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बारामती में सुनेत्रा अजित पवार को शिवसंग्राम का समर्थन : डॉ. ज्योती मेटे

बारामती में सुनेत्रा अजित पवार को शिवसंग्राम का समर्थन : डॉ. ज्योती मेटे

रिपोर्ट :विशाल समाचार 

स्थान: पुणे महाराष्ट्र 

पुणे :स्वर्गीय अजितदादा पवार के दुर्भाग्यपूर्ण और अकाल निधन के बाद पूरे महाराष्ट्र में शोक की लहर फैल गई है तथा उनके जाने से राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में बड़ी रिक्तता उत्पन्न हुई है। ऐसी स्थिति में बारामती विधानसभा उपचुनाव में उम्मीदवार सुनेत्रा अजित पवार को शिवसंग्राम पार्टी समर्थन देगी। यह घोषणा शिवसंग्राम की अध्यक्षा डॉ. ज्योती विनायकराव मेटे ने पुणे में आयोजित पत्रकार परिषद में की। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शिवसंग्राम उपचुनाव में सक्रिय रूप से प्रचार अभियान में भाग लेगा।

डॉ. ज्योती मेटे ने कहा कि स्वर्गीय अजितदादा पवार और स्वर्गीय विनायकराव मेटे के बीच संबंध केवल राजनीतिक नहीं थे, बल्कि वैचारिक और सामाजिक स्तर पर भी अत्यंत गहरे थे। इसी संबंध को ध्यान में रखते हुए शिवसंग्राम ने यह समर्थन देने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की परंपरा सहानुभूति, प्रतिबद्धता और सामाजिक एकता की रही है। किसी जननेता के निधन के बाद उनके परिवार के साथ मजबूती से खड़े रहना राज्य की संस्कृति का हिस्सा है। शिव, शाहू, फुले और आंबेडकर के प्रगतिशील विचारों पर चलने वाले अजितदादा के परिवार को समर्थन देना समाज का कर्तव्य है।

राष्ट्रीय महिला आयोग के अध्यक्ष पद के लिए उनके नाम की चर्चा के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “मैंने एक प्रशासकीय अधिकारी के रूप में कई वर्षों तक कार्य किया है, इसलिए इस जिम्मेदारी को निभाने की क्षमता मुझमें है। यदि भविष्य में अवसर मिलता है, तो महिला आयोग के अध्यक्ष पद पर कार्य करने की इच्छा है। इसके लिए यदि कोई राजनीतिक निर्णय लेना पड़े, तो वह परिस्थितियों के अनुसार लिया जाएगा।”

उन्होंने आगे कहा कि विनायकराव मेटे के निधन के बाद भी पार्टी को संगठित बनाए रखने में सफलता मिली है और आने वाले समय में संगठन को और मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा। करुणा मुंडे संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों के तहत चुनाव लड़ रही हैं, लेकिन नैतिकता के आधार पर निर्णय लेना आवश्यक है।

महाराष्ट्र जैसे प्रगतिशील राज्य में महिलाओं पर अत्याचार की घटनाएं दुर्भाग्यपूर्ण हैं। अशोक खरात प्रकरण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इसकी जांच एसआईटी के माध्यम से की जा रही है, लेकिन इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए।

इसके अलावा, एनसीईआरटी की पुस्तकों से मराठा साम्राज्य के गौरवशाली इतिहास को हटाना एक गंभीर और आपत्तिजनक घटना है, जिसे लेकर उन्होंने कड़ी आपत्ति जताई।

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