पूणेमहाराष्ट्र

रोटरी डिस्ट्रिक्ट 3131 की ओर से पर्यावरणीय चक्रिय अर्थव्यवस्था पर दो दिवसीय सम्मेलन पुणे में

रोटरी डिस्ट्रिक्ट 3131 की ओर से पर्यावरणीय चक्रिय अर्थव्यवस्था पर दो दिवसीय सम्मेलन पुणे में

रिपोर्ट :विशाल समाचार

स्थान:पुणे महाराष्ट्र

संपर्क:9822794568

पुणे। Rotary District 3131 की ओर से पर्यावरण विषयक चक्रिय अर्थव्यवस्था (सर्कुलर इकोनॉमी) पर दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन पुणे में किया जा रहा है। डिस्ट्रिक्ट के इतिहास में पहली बार आयोजित हो रहे इस सम्मेलन में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ भाग लेंगे। यह जानकारी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संतोष मराठे और रोटरी के पर्यावरण विभाग के जिला निदेशक राजेंद्रकुमार सराफ ने रविवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में दी। इस अवसर पर नितीन मुळे, निलेश धोपाडे, शीतल अर्जुनवाडकर, अरविंद मितसागर और उदय कुलकर्णी उपस्थित थे।

यह सम्मेलन 14 और 15 मार्च 2026 को MIT World Peace University के ज्ञानेश्वर सभागार में आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन के अंतर्गत उद्घाटन समारोह, विचार-विमर्श सत्र, सफलता की कहानियां तथा पर्यावरण विषयक प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम में पद्मश्री जी. डी. यादव, डॉ. बालकृष्ण पशुपति, प्रो. डॉ. एन. जे. पवार, डॉ. अरविंद नातू, शिवाजी मोरे, डॉ. आदित्य अभ्यंकर और संजय खरे विशेष रूप से भाग लेंगे। सम्मेलन के दौरान एमआईटी के संस्थापक डॉ. विश्वनाथ कराड तथा पर्यावरण क्षेत्र में कार्य करने वाले योद्धाओं का सम्मान भी किया जाएगा।

सम्मेलन का उद्घाटन 14 मार्च को सुबह 9:30 बजे होगा, जिसका शुभारंभ संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (United Nations Environment Programme) के केंद्रीय निदेशक डॉ. बालकृष्ण पशुपति के हाथों किया जाएगा।

उद्घाटन सत्र के बाद पहले सत्र में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की भूमिका पर डॉ. पशुपति व्याख्यान देंगे। इसके बाद हरित एवं स्वच्छ पर्यावरण में रोटरी की भूमिका विषय पर रोटरी इंटरनेशनल के पूर्व निदेशक अनिरुद्ध रॉयचौधरी अपने विचार व्यक्त करेंगे। वहीं जलवायु परिवर्तन और शिक्षा व्यवस्था विषय पर प्रो. डॉ. एन. जी. पवार तथा चक्रिय अर्थव्यवस्था में नई संभावनाओं पर पद्मश्री डॉ. जी. डी. यादव मार्गदर्शन करेंगे।

सम्मेलन के दौरान जल प्रबंधन और चक्रिय अर्थव्यवस्था विषय पर आयोजित परिचर्चा में डॉ. मंगेश कश्यप, डॉ. श्वेता लोखंडे, डॉ. दीपाली निंबाळकर और डॉ. सुजाता कोडक भाग लेंगी। वहीं उत्पादन लागत में बचत तथा चक्रिय अर्थव्यवस्था के संबंध में संजय खरे अपने विचार रखेंगे। सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय के प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख डॉ. आदित्य अभ्यंकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में चक्रिय अर्थव्यवस्था के लिए आधुनिक तकनीक की उपयोगिता पर मार्गदर्शन करेंगे।

सम्मेलन के दूसरे दिन 15 मार्च को सुबह 9:45 बजे विभिन्न रोटरी क्लबों द्वारा पर्यावरण संबंधी परियोजनाओं की प्रस्तुति दी जाएगी। इसके पश्चात ‘हरितवारी’ आंदोलन के प्रवर्तक शिवाजी मोरे उपस्थित लोगों से संवाद करेंगे। औषध निर्माण क्षेत्र में सतत पर्यावरण विषय पर डॉ. अरविंद नातू मार्गदर्शन देंगे। इसके अलावा चक्रिय अर्थव्यवस्था में व्यावसायिक अवसरों तथा सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं की भूमिका पर भी विशेष चर्चा होगी। दो दिवसीय सम्मेलन का समापन 15 मार्च को दोपहर 1 बजे किया जाएगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button