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भारत को कृत्रिम बुद्धिमत्ता में बड़े स्तर पर निवेश की आवश्यकता:-पर्सिस्टेंट सिस्टम्स के प्रबंध निदेशक डॉ. आनंद देशपांडे का मत

भारत को कृत्रिम बुद्धिमत्ता में बड़े स्तर पर निवेश की आवश्यकता:-पर्सिस्टेंट सिस्टम्स के प्रबंध निदेशक डॉ. आनंद देशपांडे का मत

सीप की ओर से जीवनगौरव पुरस्कार देकर डॉ. देशपांडे को किया गया सम्मान

रिपोर्ट:विशाल समाचार संवाददाता

स्थान:पुणे, महाराष्ट्र

दिनांक:02 फरवरी 2026

वर्तमान में विश्वभर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता अर्थात एआई की लहर चल रही है और इसके माध्यम से कार्य के नए अवसर उपलब्ध हो रहे हैं। आने वाले समय को देखते हुए भारत को इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश करने की आवश्यकता है, ऐसा मत पर्सिस्टेंट सिस्टम्स के प्रबंध निदेशक डॉ. आनंद देशपांडे ने व्यक्त किया।

सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में डॉ. देशपांडे द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण योगदान के लिए सॉफ्टवेयर एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ऑफ पुणे (सीप) की ओर से भारतीय कंप्यूटर वैज्ञानिक एवं शिक्षाविद पद्मश्री प्रो. डी. बी. पाठक के हाथों उन्हें जीवनगौरव पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर डॉ. देशपांडे बोल रहे थे।

इस कार्यक्रम में पर्सिस्टेंट सिस्टम्स के संस्थापक दादा देशपांडे, सीप के अध्यक्ष शिवराज साबळे, उपाध्यक्ष शिवेश विश्वनाथन, सचिव विद्याधर पुरंदरे, कोषाध्यक्ष आनंद रानडे, सीप की पूर्व अध्यक्ष विनीता गेरा, अभिजीत अत्रे, नितिन देशपांडे तथा आशुतोष पारसनीस सहित कई गणमान्य उपस्थित थे। कोरेगांव पार्क स्थित होटल वेस्टीन में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में कार्यरत विभिन्न व्यक्तियों एवं संस्थाओं को सीप स्टार अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया।

ऑपरेशनल एक्सीलेंस श्रेणी में ‘ऑलव्यू सिस्टम्स’, मेकिंग अ डिफरेंस इन पीपल प्रैक्टिसेस श्रेणी में ‘जोरिएंट’ एवं ‘आईसर्टीज’, बेस्ट ईएसजी प्रैक्टिसेस श्रेणी में ‘ओपस’, बेस्ट टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन प्रैक्टिसेस श्रेणी में ‘इवोलंट’ को सम्मानित किया गया। वहीं एक्सेम्प्लरी वूमन लीडर श्रेणी में बेला खेर एवं दीप्ती देवरकोंडा तथा टेक रोल मॉडल श्रेणी में भूषण सालेर एवं अभिजीत झीलपेलवार को सीप की ओर से सम्मान प्रदान किया गया।

डॉ. देशपांडे ने कहा कि पिछले 25 वर्षों में सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अनेक परिवर्तन हुए हैं और इसमें निरंतर प्रगति हो रही है। भारत द्वारा इस क्षेत्र में की गई प्रगति सराहनीय है। मोबाइल और ई-मेल में आए परिवर्तनों का उल्लेख करते हुए उन्होंने सॉफ्टवेयर के विकास की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आईटी की पहली लहर कनेक्टिविटी की थी, दूसरी लहर प्लेटफॉर्म और विभिन्न प्रणालियों की रही, जबकि वर्तमान लहर कृत्रिम बुद्धिमत्ता की है।

उन्होंने कहा कि एआई एक विशाल प्लेटफॉर्म है, जिसमें कार्य करने के लिए नए-नए अवसर उपलब्ध हैं और काम की कोई कमी नहीं है।

“भारत में आईटी क्षेत्र में तेजी से प्रगति हो रही है। यदि देश भविष्य को ध्यान में रखते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में अधिक निवेश करता है, तो इससे देश की प्रगति को निश्चित रूप से लाभ होगा। एआई की वर्तमान लहर लंबे समय तक रहने वाली है, जिससे रोजगार और नवाचार के कई नए अवसर पैदा होंगे,” ऐसा डॉ. देशपांडे ने कहा।

जीवनगौरव पुरस्कार प्राप्त होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि पहली बार यह पुरस्कार मिल रहा है और वह भी सीप जैसे परिवार से, इसलिए यह उनके लिए विशेष गर्व की बात है।

इस अवसर पर पद्मश्री प्रो. डी. बी. पाठक ने कहा कि डॉ. आनंद देशपांडे के आईटी क्षेत्र में किए गए कार्यों से पुणे की वैश्विक पहचान और प्रतिष्ठा में वृद्धि हुई है। कार्यक्रम का संचालन चैतन्य राठी ने किया।

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