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दो साल में 93,940 महिलाएं लापता, 28 हजार का अब तक सुराग नहीं

दो साल में 93,940 महिलाएं लापता, 28 हजार का अब तक सुराग नहीं

राज्यसभा सांसद प्रो. डॉ. मेधा कुलकर्णी ने सदन में शून्य काल में उठाया मुद्दा, मानव तस्करी पर सख्त कार्रवाई करने की मांग

रिपोर्ट: विशाल समाचार

स्थान:पुणे महाराष्ट्र

पुणे: महाराष्ट्र में महिलाओं और नाबालिग लड़कियों के लापता होने के बढ़ते मामलों को लेकर राज्यसभा सांसद प्रो. डॉ. मेधा विश्राम कुलकर्णी ने मंगलवार को संसद के ‘जीरो आवर’ में गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह समस्या अब भयावह रूप ले चुकी है और इस पर तत्काल ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

 

कुलकर्णी ने गृह विभाग के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वर्ष 2024 और 2025 के दौरान राज्य में कुल 93,940 महिलाएं और लड़कियां लापता हुई हैं। इनमें 23 हजार से अधिक नाबालिग लड़कियां शामिल हैं। औसतन हर दिन 132 महिलाएं लापता हो रही हैं, जो बेहद चिंताजनक है।

 

उन्होंने बताया कि मुंबई, रायगढ़, नागपुर, छत्रपति संभाजीनगर, नवी मुंबई के साथ-साथ पुणे में भी ऐसे मामलों में तेजी आई है। पुणे में ही पिछले 15 दिनों में 13 से 17 वर्ष आयु वर्ग की 20 नाबालिग लड़कियां लापता होने की घटनाएं सामने आई हैं। इन मामलों में संगठित मानव तस्करी गिरोहों की सक्रियता की आशंका जताई गई है। साथ ही जबरन भगाकर ले जाना, झूठे प्रेम संबंधों के जरिए फंसाना और सोशल मीडिया का दुरुपयोग जैसे पहलू भी सामने आए हैं।

 

कुलकर्णी ने जांच और खोज अभियान की धीमी गति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि 2024 के 45 हजार मामलों में से 15 हजार का अब तक कोई सुराग नहीं मिला है, जबकि 2025 के 48 हजार मामलों में से 13 हजार महिलाएं अब भी लापता हैं। यानी पिछले दो वर्षों में करीब 28 हजार महिलाएं और लड़कियां अब तक नहीं मिल पाई हैं।

 

उन्होंने सवाल उठाया कि ये महिलाएं आखिर कहां गईं? क्या उनकी तस्करी कर दी गई, विदेशों में बेचा गया या उनके साथ कोई गंभीर अपराध हुआ? इन सवालों के जवाब मिलना जरूरी है।

 

इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए कुलकर्णी ने कई अहम सुझाव दिए। उन्होंने ‘गोल्डन आवर’ में त्वरित कार्रवाई के लिए आधुनिक और तेज जांच प्रणाली विकसित करने, मोबाइल ट्रैकिंग को मजबूत बनाने, सार्वजनिक स्थानों पर प्रभावी सीसीटीवी निगरानी सुनिश्चित करने की मांग की।

 

इसके अलावा, जबरन धर्मांतरण और विवाह के मामलों में सख्त कार्रवाई, नाबालिगों के सोशल मीडिया उपयोग पर नियंत्रण, यात्रा और होटलों में पहचान पत्र अनिवार्य करने की भी मांग रखी। उन्होंने राज्य के टोल नाकों पर डिजिटल पेमेंट और पहचान प्रणाली को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

 

कुलकर्णी ने केंद्र और राज्य सरकार से इस मुद्दे पर गंभीरता से ध्यान देते हुए ठोस और प्रभावी कदम उठाने की अपील की, ताकि महिलाओं और नाबालिग लड़कियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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