
ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में बंद को शत-प्रतिशत समर्थन
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान:पुणे महाराष्ट्र
पुणे : अवैध ऑनलाइन दवा बिक्री और कॉर्पोरेट कंपनियों द्वारा की जा रही अव्यावसायिक प्रतिस्पर्धा के विरोध में अखिल भारतीय औषध विक्रेता संघ (AIOCD) द्वारा बुलाए गए देशव्यापी बंद को पुणे में शत-प्रतिशत सफल होने का दावा संगठन के पदाधिकारियों ने किया है। संगठन के पुणे अध्यक्ष संदीप पारख ने बताया कि देशभर के लगभग 12.50 लाख दवा विक्रेताओं ने इस बंद में भाग लिया।
आज संगठन की ओर से पॉवर हाउस, रास्ता पेठ से जिला कलेक्टर कार्यालय तक मोर्चा निकाला गया। इस दौरान संगठन के पुणे सचिव अनिल बेलकर, कोषाध्यक्ष रोहित करपे सहित सैकड़ों पदाधिकारी उपस्थित रहे।
संदीप पारख ने बताया कि दवा व्यवसाय Drugs and Cosmetics Act 1940 और Rule 1945 के अंतर्गत नियंत्रित होता है। इसके बावजूद ऑनलाइन दवा बिक्री के लिए अब तक स्पष्ट कानूनी प्रावधान नहीं बनाए गए हैं, जबकि देशभर में बड़े पैमाने पर ऑनलाइन दवाओं की बिक्री जारी है। इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है और अदालत ने ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक लगाने के आदेश भी दिए हैं, लेकिन सरकार की ओर से इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि कोरोना काल में दवाओं की होम डिलीवरी के लिए सरकार ने अस्थायी छूट दी थी, लेकिन महामारी समाप्त होने के बाद भी उसे वापस नहीं लिया गया। इसका फायदा उठाकर ऑनलाइन कंपनियां भारी छूट देकर बाजार पर कब्जा करने का प्रयास कर रही हैं। इससे छोटे दवा विक्रेताओं का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है और ग्रामीण क्षेत्रों में दवा वितरण व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
संगठन ने बताया कि Drug Price Control Order (DPCO) 2013 के तहत दवा विक्रेताओं के लिए लाभ की सीमा तय की गई है, जबकि कॉर्पोरेट कंपनियां 20 से 50 प्रतिशत तक की छूट दे रही हैं। इसके कारण पारंपरिक मेडिकल स्टोर प्रतिस्पर्धा में टिक नहीं पा रहे हैं। साथ ही संगठन ने मांग की है कि दवा विक्रेताओं को डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवाओं के वैकल्पिक ब्रांड देने का अधिकार भी मिलना चाहिए।
संगठन का कहना है कि केंद्र सरकार और संबंधित अधिकारियों को कई बार ज्ञापन देने के बावजूद सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिलने के कारण आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। महाराष्ट्र सहित देशभर में मेडिकल स्टोर बंद रखकर दवा विक्रेताओं ने आंदोलन को समर्थन दिया। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ठोस निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और तीव्र किया जाएगा।


