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इटावा में प्रशासन पर दोहरी चोट: डीएम पर वारंट, सूचना छिपाने पर आयोग की तैयार

मानवाधिकार आयोग सख्त—50 हजार का जमानती वारंट जारी

इटावा में प्रशासन पर दोहरी चोट: डीएम पर वारंट, सूचना छिपाने पर आयोग की तैयार

मानवाधिकार आयोग सख्त—50 हजार का जमानती वारंट जारी

आरटीआई में जवाब न मिलने पर मामला अब सूचना आयोग की दहलीज पर

रिपोर्ट:विशाल समाचार

स्थान:इटावा/लखनऊ।

इटावा जिला प्रशासन पर एक साथ दो मोर्चों पर सवाल खड़े हो गए हैं। एक ओर Uttar Pradesh Human Rights Commission ने नगर पालिका के वरिष्ठ लिपिक राजीव कुमार यादव की आत्महत्या मामले में सख्त रुख अपनाते हुए जिलाधिकारी के खिलाफ 50 हजार रुपये का जमानती वारंट जारी किया है, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर सूचना न देने का मामला अब Uttar Pradesh State Information Commission तक पहुंचने जा रहा है।

मानवाधिकार आयोग ने स्पष्ट किया है कि उसके आदेशों का पालन न होने पर यह कार्रवाई की गई। आयोग ने Uttar Pradesh Police के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए हैं कि 24 मार्च 2026 तक हर हाल में वारंट तामील कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

यह मामला उस आत्महत्या से जुड़ा है, जिसमें मृतक की पत्नी नीतू यादव ने आरोप लगाया है कि पदोन्नति विवाद के बाद अधिकारियों द्वारा मानसिक उत्पीड़न किया गया, जिससे मजबूर होकर यह कदम उठाया गया।

इसी बीच, ‘विशाल समाचार’ द्वारा उठाए गए जिला पंचायत राज विभाग के एक अन्य मामले में भी प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल गहराते जा रहे हैं। शिकायतों, मीडिया रिपोर्टों और सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी के बावजूद कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।

‘विशाल समाचार’ के संपादक देवेन्द्र सिंह तोमर (डी.एस. तोमर) ने बताया कि पहले मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर जांच की मांग की गई थी। इसके बाद आरटीआई के जरिए कार्रवाई की जानकारी और संबंधित आदेशों की प्रमाणित प्रतियां मांगी गईं। लखनऊ स्तर से आदेश जारी होने के बाद मामला जिला प्रशासन को भेजा गया, लेकिन तय समय सीमा में जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।

प्रथम अपील जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किए जाने के बाद भी स्थिति स्पष्ट न होने पर अब द्वितीय अपील के माध्यम से मामला सूचना आयोग में उठाने की तैयारी है। इस दौरान संबंधित अधिकारी बनवारी सिंह के समयपूर्व सेवानिवृत्त होने से मामला और चर्चा में आ गया है।

अपीलकर्ता का कहना है कि जब शिकायतें, समाचार रिपोर्ट और आरटीआई के माध्यम से तथ्य सामने आ चुके हैं, तो कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि आयोग स्तर पर भी जानकारी नहीं मिलती, तो आगे न्यायिक विकल्प अपनाने पर विचार किया जाएगा।

अब बड़ा सवाल यही है

क्या इटावा में प्रशासन जवाबदेही से बच रहा है,

या फिर सिस्टम के भीतर ही सच दबाया जा रहा है?

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