पूणेमहाराष्ट्र

उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच की खाई पाटना जरूरी

उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच की खाई पाटना जरूरी

विवेक गाडगीळ का जोर; ‘अभिनव अभियांत्रिकी स्थापत्य केंद्र’ द्वारा विशेष संवाद सत्र का आयोजन

रिपोर्ट :विशाल समाचार

स्थान:पुणे महाराष्ट्र

पुणे: देश में आने वाले समय में इंजीनियरिंग से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में अपार संभावनाएं हैं, लेकिन कुशल और प्रशिक्षित मानव संसाधन की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इस समस्या के समाधान के लिए उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच की दूरी कम करना बेहद जरूरी है। इंजीनियरों और छात्रों के बीच सेतु निर्माण के साथ-साथ बिना इंजीनियर बने भी इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित युवाओं का निर्माण करने का लक्ष्य लेकर काम कर रहे ‘अभिनव अभियांत्रिकी स्थापत्य केंद्र’ का योगदान महत्वपूर्ण है। यह बात विवेक गाडगीळ ने कही।

डेक्कन जिमखाना क्लब में आयोजित इस विशेष संवाद सत्र में इंजीनियरिंग क्षेत्र के कई अनुभवी विशेषज्ञ शामिल हुए। विवेक गाडगीळ के साथ आर. बी. सूर्यवंशी (बी. जी. शिर्के कंस्ट्रक्शन टेक्नोलॉजी के उपाध्यक्ष) और कपिलेश भाटे (प्रीकास्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक) ने उद्योग और शिक्षा जगत के बीच तालमेल बढ़ाने, पाठ्यक्रमों को सशक्त बनाने, कौशल विकास और मानव संसाधन तैयार करने जैसे मुद्दों पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में अभियंता मनोज देशमुख ने संवाद का संचालन किया।

इस अवसर पर ‘एएएसके’ के माध्यम से आरएमसी प्लांट मैनेजमेंट (100 दिन का कोर्स) और इंडस्ट्री रेडीनेस प्रोग्राम जैसे दो नए त्रिस्तरीय पाठ्यक्रमों की शुरुआत की गई, जो छात्रों को सीधे उद्योग के लिए तैयार करने पर केंद्रित हैं।

विवेक गाडगीळ ने कहा कि आज के समय में निर्माण परियोजनाएं लगातार जटिल होती जा रही हैं, समय कम है और प्रोजेक्ट विशाल होते जा रहे हैं। ऐसे में कुशल और प्रशिक्षित मानवबल की आवश्यकता और भी बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि देश में बड़ी संख्या में इंजीनियरिंग कॉलेज तो खुल रहे हैं, लेकिन उद्योग की जरूरत के अनुसार फोरमैन, डिजाइनर, क्वालिटी कंट्रोलर, साइट मैनेजर और मशीनरी संभालने वाले कुशल कर्मियों की कमी बनी हुई है।

आर. बी. सूर्यवंशी ने बताया कि तेजी से बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था में निर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी 8 से 10 प्रतिशत तक है और आगे भी इसमें वृद्धि होने की संभावना है। बावजूद इसके, प्रशिक्षित मानवबल की कमी एक बड़ा विरोधाभास बनकर सामने आ रही है। उन्होंने यह भी कहा कि सिविल के साथ-साथ मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरों की भी इस क्षेत्र में भारी जरूरत है।

वहीं कपिलेश भाटे ने कहा कि कुशल मानवबल की कमी अब वैश्विक समस्या बन चुकी है। कई देशों में इसके लिए अलग मंत्रालय तक बनाए गए हैं। उन्होंने नई पीढ़ी की कार्यशैली पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि कम समय में ज्यादा वेतन की अपेक्षा बढ़ी है, जबकि मेहनत और संघर्ष की भावना में कमी देखी जा रही है।

संवाद सत्र के बाद प्रश्नोत्तर कार्यक्रम भी आयोजित किया गया, जिसमें उपस्थित लोगों ने अपने सुझाव दिए। ‘एएएसके’ के विभाग प्रमुख अशोक आव्हाड ने विभिन्न पाठ्यक्रमों की जानकारी दी, जबकि शौनक दबडघाव ने कार्यक्रम का संचालन किया और जयदीप राजे ने आभार व्यक्त किया।

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