
जादूटोना विरोधी कानून का सख्ती से पालन जरूरी – डॉ. हुलगेश चलवादी
प्रगतिशील महाराष्ट्र में आस्था के नाम पर हो रही ठगी पर रोक लगाने की अपील
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान:पुणे महाराष्ट्र
संतों और समाज सुधारकों की भूमि महाराष्ट्र ने देश को प्रगतिशील विचारों की दिशा दी है, लेकिन आज भी विज्ञान के इस युग में कई लोग आस्था के नाम पर ढोंगी बाबाओं और तांत्रिकों के जाल में फंसकर आर्थिक, शारीरिक और मानसिक नुकसान उठा रहे हैं। यह बेहद चिंताजनक स्थिति है। लोगों को भगवान और धर्म में आस्था जरूर रखनी चाहिए, लेकिन अंधविश्वास का शिकार नहीं बनना चाहिए। यह अपील बहुजन आंदोलन के नेता और पूर्व नगरसेवक डॉ. हुलगेश चलवादी ने शनिवार (21 मार्च) को राज्य में चर्चित ‘कैप्टन’ प्रकरण की पृष्ठभूमि में की। उन्होंने कहा कि राज्य में लागू जादूटोना विरोधी कानून का प्रभावी क्रियान्वयन बेहद आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि कानून मौजूद होने के बावजूद हजारों मामले दर्ज होना और सैकड़ों ढोंगी बाबाओं की गिरफ्तारी इस बात का संकेत है कि समाज अभी भी अंधविश्वास की गिरफ्त में है। भक्ति और आस्था व्यक्तिगत विषय है, लेकिन जब कोई व्यक्ति चमत्कार का दावा कर बीमारी ठीक करने, गुप्त धन दिलाने, पैसे बरसाने या संकट दूर करने का लालच देता है, तो यह साफ तौर पर धोखाधड़ी है। नागरिकों को ऐसी भोंदूगिरी को बढ़ावा नहीं देना चाहिए।
डॉ. चलवादी ने कहा कि केवल केस दर्ज करने से अंधविश्वास खत्म नहीं होगा। राज्य सरकार को गांव और तहसील स्तर पर बड़े पैमाने पर जनजागरूकता अभियान चलाने चाहिए। स्कूलों और कॉलेजों में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने की जरूरत है। ढोंगी बाबाओं और तांत्रिकों में कानून का डर होना चाहिए। ऐसी प्रवृत्तियों पर कड़ी कार्रवाई कर समाज में उदाहरण स्थापित करना जरूरी है।
उन्होंने आगे कहा कि हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज, राजर्षि शाहू महाराज, महात्मा ज्योतिबा फुले और डॉ. भीमराव आंबेडकर ने समाज को तर्कसंगत सोच अपनाने की प्रेरणा दी। लोगों को अपने परिश्रम पर विश्वास करना चाहिए, किसी तांत्रिक के झांसे में नहीं आना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि आज भी लोग बाबा-बापुओं के चक्कर में पड़कर बर्बाद हो रहे हैं, तो यह समाज की वैचारिक कमजोरी को दर्शाता है। सभी को मिलकर एक वैज्ञानिक और विवेकशील समाज के निर्माण की दिशा में काम करना होगा।



