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24 घंटे बिजली सप्लाई के सरकारी दावे पर उठने लगे सवाल, कई जिलों में कटौती से लोग परेशान

24 घंटे बिजली सप्लाई के सरकारी दावे पर उठने लगे सवाल, कई जिलों में कटौती से लोग परेशान

 

विशेष रिपोर्ट | विशाल समाचार

स्थान:लखनऊ, उत्तर प्रदेश 

उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में दावा किया कि प्रदेश ने बिजली आपूर्ति के मामले में नया रिकॉर्ड बनाया है। सरकार के अनुसार 31,824 मेगावाट की पीक बिजली सप्लाई दी गई, जो प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के किसी भी राज्य में अब तक की सबसे अधिक बताई जा रही है। साथ ही यह भी कहा गया कि शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे और ग्रामीण इलाकों में 22 से 22.30 घंटे तक बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की गई।

सरकार के इन दावों के बीच जमीनी स्तर से अलग तस्वीर सामने आ रही है। प्रदेश के कई जिलों से लगातार बिजली कटौती, लो-वोल्टेज, ट्रिपिंग और घंटों सप्लाई बाधित रहने की शिकायतें मिल रही हैं। भीषण गर्मी के बीच ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में लोग बार-बार बिजली जाने से परेशान हैं। कई स्थानों पर रात के समय लंबी कटौती होने से लोगों की नींद तक प्रभावित हो रही है।

ग्रामीण इलाकों में किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली नहीं मिलने की शिकायत है, वहीं छोटे कारोबारी और दुकानदार भी बिजली की अनियमित आपूर्ति से प्रभावित हो रहे हैं। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि वास्तव में 24 घंटे बिजली मिल रही होती, तो स्थानीय स्तर पर शिकायतों की संख्या इतनी अधिक नहीं होती।

हालांकि ऊर्जा विभाग का कहना है कि तकनीकी खराबी, ओवरलोडिंग, मौसम और अन्य कारणों से कुछ स्थानों पर अस्थायी व्यवधान उत्पन्न हो रहे हैं। विभाग का दावा है कि विद्युतकर्मी दिन-रात काम कर समस्याओं को दूर करने में जुटे हुए हैं।

बिजली आपूर्ति को लेकर सरकार के रिकॉर्ड दावों और आम जनता के अनुभव के बीच अंतर अब चर्चा का विषय बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल उत्पादन और सप्लाई के आंकड़े पेश करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अंतिम उपभोक्ता तक निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली पहुंचना ही असली उपलब्धि मानी जाएगी।

प्रदेश में लगातार बढ़ती गर्मी के बीच बिजली व्यवस्था आम जनता के लिए सबसे बड़ा मुद्दा बनी हुई है। ऐसे में लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि यदि उत्तर प्रदेश वास्तव में बिजली सप्लाई में नंबर-1 बन चुका है, तो फिर गांवों और कस्बों में लगातार कटौती की शिकायतें क्यों सामने आ रही हैं।

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