
सूर्यदत्त इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी द्वारा आयोजित ‘ल क्लासे’ फैशन शो में दिखी ‘शाश्वत भारत’ की झलक
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान:पुणे महाराष्ट्र
पुणे: सूर्यदत्त एजुकेशन फाउंडेशन संचालित सूर्यदत्त इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (SIFT) की ओर से आयोजित वार्षिक फैशन शो ‘ल क्लासे’ में इस वर्ष ‘शाश्वत भारत’ की संकल्पना को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर ‘सूर्यदत्त’ के संस्थापक अध्यक्ष प्रा. डॉ. संजय बी. चोरडिया ने कहा कि शाश्वत भविष्य के लिए भारतीय संस्कृति, परंपरा, कला एवं प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना प्रत्येक व्यक्ति की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
प्रा. डॉ. संजय बी. चोरडिया एवं सुषमा चोरडिया के मार्गदर्शन में तथा SIFT की प्राचार्या डॉ. सायली पांडे की पहल पर आयोजित इस फैशन शो में विद्यार्थियों ने आधुनिक फैशन के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों, पारंपरिक हस्तकला और शाश्वत डिजाइन सिद्धांतों का सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया। कार्यक्रम को छह विशेष सत्रों में विभाजित किया गया था, जिनमें शाश्वतता, विरासत और जिम्मेदार डिजाइन पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।

उद्घाटन सत्र ‘भूमि और तंतु – द सॉइल ऑफ द लैंड’ में खादी, ऑर्गेनिक कॉटन, हेम्प, लिनन और अहिंसा सिल्क जैसे पारंपरिक भारतीय प्राकृतिक तंतुओं को प्रदर्शित किया गया। पर्यावरण के अनुकूल सामग्री, प्राकृतिक बनावट और सांस लेने योग्य वस्त्रों पर विशेष ध्यान दिया गया। मृदु मिट्टी जैसे रंग और ऑफ-व्हाइट शेड्स ने शुद्धता और धरती से जुड़े डिजाइन के संबंध को दर्शाया।
दूसरे सत्र ‘सूर्यशक्ति (सोलर स्पिंडल)’ में सूर्य ऊर्जा और चरखे की लयबद्ध गति से प्रेरित परिधानों के माध्यम से भारतीय दर्शन से जुड़ी जीवंतता और नवचेतना को दर्शाया गया। प्रवाही सिल्हूट्स और हस्तनिर्मित टेक्सचर के माध्यम से ऊर्जा को जीवनशक्ति के रूप में प्रस्तुत किया गया।

‘हस्तकला – द आर्ट ऑफ हैंड्स’ सत्र में भारत की समृद्ध हस्तकला परंपरा का उत्सव मनाया गया। इसमें कलमकारी जैसे पारंपरिक वस्त्रों के साथ कढ़ाई, पेंटिंग और अरी-जरदोजी जैसी अलंकरण तकनीकों को आधुनिक ब्लेज़र्स और टेलर्ड ट्राउज़र्स के साथ प्रस्तुत किया गया, जिससे पारंपरिकता और आधुनिकता का संतुलन दिखाई दिया।
‘धरोहर’ सत्र भारत की वस्त्र परंपरा के संरक्षण और संवर्धन पर आधारित था। इसमें पैठणी, बनारसी, महेश्वरी, कांचीवरम, पटोला और ब्रोकेड जैसे पारंपरिक हाथकरघा वस्त्रों को आधुनिक सिल्हूट्स में नए रूप में प्रस्तुत किया गया। समृद्ध रंगों के उपयोग ने विरासत और शाश्वतता के समन्वय को सशक्त रूप से अभिव्यक्त किया।

पांचवें सत्र ‘रंगरेज’ में टाय-एंड-डाय, शिबोरी और बटिक जैसी पारंपरिक रंगाई तकनीकों को प्राकृतिक एवं जैविक रंगों के माध्यम से पुनर्जीवित किया गया। इस संग्रह ने परिवर्तन, संतुलन और सहअस्तित्व का संदेश देते हुए पर्यावरणीय जिम्मेदारी को रेखांकित किया।
समापन सत्र ‘मिट्टी एंड मोर’ में भारतीय मिट्टी से जुड़ी भावनात्मक जड़ों को प्रदर्शित किया गया। इसमें कपास, लिनन तथा शेष बचे कपड़ों का उपयोग कर पुनर्चक्रण, न्यूनतम अपशिष्ट और संसाधनों के उचित उपयोग को प्रोत्साहित किया गया।
कार्यक्रम में सहयोगी उपाध्यक्ष स्नेहल नवलखा, विभिन्न संस्थानों के प्रमुख, अभिभावक, विद्यार्थी एवं अन्य गणमान्य अतिथि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। डिजाइनर संदीप नवलखा, ब्यूटीशियन शीतल जैन एवं मॉडल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की संचालिका रंजना सिंह ने शो का मूल्यांकन किया। मेकअप हेतु VLCC का सहयोग प्राप्त हुआ, जबकि अमृता पानसे ने कार्यक्रम का संचालन किया और अंत में डॉ. सायली पांडे ने आभार व्यक्त किया।

आंतरमहाविद्यालयीन प्रतियोगिता में गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक कॉलेज ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। कार्यक्रम का विशेष आकर्षण ‘किड्स राउंड’ रहा, जिसमें सूर्यदत्त नेशनल स्कूल के विद्यार्थियों ने ‘भूमि और तंतु’ विषय पर आधारित परिधानों में आत्मविश्वास के साथ रैम्प वॉक कर उपस्थितों का मन मोह लिया।
‘ल क्लासे 2026’ के अंतर्गत आयोजित प्रतियोगिता में टीम धरोहर एवं रंगरेज ने प्रथम स्थान तथा टीम हस्तकला ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। बेस्ट डिजाइनर के रूप में ईश्वरी आंबेकर (भूमि एंड तंतु), लीना चौधरी (सूर्यशक्ति), अपूर्वा माने (धरोहर), शुभांगी कराळे (हस्तकला), अंजली सोलट (रंगरेज) और श्रेया इंगुळकर (मिट्टी एंड मोर) को सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर प्रा. डॉ. संजय बी. चोरडिया ने कहा कि समाज प्राकृतिक संसाधनों, संस्कृति, परंपरा और स्थानीय कला एवं हस्तकला का संरक्षक है। इस धरोहर को संरक्षित रखते हुए समकालीन संदर्भ में आगे बढ़ाना आवश्यक है। उन्होंने पर्यावरणीय चिंतन पर आधारित प्रभावी फैशन प्रस्तुति के लिए SIFT के सभी विद्यार्थियों एवं प्राध्यापकों को बधाई दी।



