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अंधश्रद्धा के बढ़ते मामलों पर सरकार विफल – कांग्रेस की कड़ी आलोचना

 अंधश्रद्धा के बढ़ते मामलों पर सरकार विफल – कांग्रेस की कड़ी आलोचना

रिपोर्ट: विशाल समाचार

स्थान:पुणे महाराष्ट्र

पुणे, प्रतिनिधि: महाराष्ट्र में अंधश्रद्धा और भोंदूगिरी के बढ़ते मामलों को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता गोपालदादा तिवारी ने पुणे स्थित कांग्रेस भवन में आयोजित पत्रकार परिषद में कहा कि राज्य में अंधविश्वास का फैलाव शासन की विफलता का परिणाम है। प्रशासनिक नियंत्रण कमजोर पड़ने के कारण ही भोंदू बाबाओं का प्रभाव बढ़ता जा रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रगतिशील महाराष्ट्र में कांग्रेस सरकार द्वारा बनाए गए ‘अंधश्रद्धा निर्मूलन कानून’ का उद्देश्य समाज और निर्दोष लोगों की रक्षा करना था, लेकिन वर्तमान सरकार के कार्यकाल में इस कानून को प्रभावहीन बना दिया गया। जागरूकता और प्रचार-प्रसार की कमी के कारण आज भी महिलाएं और आम नागरिक अंधविश्वास का शिकार हो रहे हैं।

तिवारी ने राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के हवाले से कहा कि जब समाज में तार्किक सोच का अभाव होता है, तब भय और भ्रम की स्थिति पैदा होती है, जिसका फायदा उठाकर असामाजिक तत्व निर्दोष लोगों का शोषण करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की उदासीनता के कारण भोंदूगिरी और पाखंड को बढ़ावा मिल रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि जब लोगों का सरकारी व्यवस्था पर विश्वास कमजोर होता है, तब वे अपनी समस्याओं के समाधान के लिए गलत रास्तों की ओर मुड़ते हैं और बुवाबाजी का सहारा लेने लगते हैं। यदि शासन द्वारा वैज्ञानिक दृष्टिकोण और जनजागरण पर गंभीरता से काम किया जाता, तो ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकता था।

तिवारी ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ मामलों में राजनीतिक संरक्षण के कारण भोंदू बाबाओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने 4 मार्च 2025 को प्रकाशित एक समाचार का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे मामलों पर प्रशासन और पुलिस की निष्क्रियता चिंताजनक है।

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की पहचान हमेशा से प्रगतिशील विचारधारा, सामाजिक सुधार और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के लिए रही है। महात्मा फुले, छत्रपति शाहू महाराज, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर और आगरकर जैसे महान विचारकों ने समाज को तर्क, समानता और वैज्ञानिक सोच की दिशा दी है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51(क) में भी वैज्ञानिक दृष्टिकोण और मानवतावाद को बढ़ावा देने की बात कही गई है।

तिवारी ने निष्कर्ष में कहा कि समस्याओं का समाधान अंधश्रद्धा में नहीं, बल्कि वैज्ञानिक सोच और जागरूकता में है। सरकार का कर्तव्य है कि वह समाज को सशक्त, जागरूक और तर्कसंगत बनाए।

इस अवसर पर सुभाष थोरवे, भोला वांजळे, तात्या शिर्के, आबा जगताप, गणेश मोरे, राजेश सुतार, संजय अभंग, सुभाष जेधे, गणेश शिंदे, उदय लेले और नरेश आवटे सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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