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महाबोधि महाविहार की मुक्ति के लिए पुणे में धरना आंदोलन

महाबोधि महाविहार की मुक्ति के लिए पुणे में धरना आंदोलन

रिपोर्ट: विशाल समाचार

स्थान:पुणे महाराष्ट्र

पुणे: बिहार के गया में स्थित ऐतिहासिक ‘महाबोधि महाविहार’ के प्रबंधन का अधिकार पूरी तरह से बौद्ध अनुयायियों को देने की मांग को लेकर पुणे में धरना आंदोलन किया गया। यह आंदोलन आज डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर उद्यान (जिल्हाधिकारी कार्यालय के सामने) में पुणे क्षेत्रीय भिक्षु संघ के वतीर आयोजित किया गया।

इस आंदोलन में भिक्षु डॉ. नागघोष महाथेरो, भिक्षु बुद्धघोष महाथेरो, भिक्षु शाक्यपुत्र, भिक्षु राजरत्न, शाक्यपुत्र राहुल, धम्मरखीत, भिक्षु पय्यारक्खीत, भिक्षु धम्मानंद, भिक्षु आनंद, भिक्षु सचित बोधि, भिक्षु मिलिंद, भिक्षु प्रियदर्शी, भिक्षु संघपाल, भिक्षु यश सहित भिक्षु संघ के सदस्य उपस्थित थे।

इस अवसर पर पुणे के उपमहापौर परशुराम वाडेकर के हाथों तथागत गौतम बुद्ध और भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा का पूजन किया गया। इस दौरान पूर्व विधायक जयदेव गायकवाड़, राहुल डंबाळे, नगरसेवक नंदिनी धेंडे, निलेश आल्हाट, बालासाहेब जानराव, वसंतराव साळवे, शैलेश चव्हाण, भागवानराव वैराट, महेंद्र कांबळे, रोहिदास गायकवाड़, निलेश गायकवाड़** सहित हजारों नागरिकों ने भाग लिया।

आंदोलन में भिक्षु संघ के साथ-साथ बौद्ध समाज के नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए। आंदोलनकारियों ने घोषणाबाजी करते हुए महाबोधि महाविहार के प्रबंधन को बौद्ध अनुयायियों के अधिकार में देने की मांग की।

आंदोलनकारियों ने कहा कि तथागत गौतम बुद्ध ने जिस स्थान पर ज्ञान प्राप्त किया, वह गया का महाबोधि महाविहार है, जिसकी स्थापना प्राचीन काल में सम्राट अशोक ने की थी। बौद्ध धर्म के लिए अत्यंत पवित्र इस स्थल का हजारों वर्षों का ऐतिहासिक महत्व है, बावजूद इसके वर्तमान में इसका प्रबंधन गैर-बौद्ध व्यक्तियों के अधीन है।

महाबोधि महाविहार विश्व बौद्ध धरोहर का केंद्र है और इसका प्रबंधन पूरी तरह से बौद्ध समाज की देखरेख में होना चाहिए, यह मांग आंदोलन के माध्यम से उठाई गई। साथ ही देशभर के बौद्ध समाज ने इस मांग को लेकर संगठित होकर राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन करने की भी घोषणा की।

इस आंदोलन के माध्यम से शासन का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया गया और महाबोधि महाविहार की मुक्ति के लिए आगे भी संघर्ष जारी रखने का संकल्प आंदोलनकारियों ने व्यक्त किया।

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