
विज्ञान और आध्यात्मिक ज्ञान का समन्वय आवश्यक — डॉ. बालकृष्णन पिसुपती
डॉ. विश्वनाथ कराड को रोटरी इंटरनेशनल लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान:पुणे महाराष्ट्र
पुणे,“भारतीय संस्कृति के दार्शनिकों एवं तत्वज्ञान को शिक्षा पाठ्यक्रम तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे आधुनिक तकनीकी साधनों के साथ जोड़ा जाना आवश्यक है। तभी एक कार्यशील और उद्यमशील युवा पीढ़ी का निर्माण संभव होगा। साथ ही युवाओं में व्याप्त हीन भावना और आत्मविश्वास की कमी दूर होकर एक उज्ज्वल भारतीय पीढ़ी का निर्माण तेजी से हो सकेगा।” ये विचार संयुक्त राष्ट्र शैक्षणिक कार्यक्रम के भारतीय राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. बालकृष्णन पिसुपती ने व्यक्त किए।
वे एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के ग्रीन हाइड्रोजन रिसर्च सेंटर तथा रोटरी डिस्ट्रिक्ट 3131 के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘शाश्वत ऊर्जा हेतु चक्रीय अर्थव्यवस्था’ विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे।
इस अवसर पर रोटरी डिस्ट्रिक्ट 3131 की ओर से एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के संस्थापक अध्यक्ष, विश्वधर्मी प्रो. डॉ. विश्वनाथ दा. कराड को ‘सर्विस अबव सेल्फ — रोटरी इंटरनेशनल लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड 2025-26’ से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में वरिष्ठ वैज्ञानिक पद्मश्री डॉ. जी.डी. यादव, डी.वाई. पाटिल विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. एन.जे. पवार, आईसर के गवर्नर डॉ. अरविंद नातू, जगद्गुरु तुकोबाराय के वंशज ह.भ.प. शिवाजीराव मोरे-देहूकर तथा एमआईटी डब्ल्यूपीयू के जीएचआरसी के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. रत्नदीप जोशी सम्माननीय अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। साथ ही रोटरी 3131 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर संतोष मराठे और राष्ट्रीय परिषद के समन्वयक डॉ. राजेंद्रकुमार सराफ की भी प्रमुख उपस्थिति रही।
डॉ. बालकृष्णन पिसुपती ने कहा, “संयुक्त राष्ट्र और भारत सरकार विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में विज्ञान तथा मूल्याधारित शिक्षा के माध्यम से नई पीढ़ी को दिशा दे रहे हैं। भारत में शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों की आध्यात्मिक उन्नति के लिए प्रशिक्षण शिविरों और कार्यक्रमों के माध्यम से सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य निरंतर जारी है।”
विश्वधर्मी डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ने कहा, “ज्ञान, विज्ञान और अध्यात्म के क्षेत्र में सृष्टि, स्थिति और लय का चक्र निरंतर चलता रहता है। मानव मन और तकनीक दोनों इसी चक्र में विकसित होते हैं। आवश्यक है कि तकनीक ‘भस्मासुर’ न बने, बल्कि मानव कल्याण का साधन बने। विनाशकारी युद्धों के स्थान पर विकासात्मक कार्यों में इसका उपयोग होना चाहिए। सामाजिक मूल्यों के ह्रास को रोकने के लिए निःस्वार्थता, क्षमाशीलता और आध्यात्मिक चेतना को बढ़ावा देना आवश्यक है। ‘पसायदान’ के सार्वभौमिक संदेश को जीवन में उतारना समय की मांग है।”
पद्मश्री डॉ. जी.डी. यादव ने कहा, “ग्रीन हाइड्रोजन और हरित ऊर्जा के माध्यम से भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक स्तर पर मजबूत हो रही है। ज्ञान के साथ-साथ ऊर्जा क्षेत्र में भी भारत शीघ्र ही विश्वगुरु बनने की दिशा में अग्रसर है।”
डॉ. रत्नदीप जोशी ने एमआईटी द्वारा विकसित विदेशी एलपीजी के विकल्प के रूप में किफायती जैविक ईंधन बायोगैस तथा भविष्य के ऊर्जा स्रोत ग्रीन हाइड्रोजन से संबंधित वैज्ञानिक परियोजनाओं की प्रस्तुति दी। उन्होंने छात्रों द्वारा प्राप्त राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पेटेंट की जानकारी भी साझा की।
इस अवसर पर डॉ. एन.जी. पवार ने कहा कि विश्वविद्यालयों को गुरुकुल की अवधारणा के अनुरूप विकसित होना चाहिए, जो वैश्विक ज्ञान और आपूर्ति श्रृंखला के संतुलित विकास के केंद्र बनें। इसके पश्चात संजय खैरे और डॉ. आदित्य अभ्यंकर ने विभिन्न विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम की प्रस्तावना एवं स्वागत संतोष मराठे ने किया, जबकि संचालन रो. निलेश धोपडे और आभार प्रदर्शन रो. अरविंद मिठसागर ने किया।



