एक पोस्ट और उसके साथ साझा किए गए फॉर्म को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। पोस्ट में माननीय न्यायालय, निर्वाचन आयोग तथा समस्त पत्रकारों से आग्रह किया गया है कि वे SIR प्रक्रिया के अंतर्गत गाँवों में कथित रूप से वितरित किए जा रहे छपे-छपाए फॉर्म-7 के मामले का संज्ञान लें।
पोस्ट में दावा किया गया है कि फॉर्म-7 का उपयोग कर आपत्ति दर्ज कराने के माध्यम से किसी अन्य व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से कटवाने की साज़िश की जा रही है। आरोप है कि जिन लोगों के नाम से आपत्तियाँ दर्ज की जा रही हैं, वे वास्तविक शिकायतकर्ता नहीं हैं और कई मामलों में शिकायतकर्ताओं का कोई स्पष्ट पता या पहचान सामने नहीं आ रही है।
पोस्ट के अनुसार, कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षर करवाकर मतदाता सूची में हेरफेर की जा रही है, जिससे विपक्षी दलों के मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका जताई गई है। इसमें विशेष रूप से पीडीए समाज और अल्पसंख्यक वर्ग के मतदाताओं के नाम बड़ी संख्या में काटे जाने का आरोप लगाया गया है। यह भी कहा गया है कि जिन मतदाताओं के नाम पर आपत्ति दर्ज कराई जा रही है, उन्हें इसकी कोई जानकारी तक नहीं है, जबकि उनके दस्तावेज और विवरण सही बताए जा रहे हैं।
पोस्ट में सभी राष्ट्रीय और स्थानीय समाचार चैनलों व अख़बारों से अपील की गई है कि वे इस कथित महा-घोटाले की जाँच करें और तथ्यों को सामने लाएँ। साथ ही स्थानीय यूट्यूबरों और स्थानीय समाचार कर्मियों से भी लोकतंत्र के हित में इस मुद्दे को अपने स्तर पर प्रकाशित-प्रसारित करने का अनुरोध किया गया है।
पोस्ट में यह भी कहा गया है कि जो पत्रकार और कंटेंट क्रिएटर इस मुद्दे को उजागर करेंगे, उनके कार्य को व्यापक स्तर पर जनता तक पहुँचाने में सहयोग किया जाएगा।
फिलहाल इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। निर्वाचन आयोग या संबंधित प्रशासन की ओर से इस विषय में कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह मामला सामने आने के बाद चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाता सूची की विश्वसनीयता को लेकर सवाल खड़े कर रहा है।
नोट (संपादकीय स्पष्टीकरण)
यह खबर सोशल मीडिया पोस्ट में किए गए दावों और अपील पर आधारित है। विशाल समाचार इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता।
“यह खबर सोशल मीडिया स्रोत पर आधारित है और अख़बार किसी भी आरोप का समर्थन नहीं करता।”


