
विद्यार्थियों पर भारत को ‘विश्व गुरु’ बनाने की जिम्मेदारी – पांडुरंग बलकवडे
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान:पुणे महाराष्ट्र
पुणे। वरिष्ठ इतिहासकार पांडुरंग बलकवडे ने कहा कि भारत को पुनः ‘विश्व गुरु’ का स्थान दिलाने की जिम्मेदारी आज के विद्यार्थियों पर है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने करियर के साथ-साथ राष्ट्रनिष्ठा और कार्य के प्रति समर्पण बनाए रखें।
रमणबाग प्रशाला में विश्व रंगमंच दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बलकवडे और उद्योगपति डॉ. दिलीप देशपांडे के हाथों ‘सदानंद अचवल स्मृति पुरस्कार’ वितरित किए गए। यह पुरस्कार अमेरिका स्थित अनिल प्रयाग द्वारा प्रायोजित हैं।
इस दौरान ‘नाट्य आराधना’ पुरस्कार से अमोघ किरण कुलकर्णी (कक्षा 6) और ‘नाट्य प्रेरणा’ पुरस्कार से गौरव विशाल जगताप (कक्षा 10) को सम्मानित किया गया। साथ ही राज्य नाट्य स्पर्धा में द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले ‘माय सुपर हीरो’ नाटक के विद्यार्थियों का भी सम्मान किया गया।
अपने संबोधन में बलकवडे ने कहा कि कला व्यक्ति के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारत को 64 कलाओं की समृद्ध परंपरा मिली है, जिसे नई पीढ़ी को आगे बढ़ाना चाहिए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. दिलीप देशपांडे ने कहा कि नाटक समाज का दर्पण है और इसके माध्यम से समाज की वास्तविकताओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सकता है।
कार्यक्रम की शुरुआत तनय नाझीरकर की प्रस्तुति से हुई। उपमुख्याध्यापक महेश जोशी ने प्रस्तावना एवं आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर डॉ. शरद आगरखेडकर, अंजली गोरे, मंजुषा शेलूकर, रवींद्र सातपुते सहित शिक्षक, छात्र और बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे।



