पूणेमहाराष्ट्रस्वास्थ्य

अपोलो हॉस्पिटल्स पुणे ने की ‘जीरो टू हीरो’ पहल की शुरुआत, विश्व कैंसर माह में कैंसर की शीघ्र पहचान की शक्ति को किया मजबूत

अपोलो हॉस्पिटल्स पुणे ने की ‘जीरो टू हीरो’ पहल की शुरुआत, विश्व कैंसर माह में कैंसर की शीघ्र पहचान की शक्ति को किया मजबूत

रिपोर्ट: विशाल समाचार

स्थान:पुणे महाराष्ट्र

पुणे: शहर के पहले 400-बेड क्वाटरनरी केयर सेंटर, अपोलो हॉस्पिटल्स पुणे ने आज विश्व कैंसर माह के मौके पर अपनी जागरूकता पहल ‘जीरो टू हीरो’ की शुरुआत की। यह कैंपेन कैंसर को उसके शुरुआती चरण में पहचानने से जीवन बचाने वाले प्रभाव को उजागर करने के लिए तैयार किया गया है। यह पहल अपोलो की इस मूल मान्यता को रेखांकित करती है कि यदि कैंसर की पहचान समय पर हो जाए तो उसे खत्म किया जा सकता है। इस अभियान के माध्यम से ऑन्कोलॉजिस्ट, कैंसर सर्वाइवर्स और स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर स्क्रीनिंग, रोकथाम और समय पर उपचार के महत्व को सशक्त रूप से प्रस्तुत किया जा रहा है।

 

 

अपोलो हॉस्पिटल्स पुणे का ऑन्कोलॉजी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस अत्याधुनिक तकनीक और बहु-विषयक विशेषज्ञता के साथ समग्र कैंसर उपचार प्रदान करता है। यह केंद्र अत्यंत सटीक प्रारंभिक पहचान के लिए एआई-सक्षम पीईटी-सीटी, लक्षित और सटीक रेडिएशन थेरेपी के लिए वैरियन एज लिनैक, तथा यूरोलॉजिकल, स्त्रीरोग, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल और हेड एवं नेक कैंसर की जटिल सर्जरी के लिए दा विंची एक्सआई रोबोटिक सिस्टम से सुसज्जित है। एडवांस्ड डायग्नोस्टिक्स, प्रिसिजन रेडिएशन और रोबोटिक सर्जरी के सहयोग से यह केंद्र प्रारंभिक पहचान, सटीक निदान, उन्नत उपचार और बेहतर रिकवरी तक एकीकृत देखभाल प्रदान करता है, जो तकनीक-आधारित और रोगी-केंद्रित सेवाओं के माध्यम से कैंसर के परिणामों में सुधार के प्रति अपोलो की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

लॉन्च पर अपोलो हॉस्पिटल्स पुणे की सीईओ डॉ. मनीषा कर्माकर ने कहा, “कैंसर के खिलाफ लड़ाई में शुरुआती पहचान और रोकथाम सबसे शक्तिशाली हथियार हैं। समय पर हस्तक्षेप से जीवन बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है और यह अपोलो की इस दीर्घकालिक सोच को मजबूत करता है कि कैंसर को हराया जा सकता है। लेकिन स्क्रीनिंग तभी प्रभावी होती है जब लोग उसमें भाग लेते हैं। डर, सामाजिक कलंक, गलत जानकारी और जागरूकता की कमी अक्सर निदान में देरी का कारण बनती है। अपोलो हॉस्पिटल्स पुणे में हमारा व्यापक प्रोहेल्थ कार्यक्रम, जो भारत का पहला एआई-संचालित प्रिवेंटिव हेल्थ प्रोग्राम है, एडवांस्ड स्क्रीनिंग और जोखिम आकलन के माध्यम से लोगों को अपने स्वास्थ्य पर सक्रिय नियंत्रण लेने के लिए सशक्त बनाता है।”

वरिष्ठ सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, रोबोटिक एवं एचआईपीईसी विशेषज्ञ डॉ. स्निता सिनुकुमार ने कहा, “लगभग 40 से 50 प्रतिशत कैंसर को स्क्रीनिंग और जीवनशैली में बदलाव के माध्यम से रोका जा सकता है या प्रारंभिक अवस्था में पहचाना जा सकता है। डिजिटल मैमोग्राफी, पैप स्मीयर, लो-डोज सीटी स्कैन, कोलोनोस्कोपी, पीएसए परीक्षण और ओरल एग्ज़ामिनेशन जैसे परीक्षण लक्षण प्रकट होने से पहले ही कैंसर की पहचान कर सकते हैं। जब कैंसर का पता समय पर चल जाता है, तो जीवित रहने की दर 80 से 90 प्रतिशत या उससे अधिक तक बढ़ सकती है।”

अपोलो हॉस्पिटल, पुणे की ऑन्कोलॉजी टीम ने कहा, “कई प्रकार के कैंसर को जीवनशैली में बदलाव और जनस्वास्थ्य प्रयासों के माध्यम से रोका जा सकता है। तंबाकू से परहेज, शराब का सीमित सेवन, स्वस्थ वजन बनाए रखना, नियमित शारीरिक गतिविधि, फल और सब्ज़ियों का सेवन, धूप से बचाव तथा एचपीवी और हेपेटाइटिस बी जैसे टीके महत्वपूर्ण हैं। सरकारों को स्क्रीनिंग और स्वास्थ्य कैंपेन तक पहुंच सुनिश्चित करनी चाहिए, जबकि स्वास्थ्य संस्थानों, स्कूलों और कार्यस्थलों को स्वस्थ आदतों को बढ़ावा देना चाहिए और कम उम्र से ही मार्गदर्शन प्रदान करना चाहिए।”

प्रारंभिक चेतावनी संकेतों को पहचानना और चिकित्सकीय जांच में देरी करने की प्रवृत्ति को दूर करना भी उतना ही आवश्यक है, जो विशेष रूप से पुरुषों के स्वास्थ्य में आम देखी जाती है। बिना कारण वजन घटना, लगातार थकान, असामान्य रक्तस्राव, नई गांठ का बनना या तीन सप्ताह से अधिक समय तक बनी रहने वाली खांसी जैसे लक्षणों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हालांकि ये संकेत हमेशा कैंसर का संकेत नहीं होते, लेकिन सफल उपचार के लिए प्रारंभिक पहचान अत्यंत महत्वपूर्ण है, विशेषकर प्रोस्टेट, किडनी और ब्लैडर कैंसर के मामलों में, जो शुरुआती चरणों में बिना लक्षण के हो सकते हैं। आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों, जैसे उन्नत रोबोटिक सर्जरी, ने कई प्रारंभिक चरण के कैंसर को अत्यधिक उपचार योग्य या पूरी तरह से ठीक किया जा सकने वाला बना दिया है। इसलिए आवश्यक है कि लोग अपने शरीर की बात सुनें, पीएसए ब्लड टेस्ट जैसे सरल स्क्रीनिंग परीक्षण कराएं और किसी भी लक्षण के बने रहने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें।

 

‘जीरो टू हीरो’ जैसी पहलों के माध्यम से अपोलो हॉस्पिटल्स पुणे का उद्देश्य अधिक जागरूकता पैदा करना, लोगों को स्वास्थ्य के प्रति सक्रिय दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करना और समय पर कदम उठाने के लिए सशक्त बनाना है, ताकि प्रारंभिक पहचान और उन्नत उपचार के जरिए कैंसर के बेहतर परिणाम सुनिश्चित किए जा सकें।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button