साहित्य परिषद चुनाव में सरकारी हस्तक्षेप का आरोप, परिवर्तन उत्कर्ष आघाड़ी की प्रेस वार्ता
रिपोर्ट विशाल समाचार संवाददाता
स्थान:पुणे महाराष्ट्र
दिनांक:2 फरवरी 2026
पुणे। अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन एवं महाराष्ट्र साहित्य परिषद की आगामी चुनाव प्रक्रिया को लेकर परिवर्तन उत्कर्ष आघाड़ी ने गंभीर आरोप लगाए हैं। आघाड़ी की ओर से आयोजित प्रेस वार्ता में आरोप लगाया गया कि साहित्य परिषद जैसे स्वायत्त साहित्यिक संगठन के चुनाव में सरकारी तंत्र और राजनीतिक प्रभाव का अनुचित उपयोग किया जा रहा है। यह प्रेस वार्ता पुणे में संपन्न हुई।
प्रेस वार्ता में वक्ताओं ने कहा कि साहित्यिक संस्थाओं का उद्देश्य भाषा, साहित्य और संस्कृति का संरक्षण एवं संवर्धन है, न कि किसी राजनीतिक दल या सत्ता का प्रचार। इसके बावजूद चुनाव प्रक्रिया में मुख्यमंत्री के नाम, सरकारी पद और प्रशासनिक प्रभाव का इस्तेमाल किया जाना चिंताजनक है।
आघाड़ी के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि कुछ प्रत्याशी सत्ता के संरक्षण में नियमों की अनदेखी कर प्रचार कर रहे हैं, जिससे निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है, बल्कि साहित्यिक संस्थाओं की गरिमा को भी ठेस पहुंचाने वाला कदम है।
प्रेस वार्ता में यह भी मांग की गई कि चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए तथा यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर संबंधित लोगों पर कार्रवाई की जाए। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि साहित्य परिषद को राजनीतिक दबाव से मुक्त रखना सभी साहित्यप्रेमियों और समाज की जिम्मेदारी है।
आघाड़ी के नेताओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि चुनाव प्रक्रिया में सुधार नहीं किया गया और सरकारी हस्तक्षेप जारी रहा, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने को मजबूर होंगे। साथ ही उन्होंने साहित्य जगत से जुड़े लेखकों, कवियों और बुद्धिजीवियों से इस मुद्दे पर एकजुट होने की अपील की।
प्रेस वार्ता में साहित्य, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े कई प्रमुख कार्यकर्ता और पदाधिकारी उपस्थित थे। सभी ने एक स्वर में साहित्यिक संस्थाओं की स्वायत्तता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।



