
जरूरतमंदों के लिए ‘पृथ्वी मोबाइल क्लिनिक’सिर्फ पांच रुपये में जांच और उपचार
उमेश चव्हाण की पहल पर मरीज हक परिषद की स्वास्थ्य मुहिम
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान:पुणे महाराष्ट्र
पुणे: गरीब, जरूरतमंद, मजदूर तथा झुग्गी-बस्ती क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से रुग्ण हक्क परिषद की ओर से ‘पृथ्वी मोबाइल क्लिनिक’ पहल शुरू की गई है। इस पहल के अंतर्गत मात्र पांच रुपये में स्वास्थ्य जांच एवं दवाइयों सहित उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
इस अभियान का 111वां शिविर बुधवार को आयोजित किया गया। अब तक कुल 10,077 मरीज इस सेवा का लाभ उठा चुके हैं, ऐसी जानकारी परिषद के संस्थापक उमेश चव्हाण ने पत्रकार परिषद में दी। इस अवसर पर शहर अध्यक्षा अपर्णा साठ्ये-मारणे, डॉ. आदिनाथ लांडे, डॉ. अनिकेत मडावी, अमित जागडे, अमोल चव्हाण सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।
उमेश चव्हाण ने बताया कि यदि एक ही स्थान पर अस्पताल स्थापित किया जाता, तो सभी क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवा पहुंचाना संभव नहीं होता। इसी कारण मोबाइल क्लिनिक की संकल्पना को साकार किया गया। वर्तमान में पुणे के 60 विभिन्न स्थानों पर यह सेवा प्रदान की जा रही है, जिसमें दो डॉक्टर, दो नर्स, वाहन चालक, एक समन्वयक एवं दो सहायक कार्यरत हैं।
इस मोबाइल क्लिनिक के माध्यम से एमआरआई एवं सीटी स्कैन जैसी महंगी जांचें भी निःशुल्क कराई जा रही हैं। साथ ही गंभीर बीमारियों के लिए शल्य चिकित्सा हेतु मुख्यमंत्री सहायता निधि के माध्यम से आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है। प्रत्येक बस्ती में महीने में एक बार स्वास्थ्य जांच एवं उपचार की सुविधा दी जा रही है।
अपर्णा साठ्ये-मारणे ने बताया कि नियमित जांच के अभाव में छोटी बीमारियां गंभीर रूप धारण कर लेती हैं। आर्थिक तंगी के कारण गरीब एवं मजदूर वर्ग के नागरिक समय पर उपचार नहीं ले पाते, जिससे बीमारी बढ़ जाती है। इसे रोकने के उद्देश्य से मरीज हक परिषद की ओर से 25 लाख रुपये के निजी खर्च से अत्याधुनिक मोबाइल क्लिनिक तैयार किया गया है।

डॉ. बाबा आढाव से मिली प्रेरणा
कष्टकरी नेता स्वर्गीय डॉ. बाबा आढाव द्वारा शुरू किए गए दस रुपये में ‘झुणका-भाकर केंद्र’ से प्रेरणा लेते हुए परिषद ने जरूरतमंदों को मात्र पांच रुपये में गुणवत्तापूर्ण जांच एवं निःशुल्क दवाएं उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है।
अब तक यह मोबाइल क्लिनिक 107 स्थानों पर सेवा प्रदान कर चुका है। परिषद से संबद्ध ग्रैंड पृथ्वी मेडिकल फाउंडेशन के माध्यम से इस मोबाइल क्लिनिक का संचालन किया जा रहा है। इस सेवा पर प्रतिदिन लगभग 12 हजार रुपये तथा प्रतिमाह लगभग 3 लाख 60 हजार रुपये का खर्च आता है, जिसे स्वयं उमेश चव्हाण वहन कर रहे हैं।
कोट“जरूरतमंदों को समय पर जांच एवं उपचार मिल जाए तो बड़ी बीमारियों को टाला जा सकता है। पैसों के अभाव में किसी का इलाज रुकना नहीं चाहिए, इसी उद्देश्य से मात्र पांच रुपये में स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराई जा रही है। यह केवल सेवा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य जागरूकता की एक मुहिम है।”
— उमेश चव्हाण, संस्थापक, रुग्ण हक्क परिषद



