
‘नृत्यसमिधा’ के माध्यम से गुरु प्रभा मराठे को भावभीनी श्रद्धांजलि
भाव, लय और अभिव्यक्ति के संगम से पुणेकरों ने देखा शास्त्रीय नृत्य का मनमोहक अविष्कार
रिपोर्ट:विशाल समाचार
स्थान: पुणे महाराष्ट्र
पुणे,: घुंघरुओं की तालबद्ध गूंज, चेहरे पर उभरती भावमुद्राएं, सधी हुई लय और कलात्मक प्रस्तुति—ऐसे मनोहारी नृत्याविष्कार का अनुभव पुणेकरों ने ‘नृत्यसमिधा’ कार्यक्रम में किया। इस विशेष नृत्य संध्या के माध्यम से नृत्यगुरु प्रभा मराठे को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कथक नृत्यांगना वेदांती भागवत महाडिक के लयोम इंस्टीट्यूट ऑफ आर्ट्स, कलाछाया और कलाधाम फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में गोखलेनगर स्थित कलाछाया सांस्कृतिक केंद्र में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहां दर्शकों ने उत्साहपूर्वक सराहना की।
विभिन्न नृत्य समूहों द्वारा प्रस्तुत रचनाओं में भारतीय शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध परंपरा का सुंदर चित्रण देखने को मिला। रश्मि जंगम पांडकर और उनकी टीम की प्रस्तुति में लय और भाव का अद्भुत संतुलन दिखाई दिया। वहीं मुल्ला अफसर खान और वेदांती भागवत महाडिक के नृत्य समूहों ने भी विविध शैली में प्रस्तुति देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। समूह नृत्यों में कलाकारों का तालमेल, सटीक प्रस्तुति और प्रभावशाली पदचालन विशेष आकर्षण रहा।
‘दशावतार’ जैसी प्रस्तुतियों में नाटकीयता, ऊर्जा और आध्यात्मिकता का प्रभावी समावेश देखने को मिला। पारंपरिक वेशभूषा, सजीव अभिव्यक्ति और आकर्षक प्रकाश व्यवस्था ने कार्यक्रम को और भी प्रभावशाली बना दिया। ‘कृष्णध्वनि’, ‘रुक्मिणी स्वयंवर’, ‘प्रतिभा’ और ‘शिवशक्ति’ जैसी प्रस्तुतियों ने दर्शकों के हृदय को स्पर्श किया। अंत में सभी कलाकारों ने एक साथ मंच पर आकर गुरु प्रभा मराठे को नृत्यांजलि अर्पित की, जिससे पूरा सभागार भावनाओं से भर गया।

इस अवसर पर विदुषी राजश्री शिर्के, गुरु अमला शेखर और आचार्य डॉ. नीलिमा देशपांडे की विशेष उपस्थिति रही। उन्होंने कलाकारों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम भारतीय शास्त्रीय कला के संरक्षण और नई पीढ़ी तक इसके प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। साथ ही उन्होंने गुरु प्रभा मराठे से जुड़ी स्मृतियों को साझा किया। कार्यक्रम के दौरान वेदांती भागवत महाडिक द्वारा लिखित ‘कथकशास्त्र’ पुस्तक के आवरण का भी लोकार्पण किया गया।


