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कैंपस से ही राजनीति की नई पीढ़ी तैयार होगी: अनुराग सिंह ठाकुर

कैंपस से ही राजनीति की नई पीढ़ी तैयार होगी: अनुराग सिंह ठाकुर

रिपोर्ट :विशाल समाचार

स्थान: पुणे महाराष्ट्र

पुणे: नीति-निर्माण, प्रशासन और सार्वजनिक सेवा की जटिलताओं को समझते हुए युवाओं को राजनीतिक रूप से दक्ष, प्रशासनिक रूप से सक्षम और सामाजिक रूप से संवेदनशील बनने की आवश्यकता है। कैंपस से ही ऐसी नई पीढ़ी तैयार हो सकती है जो राजनीति को शुद्ध और मजबूत बनाए। यह आह्वान लोकसभा सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने किया।

वे MIT World Peace University तथा MIT School of Government द्वारा आयोजित 15वीं भारतीय छात्र संसद के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। इस अवसर पर पूर्व सांसद व वरिष्ठ पत्रकार शाहिद सिद्दीकी तथा राज्यसभा सांसद डॉ. संदीप कुमार पाठक सम्मानित अतिथि के रूप में उपस्थित थे। कार्यक्रम में एमआईटी डब्ल्यूपीयू के कार्यकारी अध्यक्ष एवं छात्र संसद के संस्थापक डॉ. राहुल विश्वनाथ कराड, कुलगुरु डॉ. आर. एम. चिटणीस तथा सीईओ डॉ. प्रसाद खांडेकर भी उपस्थित रहे।

इस अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा भेजे गए शुभकामना संदेश का वाचन किया गया।

अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि लोकतंत्र, नेतृत्व और सार्वजनिक नीति के साथ-साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता की नैतिकता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यदि युवा 21वीं सदी में कैंपस से कैबिनेट तक पहुंचने का सपना देखते हैं तो उन्हें एआई नैतिकता को समझना होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मानवता के हित में तकनीक और एआई की शक्ति पर वैश्विक चर्चा को बढ़ावा दिया है।

उन्होंने कहा कि पिछले दस वर्षों में शिक्षा क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन हुए हैं। आईआईटी, आईआईएम, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़ी है। आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के लिए सेमीकंडक्टर, हेल्थकेयर और अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हो रही है। उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि यदि राजनीति करनी है तो तर्क और तथ्यों के आधार पर करें।

 

शाहिद सिद्दीकी ने कहा कि भारत को विश्वगुरु बनने के लिए युवाओं को स्वयं को सशक्त बनाना होगा। तकनीक के इस युग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर पूरी तरह निर्भर नहीं होना चाहिए। देश में हुए कई बड़े परिवर्तनों में युवाओं के आंदोलनों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जिनमें जेपी आंदोलन जैसी कई ऐतिहासिक पहल शामिल हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को जाति-पाति की दीवारें तोड़कर देश के विकास के लिए काम करना चाहिए। लोकतंत्र का अर्थ है सभी नागरिकों को समान न्याय, समान कानून और समान व्यवहार मिलना।

डॉ. संदीप कुमार पाठक ने कहा कि “कैंपस टू कैबिनेट” को लेकर कई भ्रांतियां हैं। विश्वविद्यालयों में छात्र चुनाव होना जरूरी है, क्योंकि बहस और संवाद से ही बेहतर नेतृत्व विकसित होता है। उन्होंने कहा कि मूल्य आधारित राजनीति समय की आवश्यकता है और देश का भविष्य उज्ज्वल है।

डॉ. राहुल विश्वनाथ कराड ने कहा कि भ्रष्टाचार, जातिवाद, सांप्रदायिकता और औपनिवेशिक मानसिकता को बदलना जरूरी है। भारतीय छात्र संसद लोकतंत्र में नेतृत्व के अवसर प्रदान करने वाला एक महत्वपूर्ण मंच है। इसका उद्देश्य अच्छे और शिक्षित युवाओं को राजनीति में आने के लिए प्रेरित करना है।

 

कार्यक्रम में छात्र दीपक कुमार पांडे, पूर्वी गंजीवाले, प्रताप पुंडे, उदय शर्मा और नेहाली चावडीकर ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

कुलगुरु डॉ. आर. एम. चिटणीस ने स्वागत भाषण दिया, जबकि कार्यक्रम का संचालन प्रो. डॉ. गौतम बापट ने किया।

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