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2030 तक सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन का लक्ष्य, देशभर में HPV टीकाकरण अभियान शुरू

2030 तक सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन का लक्ष्य, देशभर में HPV टीकाकरण अभियान शुरू

रिपोर्ट :विशाल समाचार

स्थान; पुणे महाराष्ट्र

पुणे,: दुनियाभर में लाखों महिलाएं गर्भाशय मुख के कैंसर (सर्वाइकल कैंसर) जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रही हैं। गर्भाशय के निचले हिस्से को ‘सर्विक्स’ कहा जाता है और इसी भाग में होने वाले कैंसर को गर्भाशय मुख का कैंसर कहा जाता है। लगभग 99.7 प्रतिशत मामलों में यह बीमारी ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) के संक्रमण के कारण होती है। लंबे समय तक रहने वाला यह संक्रमण आगे चलकर कैंसर का रूप ले सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम बढ़ाते हुए वर्ष 2030 तक गर्भाशय मुख के कैंसर के उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में 28 फरवरी 2026 को राजस्थान के अजमेर से गर्भाशय मुख के कैंसर के खिलाफ देशव्यापी अभियान की शुरुआत की गई। महाराष्ट्र में सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से 8 मार्च से और पुणे जिले में 9 मार्च से HPV टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान को सफल बनाने के लिए समाज के सभी वर्गों की भागीदारी जरूरी बताई गई है। नागरिकों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर विश्वास न करें और वैज्ञानिक जानकारी पर भरोसा रखें।

भारत में महिलाओं में पाए जाने वाले कैंसरों में गर्भाशय मुख का कैंसर दूसरे स्थान पर है। वर्ष 2024 के अनुमान के अनुसार देश में 78,499 नए मरीज सामने आए, जबकि इस बीमारी से 42,392 महिलाओं की मृत्यु हुई। वर्ष 2022 के आयु-मानकीकृत आंकड़ों के अनुसार प्रति एक लाख महिलाओं में 11.6 महिलाएं इस कैंसर से प्रभावित होती हैं, जबकि मृत्यु दर प्रति एक लाख महिलाओं में 5.1 है।

HPV ‘पैपिलोमाविरिडे’ परिवार का डबल-स्ट्रैंड DNA वायरस है, जिसके 200 से अधिक प्रकार पाए जाते हैं। इनमें से कुछ कम जोखिम वाले होते हैं, जबकि कुछ प्रकार कैंसर पैदा करने की अधिक संभावना रखते हैं। वर्तमान में 17 प्रकार—16, 18, 45, 33, 58, 31, 52, 35, 59, 39, 56, 51, 68, 73, 26, 69 और 82—कैंसर से जुड़े पाए गए हैं। इनमें HPV-16 और HPV-18 सबसे अधिक खतरनाक माने जाते हैं और विश्व के लगभग 77 प्रतिशत तथा भारत के करीब 83 प्रतिशत सर्वाइकल कैंसर के मामलों के लिए जिम्मेदार हैं।

इस कैंसर के शुरुआती चरण में आमतौर पर कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। बीमारी बढ़ने पर गर्भाशय मुख पर गांठ बन सकती है और यह योनि तक फैल सकती है। पेट के निचले हिस्से में दर्द, यौन संबंध के समय दर्द, फिस्टुला बनना, सायटिका की समस्या या पैरों में ऐंठन जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसलिए समय पर जांच और रोकथाम बेहद जरूरी है।

HPV संक्रमण प्रजनन तंत्र में होने वाला सबसे सामान्य यौन संचारित संक्रमण माना जाता है। अधिकतर मामलों में यह संक्रमण बिना लक्षण के 1 से 2 साल में अपने आप कम हो जाता है, लेकिन कुछ प्रकार लंबे समय तक बने रहने पर कैंसर पूर्व स्थिति (CIN-1, CIN-2, CIN-3) पैदा कर सकते हैं, जो आगे चलकर गंभीर कैंसर में बदल सकती है। HPV संक्रमण से गर्भाशय मुख के अलावा गुदा, गले, योनि और लिंग का कैंसर भी हो सकता है।

इस बीमारी को सार्वजनिक स्वास्थ्य के स्तर पर समाप्त करने के लिए वैश्विक स्तर पर लक्ष्य तय किए गए हैं। इसके तहत प्रति एक लाख महिला-वर्ष में चार से कम मामलों का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए 2030 तक 15 वर्ष से कम आयु की 90 प्रतिशत लड़कियों का HPV टीकाकरण, 35 वर्ष तक की कम से कम 70 प्रतिशत महिलाओं की जांच और 45 वर्ष की आयु में दोबारा जांच, साथ ही जिन महिलाओं में बीमारी पाई जाए उनमें से 90 प्रतिशत का समय पर इलाज करने का लक्ष्य रखा गया है।

इसी दिशा में राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में HPV वैक्सीन को शामिल करने की सिफारिश की गई है। इस टीकाकरण का मुख्य उद्देश्य गर्भाशय मुख के कैंसर की रोकथाम है। HPV से जुड़े सभी कैंसरों में लगभग 82 प्रतिशत मामले सर्वाइकल कैंसर के होते हैं। यदि लड़कियों को यौन सक्रिय होने से पहले टीका लगाया जाए तो इस कैंसर की रोकथाम सबसे प्रभावी तरीके से की जा सकती है।

क्वाड्रिवैलेंट HPV वैक्सीन (गार्डासिल) द्रव रूप में दी जाती है। 14 वर्ष की आयु की लड़कियों को बाएं हाथ के ऊपरी हिस्से की मांसपेशी में 0.5 मिली का एक डोज दिया जाता है। भारत सरकार ने दो या तीन डोज की जगह ‘एक डोज’ का शेड्यूल अपनाया है। शोध के अनुसार एक डोज भी दो डोज जितना ही प्रभावी संरक्षण देता है और लंबे समय तक प्रतिरक्षा प्रदान करता है।

पुणे जिले में इस अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला स्तर पर कार्ययोजना तैयार की गई है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों की 41,387, पुणे महानगरपालिका क्षेत्र की 33,000 और पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका क्षेत्र की 24,520 लड़कियों सहित कुल 98,907 बालिकाओं को इस अभियान का लाभ मिलने की उम्मीद है।

जिला परिषद पुणे के जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रामचंद्र हंकारे ने बताया कि जिलाधिकारी जितेंद्र डुडी और मुख्य कार्यकारी अधिकारी गजानन पाटील तथा अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी चंद्रकांत वाघमारे के मार्गदर्शन में जिले में 9 मार्च से 14 वर्ष आयु वर्ग की लड़कियों का टीकाकरण किया जा रहा है। इसके लिए स्कूलों में छात्राओं और उनके अभिभावकों को जागरूक किया जा रहा है। नागरिकों से अपील की गई है कि वे इस अभियान को सफल बनाने के लिए सहयोग करें। अधिक जानकारी के लिए 104 टोल-फ्री नंबर पर संपर्क किया जा सकता है।

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