
‘मंत्री वेंटेज’ की संपत्ति की नीलामी कर पीड़ितों को भुगतान किया जाए – डॉ. हुलगेश चलवादी
आम नागरिकों को सड़क पर लाने वाले डेवलपर को किया जाए ब्लैकलिस्ट
पुणे पुलिस आयुक्त व मनपा की संयुक्त समिति से जांच की मांग
रिपोर्ट:विशाल समाचार संवाददाता
स्थान पुणे, महाराष्ट्र
सैकड़ों फ्लैटधारकों को गुमराह कर उन्हें आर्थिक संकट में डालने तथा मजदूरों, कामगारों, उप-ठेकेदारों और ठेकेदारों की मेहनत की कमाई रोकने वाले खराड़ी स्थित ‘मंत्री वेंटेज’ प्रकल्प की संपत्ति की नीलामी कर पीड़ितों को न्याय दिया जाए, ऐसी मांग पूर्व नगरसेवक एवं बहुजन नेता डॉ. हुलगेश चलवादी ने शुक्रवार (6 फरवरी) को की है। उन्होंने संबंधित डेवलपर को ब्लैकलिस्ट कर परियोजना पर स्थायी रोक लगाने तथा उसका निर्माण अनुमति पत्र रद्द करने की भी मांग की।
डॉ. चलवादी ने इस प्रकरण की पुणे पुलिस आयुक्तालय एवं पुणे महानगरपालिका के भवन निर्माण विभाग के माध्यम से गहन जांच कर दोषियों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग को लेकर पुणे मनपा आयुक्त को ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने शहर पुलिस से संबंधित डेवलपर के खिलाफ मामला दर्ज कर उसकी गिरफ्तारी करने तथा धोखाधड़ी से जुड़े बैंक द्वारा डेवलपर की संपत्ति की नीलामी कर पीड़ितों को उनकी राशि वापस दिलाने की अपील की। ऐसे मामलों में एक आदर्श उदाहरण स्थापित किया जाना चाहिए, ऐसा भी उन्होंने कहा।
डॉ. चलवादी ने कहा कि इस प्रकार के डेवलपर्स आम नागरिकों की जीवनभर की कमाई को बर्बाद कर देते हैं। गांव मौजे खराड़ी, सर्वे नंबर 16/4A, पुणे स्थित ‘मंत्री ट्विनलिंग्स प्राइवेट लिमिटेड’ के कारण फ्लैटधारक, ठेकेदार, मजदूर, आर्किटेक्ट तथा निर्माण सामग्री आपूर्तिकर्ताओं का जीवन पूरी तरह प्रभावित हुआ है। डेवलपर ने अधूरे निर्माण को विभिन्न मार्केटिंग योजनाओं के जरिए बेचकर करोड़ों रुपये एकत्र किए।
उन्होंने आरोप लगाया कि परियोजना को गिरवी रखकर भारी कर्ज लिया गया, फ्लैटधारकों से रकम प्राप्त होने के बावजूद ठेकेदारों, कर्मचारियों और सामग्री आपूर्तिकर्ताओं के भुगतान नहीं किए गए। इसके कारण कई परिवारों पर कर्ज का बोझ बढ़ गया है और कुछ के खिलाफ दीवानी मुकदमे भी दर्ज हुए हैं।
समय पर फ्लैट का कब्जा न मिलने से अनेक परिवार आज भी किराए के मकानों में रहने को मजबूर हैं। बिल्डर की गैर-जिम्मेदार कार्यप्रणाली से नागरिकों को आर्थिक, मानसिक और शैक्षणिक नुकसान झेलना पड़ा है। डॉ. चलवादी ने स्पष्ट किया कि इस परियोजना से जुड़े पीड़ित फ्लैटधारकों, ठेकेदारों, मजदूरों, कर्मचारियों और सामग्री आपूर्तिकर्ताओं की पूर्व सहमति के बिना किसी भी प्रकार की स्वीकृति प्रक्रिया नहीं की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि पुणे देश के रहने योग्य अग्रणी शहरों में शामिल है और ‘स्मार्ट सिटी’ के रूप में इसकी पहचान बनाने में मनपा के अधिकारी-कर्मचारियों का बड़ा योगदान है। ऐसे में इस प्रकार के अनियमित और धोखाधड़ीपूर्ण मामलों पर कड़ी कार्रवाई होना आवश्यक है।



