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स्मार्ट मोबिलिटी के विकास में साइबर सुरक्षा बड़ी चुनौती : डॉ. रेजी मथाई

स्मार्ट मोबिलिटी के विकास में साइबर सुरक्षा बड़ी चुनौती : डॉ. रेजी मथाई

रिपोर्ट विशाल समाचार संवाददाता 

स्थान: पुणे, महाराष्ट्र

दिनांक: 03 फरवरी 2026।

स्मार्ट मोबिलिटी सॉल्यूशंस के विकास में साइबर सुरक्षा एक प्रमुख चुनौती बनकर उभर रही है। वाहन उद्योग के विशेषज्ञों के बीच हुई चर्चाओं में यह बात स्पष्ट रूप से सामने आई है। यह जानकारी ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई) के निदेशक डॉ. रेजी मथाई ने दी।

वे एआरएआई की ओर से मोशी स्थित पीआईईसीसी में आयोजित ‘सिम्पोजियम ऑन इंटरनेशनल ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी’ (एसआईएटी–2026) के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे।

समारोह में केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्रालय के राज्य मंत्री भूपति राजू श्रीनिवास वर्मा ने एसआईएटी–2026 के सफल आयोजन के लिए एआरएआई की सराहना की। उन्होंने कहा कि जब भारत 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर है, तब सुरक्षित, स्वच्छ और हरित मोबिलिटी का महत्व और भी बढ़ जाता है। उन्होंने प्रमाणन, अनुसंधान और प्रौद्योगिकी सशक्तिकरण के माध्यम से राष्ट्रीय पहलों को समर्थन देने में एआरएआई की भूमिका को भी रेखांकित किया।

इस अवसर पर हीरो मोटोकॉर्प लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी विक्रम कसबेकर, एसएई इंडिया के अध्यक्ष डॉ. जी. नागराजन तथा एसआईएटी–2026 के संयोजक डॉ. एन. एच. वाळके भी उपस्थित रहे।

डॉ. रेजी मथाई ने बताया कि एसआईएटी–2026 के 19वें संस्करण की थीम “सुरक्षित और सतत मोबिलिटी के लिए नवोन्मेषी मार्ग” रही। इस संदर्भ में आयोजित विशेषज्ञ चर्चाओं के दौरान यह सामने आया कि स्मार्ट मोबिलिटी समाधान विकसित करने में साइबर सुरक्षा, एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (एडीएएस) का प्रमाणन, चार्जिंग अवसंरचना, रेंज एंग्जायटी और लागत की वहन क्षमता जैसी चुनौतियों पर आने वाले समय में विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि पूर्णतः इलेक्ट्रिक वाहनों के साथ-साथ हाइब्रिड वाहनों को बढ़ावा देना, चार्जिंग समय और लागत को कम करने के लिए स्मार्ट ग्रिड का एकीकरण, 5जी और समर्पित रेडियो तकनीक के माध्यम से वी2एक्स (V2X) संचार प्रणाली का उपयोग, सड़क सुरक्षा, यातायात दक्षता और स्वायत्त ड्राइविंग को सुगम बनाएगा। साथ ही वर्ष 2030 तक कार्बन न्यूट्रैलिटी के लक्ष्य को प्राप्त करने में भी यह सहायक सिद्ध होगा।

डॉ. मथाई ने यह भी बताया कि सम्मेलन में आत्मनिर्भर भारत के अंतर्गत स्वदेशी तकनीक विकास के लिए मजबूत इकोसिस्टम और स्थानीय संसाधनों के अधिकतम उपयोग पर विशेष जोर दिया गया।

एसआईएटी–2026 में 2,500 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया तथा 13,000 से अधिक आगंतुकों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया। सम्मेलन के दौरान 64 तकनीकी सत्र, 8 प्लेनरी सत्र, 2 पैनल चर्चाएं आयोजित की गईं। कुल 248 तकनीकी शोध पत्र प्रस्तुत किए गए, जिनमें 33 अंतरराष्ट्रीय शोध पत्र शामिल थे। विभिन्न श्रेणियों में सर्वश्रेष्ठ तीन शोध पत्रों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया, जबकि टाटा मोटर्स को सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र का पुरस्कार प्रदान किया गया।

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