स्वास्थ्यबिहारसीतामढ़ी

जिला स्वास्थ्य समिति, सीतामढ़ी में सभी आयुष चिकित्सकों का एईएस/जेई विषयक विस्तृत प्रशिक्षण आयोजित

जिला स्वास्थ्य समिति, सीतामढ़ी में सभी आयुष चिकित्सकों का एईएस/जेई विषयक विस्तृत प्रशिक्षण आयोजित

रिपोर्ट: विशाल समाचार 

स्थान: सीतामढ़ी, बिहार 

 

जिला स्वास्थ्य समिति, सीतामढ़ी के सभागार में जिले के सभी आयुष चिकित्सकों के लिए **एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) एवं जापानी इंसेफेलाइटिस (JE)** विषय पर एक दिवसीय विस्तृत प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता **डॉ. अखिलेश कुमार**, सिविल सर्जन, सीतामढ़ी द्वारा की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ सिविल सर्जन एवं जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी के द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।

 

कार्यक्रम का उद्देश्य आयुष चिकित्सकों की एईएस/जेई रोग के प्रति समझ को सुदृढ़ करना, रोग की शीघ्र पहचान, समय पर उपचार एवं प्रभावी रेफरल व्यवस्था सुनिश्चित करना तथा सामुदायिक स्तर पर जागरूकता गतिविधियों को बढ़ावा देना था।

 

प्रशिक्षण दृश्यश्रव्य माध्यम से **डॉ. आर. के. यादव**, जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी (DVBDCO), सीतामढ़ी द्वारा किया गया। उन्होंने प्रतिभागियों को एईएस एवं जेई की वर्तमान स्थिति, रोग के कारण, संक्रमण के स्रोत, जोखिम कारकों, लक्षणों, बचाव एवं नियंत्रण संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान कीं।

 

प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि **एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES)** मस्तिष्क में सूजन उत्पन्न करने वाली एक गंभीर स्वास्थ्य स्थिति है, जिसके प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी, बेहोशी, दौरे पड़ना एवं मानसिक स्थिति में परिवर्तन शामिल हैं। वहीं **जापानी इंसेफेलाइटिस (JE)** एक वायरल रोग है, जो संक्रमित मच्छरों के माध्यम से फैलता है और बच्चों में गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है।

 

डॉ. यादव ने बताया कि एईएस/जेई के मामलों में **”गोल्डन ऑवर”** का विशेष महत्व होता है। यदि मरीज को प्रारंभिक लक्षणों के साथ शीघ्र स्वास्थ्य संस्थान तक पहुंचाकर उचित उपचार उपलब्ध कराया जाए तो मृत्यु एवं विकलांगता की संभावना को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने सभी चिकित्सकों को निर्देशित किया कि संदिग्ध मामलों की पहचान होने पर तत्काल रेफरल एवं रिपोर्टिंग सुनिश्चित करें।

 

प्रशिक्षण में निम्नलिखित प्रमुख विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई—

 

* एईएस एवं जेई की परिभाषा एवं रोग की पृष्ठभूमि।

* एईएस के सामान्य एवं गंभीर लक्षणों की पहचान।

* जेई के संचरण चक्र एवं मच्छर नियंत्रण उपाय।

* संदिग्ध मरीजों की स्क्रीनिंग एवं केस मैनेजमेंट।

* रेफरल प्रोटोकॉल एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली।

* टीकाकरण की भूमिका एवं महत्व।

* सामुदायिक जागरूकता एवं व्यवहार परिवर्तन संचार गतिविधियां।

* स्वास्थ्य संस्थानों में रिपोर्टिंग एवं निगरानी व्यवस्था।

* अंतर्विभागीय समन्वय एवं समुदाय आधारित रोकथाम उपाय।

 

इस अवसर पर **असित रंजन** (जिला कार्यक्रम प्रबंधक), **प्रिंस कुमार** , **आरिफ शेख़**,**पवन कुमार**, (वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी), **रोहित कुमार** (प्रोग्राम लीड, पिरामल फाउंडेशन), **रजनीश कुमार**, **कमलेश कुमार** सहित स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे।

 

कार्यक्रम के दौरान सिविल सर्जन डॉ. अखिलेश कुमार ने कहा कि एईएस/जेई जैसी गंभीर बीमारियों की रोकथाम में चिकित्सकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी आयुष चिकित्सकों से अपील की कि वे अपने-अपने कार्यक्षेत्र में समुदाय को जागरूक करें, बच्चों में बुखार एवं न्यूरोलॉजिकल लक्षणों की स्थिति में त्वरित चिकित्सकीय सलाह दें तथा संदिग्ध मामलों की सूचना तत्काल स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध कराएं।

 

प्रशिक्षण के अंत में प्रतिभागियों ने एईएस/जेई नियंत्रण कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू करने तथा समुदाय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button