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कॉस्ट अकाउंटेंट्स कुशल व विशेषज्ञ बनने पर जोर दे

कॉस्ट अकाउंटेंट्स कुशल व विशेषज्ञ बनने पर जोर दे

डॉ. पराग काळकर का प्रतिपादन; ‘आईसीएमएआई’ पुणे चैप्टर द्वारा मेधावी छात्रों का सम्मान

रिपोर्ट,: विशाल समाचार

स्थान;पुणे महाराष्ट्र

पुणे: कॉस्ट अकाउंटेंसी एक चुनौतीपूर्ण क्षेत्र है जो देश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए छात्रों को नैतिक मूल्यों का पालन करते हुए विषय का गहन अध्ययन कर इस क्षेत्र में कुशल व विशेषज्ञ बनने को प्राथमिकता देनी चाहिए, ऐसा प्रतिपादन सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय के प्र-कुलगुरु डॉ. पराग काळकर ने किया।

 

दी इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएमएआई) पुणे चैप्टर द्वारा कर्वेनगर स्थित सीएमए भवन में आयोजित मेधावी छात्रों के सम्मान समारोह में वे बोल रहे थे। कार्यक्रम में जीएसटी सहआयुक्त सीएमए संजाली डायस, आईसीएमएआई के उपाध्यक्ष सीएमए नीरज जोशी, रीजनल काउन्सिल मेंबर सीएमए चैतन्य मोहरीर, सीएमए डॉ. संजय भार्गवे, पुणे चैप्टर अध्यक्ष सीएमए श्रीकांत ईप्पलपल्ली, उपाध्यक्ष सीएमए राहुल चिंचोळकर, स्टूडेंट कोऑर्डिनेशन कमिटी के चेयरमैन सीएमए अमेय टिकले, कोषाध्यक्ष सीएमए तनुजा मंत्रवादी, अनुजा दाभाड़े सहित अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे।

 

दोपहर सत्र में गरवारे महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. किशोर देसरडा, सीएमए हनुमंत जमदाडे तथा सीएस कल्याणी शिरोडे ने विद्यार्थियों को मार्गदर्शन दिया। सीएमए सौमित्र बावठाणकर की स्मृति में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया, वहीं पीसीसीए आर्ट सर्कल व संदीप जोशी परिवार की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को भी पुरस्कृत किया गया।

 

डॉ. काळकर ने कहा कि सीएमए विद्यार्थियों को केवल डिग्री तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, नवाचार और नई तकनीकों को अपनाकर स्वयं को लगातार उन्नत करना चाहिए। तकनीक के कारण मूलभूत कार्य भले ही मशीनों द्वारा हो रहे हों, लेकिन निर्णय लेने की क्षमता मानव की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर, वित्त, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में व्यापक अवसर उपलब्ध हैं, जिनका लाभ विद्यार्थियों को उठाना चाहिए।

 

सीएमए संजाली डायस ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता नौकरियां कम करने वाली नहीं बल्कि नए अवसर सृजित करने वाली परिवर्तनकारी शक्ति है। जो पेशेवर स्वयं को लगातार अपडेट रखते हैं और नई कौशल सीखते हैं, वे भविष्य में अधिक सफल होंगे। मानवीय संवेदनशीलता और विश्लेषणात्मक सोच ही असली ताकत है।

 

सीएमए नीरज जोशी ने विद्यार्थियों को सलाह दी कि प्रोफेशनल बनने के बाद भी सीखने की प्रवृत्ति बनाए रखें और संस्था से जुड़े रहें। इससे क्षेत्र की नई जानकारी और वरिष्ठों के अनुभव का लाभ मिलता है। सेवा क्षेत्र में सीएमए की मांग तेजी से बढ़ रही है, इसलिए देश-विदेश में उपलब्ध अवसरों के लिए तैयार रहना चाहिए।

 

कार्यक्रम में सीएमए चैतन्य मोहरीर और डॉ. संजय भार्गवे ने भी मार्गदर्शन किया। सीएमए श्रीकांत ईप्पलपल्ली ने आईसीएमएआई की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। प्रास्ताविक सीएमए अमेय टिकले ने तथा स्वागत-परिचय सीएमए राहुल चिंचोळकर ने किया। संचालन तन्वी वैद्य, वैष्णवी जोशी और प्राची भुतडा ने किया।

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