
डेटा संरक्षण और पारदर्शकता के बीच संतुलन जरूरी:– मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल
रिपोर्ट: विशाल समाचार संवाददाता
स्थान: मुंबई, महाराष्ट्र
डेटा संरक्षण और प्रशासनिक पारदर्शकता के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। नागरिकों को उनके व्यक्तिगत डेटा पर अधिकार और नियंत्रण मिलना लोकतंत्र की मूल आवश्यकता है, यह प्रतिपादन महाराष्ट्र के मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल ने किया।
डिजिटल युग में नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और जिम्मेदार प्रशासन को मजबूत करने की दिशा में महाराष्ट्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) अधिनियम, 2023 और उससे संबंधित नियमों पर सह्याद्री अतिथिगृह में एक उच्चस्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस अधिकारी, कानून विशेषज्ञ, तकनीक और गोपनीयता क्षेत्र के विशेषज्ञों ने भाग लिया।
मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल ने साइबर सुरक्षा, डेटा स्वामित्व अधिकार और डेटा संरक्षण के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि DPDP अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के बाद किसी भी प्रकार की डेटा लीक सीधे दंडात्मक कार्रवाई का कारण बन सकती है।
मजबूत सुरक्षा उपायों की आवश्यकता – प्रधान सचिव ब्रिजेश सिंह
सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के प्रधान सचिव तथा महानिदेशक ब्रिजेश सिंह ने कहा कि DPDP अधिनियम के कारण डेटा संग्रह, भंडारण और उपयोग की प्रक्रिया में बदलाव करना होगा। उन्होंने कहा कि कई प्रणालियां आवश्यकता से अधिक डेटा एकत्र करती हैं। पुराने डेटाबेस की समीक्षा, डेटा इम्पैक्ट असेसमेंट और मजबूत सुरक्षा उपायों को अपनाने की आवश्यकता है। विशेष रूप से बच्चों, महिलाओं और संवेदनशील वर्गों के डेटा के प्रति अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है।
जिम्मेदार डेटा प्रबंधन पर जोर – सचिव विरेंद्र सिंह
सूचना प्रौद्योगिकी सचिव विरेंद्र सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक कल्याण और वित्तीय समावेशन जैसे क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं के विस्तार से नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा और सही उपयोग एक बड़ी जिम्मेदारी बन गई है। DPDP अधिनियम सरकारी संस्थाओं की कार्यप्रणाली में बुनियादी बदलाव लाने वाला है। नागरिकों का विश्वास ही सार्वजनिक प्रशासन की असली ताकत है, इसलिए हर विभाग को पारदर्शी, नैतिक और जिम्मेदार डेटा प्रबंधन पद्धतियां अपनानी चाहिए।
गोपनीयता मौलिक अधिकार – एडवोकेट खुशबू जैन
एडवोकेट खुशबू जैन ने DPDP अधिनियम की संवैधानिक पृष्ठभूमि स्पष्ट करते हुए कहा कि गोपनीयता का अधिकार एक मौलिक अधिकार है। किसी भी व्यक्ति की व्यक्तिगत जानकारी उसकी सहमति के बिना एकत्र नहीं की जा सकती। नागरिकों को अपने डेटा की जानकारी पाने, उस तक पहुंच, सहमति वापस लेने और डेटा हटाने का अधिकार प्राप्त है।
लेगैसिस टीम की प्रस्तुति में DPDP अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों, डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड, डेटा फिड्यूशियरी, डेटा प्रिंसिपल, कंसेंट मैनेजर और डेटा प्रोटेक्शन ऑफिसर (DPO) की भूमिकाओं की जानकारी दी गई। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि डेटा उल्लंघन की स्थिति में जिम्मेदारी केवल विक्रेताओं की ही नहीं, बल्कि संबंधित अधिकारियों की भी होगी।
कार्यशाला में भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा और महाआईटी के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।



