पूणेमहाराष्ट्र

व्यावहारिक उपयोगिता के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का समावेश आवश्यक

व्यावहारिक उपयोगिता के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का समावेश आवश्यक

भूपेश गहोत्रा के विचार : एमआईटी डब्ल्यूपीयू में ‘विश्वनोव्हा 2026’ का आयोजन

देशभर से 700 से अधिक टीमों की सहभागिता

रिपोर्ट :विशाल समाचार 

स्थान:पुणे महाराष्ट्र 

पुणे,  “व्यावहारिक उपयोगिता बढ़ाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का समावेश आधुनिक युग में अनिवार्य हो गया है। मानवीय क्षमताओं को डिजिटल तकनीक से जोड़कर कार्यों को अधिक सटीक, तेज और प्रभावी बनाया जा सकता है।” यह विचार एक्सेंचर के प्रबंध निदेशक भूपेश गहोत्रा ने व्यक्त किए।

वे एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित ‘विश्वनोव्हा 2026’ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। इस अवसर पर सीगेट टेक्नोलॉजी के कृष्णकुमार माधवन सम्माननीय अतिथि के रूप में उपस्थित थे।

कार्यक्रम में डब्ल्यूपीयू के प्र-कुलगुरु एवं विश्वनोव्हा के मुख्य संयोजक डॉ. मिलिंद पांडे, इनोवेशन विभाग के डीन डॉ. गणेश काकंडीकर तथा आईआईसी की संयोजक प्रा. डॉ. दिपाली जावळे भी उपस्थित थीं।

इस कार्यक्रम का आयोजन एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के कार्याध्यक्ष डॉ. राहुल विश्वनाथ कराड के मार्गदर्शन में किया गया।

देशभर से 700 से अधिक टीमों ने पंजीकरण कराया, जिसमें लगभग 3 हजार विद्यार्थियों ने भाग लिया। प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली तीन विजेता टीमों को क्रमशः 1 लाख, 75 हजार और 50 हजार रुपये के पुरस्कार प्रदान किए गए। इसके अलावा 10 टीमों को प्रोत्साहन पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

भूपेश गहोत्रा ने कहा, “कृत्रिम बुद्धिमत्ता का समावेश केवल तकनीकी प्रगति नहीं, बल्कि व्यवसायों की कार्यक्षमता और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने की प्रक्रिया है। यदि डेटा सुरक्षा और नैतिकता का ध्यान रखते हुए इसका उपयोग किया जाए, तो अधिक स्थायी और उन्नत भविष्य का निर्माण संभव है।”

कृष्णकुमार माधवन ने कहा, “कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, ब्लॉकचेन और जैव-प्रौद्योगिकी जैसी उभरती तकनीकें भविष्य में मानव जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने की क्षमता रखती हैं। तकनीक का उपयोग जिम्मेदारी और नैतिकता के साथ किया जाना अत्यंत आवश्यक है।”

डॉ. मिलिंद पांडे ने कहा, “इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाले विद्यार्थी ही भारत का वास्तविक भविष्य हैं। राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रोजेक्ट आधारित शिक्षा और नवाचारपूर्ण दृष्टिकोण के माध्यम से युवाओं को लगातार प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।”

डॉ. गणेश काकंडीकर ने कहा, “इस पहल के माध्यम से शोध, स्टार्टअप्स और तकनीकी प्रगति की संस्कृति को और मजबूत किया जाएगा। युवाओं को उनकी नवाचारी सोच को समाजोपयोगी समाधानों में बदलने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।”

प्रा. डॉ. दिपाली जावळे ने कहा, “यह मंच विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा, नवाचार और समस्या समाधान कौशल प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान करता है। यह पहल तकनीकी और सामाजिक प्रगति में योगदान देने वाले विचारों को विकसित करती है।”

कार्यक्रम का संचालन डॉ. अनुराधा कानडे, सह-संयोजक डॉ. शमिष्ठा देसाई एवं डॉ. सुमित्रा मोताडे ने किया।

‘विश्वनोव्हा 2026’ में अंमलबजावणी आधारित शिक्षा पर जोर

प्रोजेक्ट आधारित शिक्षा पद्धति के लिए प्रसिद्ध ‘विश्वनोव्हा 2026’ ने केवल विचारों तक सीमित न रहकर उनके व्यावहारिक क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया। कार्यक्रम में टेक्निकल आयरोनी, वेक्टर, हैकहर, ड्युओ, सोल्डर एंड फॉरगेट तथा ऑटोमैटिक चिक्स ब्रूडर जैसी टीमों ने अपने अभिनव प्रोजेक्ट प्रस्तुत कर तकनीकी नवाचार की गहराई को प्रदर्शित किया।

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