
डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए राज्यभर में ‘डॉक्टर सुरक्षा अभियान’ चलाएगी रुग्ण हक्क परिषद
रिपोर्ट: विशाल समाचार
स्थान :पुणे महाराष्ट्र
डॉक्टरों पर बढ़ते हमलों और झूठी आपराधिक शिकायतों की पृष्ठभूमि में रुग्ण हक्क परिषद ने राज्यभर में ‘डॉक्टर सुरक्षा अभियान’ चलाने की घोषणा की है। इस अभियान के माध्यम से डॉक्टरों को सुरक्षित और न्यायसंगत वातावरण उपलब्ध कराने के लिए व्यापक प्रयास किए जाएंगे।
पुणे के पत्रकार भवन में आयोजित बैठक में डॉक्टर, पुलिस अधिकारी, विधि विशेषज्ञ और सामाजिक कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। बैठक की अध्यक्षता परिषद के संस्थापक उमेश चव्हाण ने की। इस दौरान पूर्व सहायक पुलिस उपायुक्त भानुप्रताप बर्गे, जान महमंद पठाण, डॉ. अविनाश भोंडवे सहित कई विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए केवल एक पक्ष नहीं, बल्कि डॉक्टर, अस्पताल, पुलिस, कानून विशेषज्ञ और समाज—सभी को मिलकर काम करना होगा। वक्ताओं ने कहा कि डॉक्टरों को संकट की स्थिति में मार्गदर्शन देने वाली व्यवस्था विकसित करना समय की आवश्यकता है।
डॉ. अविनाश भोंडवे ने कहा कि जैसे मरीजों के अधिकार महत्वपूर्ण हैं, वैसे ही डॉक्टरों के अधिकारों की रक्षा भी जरूरी है। उन्होंने डॉक्टरों से अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन करने और मरीजों से संयम बनाए रखने की अपील की।
वहीं डॉ. अमोल देवळेकर ने कहा कि कई मामलों में डॉक्टरों के खिलाफ अन्यायपूर्ण कार्रवाई होती है, जिससे उनमें मानसिक तनाव बढ़ रहा है। डॉ. मंदार सावजी ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उचित कानूनी सहायता के अभाव में कई डॉक्टर कठिनाइयों में फंस जाते हैं।
बैठक में ‘रिस्पेक्ट डॉक्टर्स’ जनजागरूकता अभियान चलाने और पुलिस व डॉक्टरों के बीच नियमित समन्वय बैठक आयोजित करने का प्रस्ताव भी रखा गया। साथ ही, इन प्रस्तावों को सरकार के समक्ष प्रस्तुत कर 30 दिनों में निर्णय नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी गई।
प्रमुख मांगें:डॉक्टर सुरक्षा कानून का सख्ती से पालन, हेल्पलाइन और कानूनी सहायता कक्ष की स्थापना, हमले की स्थिति में पुलिस की त्वरित कार्रवाई, झूठे मामलों में फंसे डॉक्टरों को सहायता, ब्लैकमेल और वसूली पर सख्ती, विशेषज्ञ वकीलों की टीम, डॉक्टरों की छवि की सुरक्षा, बदनामी पर रोक, जिला स्तर पर विवाद निवारण समिति तथा अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे बैठक में उठाए गए।
निष्कर्ष:वक्ताओं ने कहा कि डॉक्टरों के खिलाफ बढ़ती घटनाओं को देखते हुए अब व्यापक और ठोस कदम उठाने की जरूरत है, ताकि चिकित्सा क्षेत्र में कार्यरत लोगों को सुरक्षित वातावरण मिल सके और वे निर्भय होकर अपनी सेवाएं दे सकें।



