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मर्यादा, धर्म और आदर्श जीवन का संदेश देती है भगवान श्रीराम की कथा : अनूप ठाकुर”

मर्यादा, धर्म और आदर्श जीवन का संदेश देती है भगवान श्रीराम की कथा : अनूप ठाकुर”

रिपोर्ट :विशाल समाचार 

स्थान: हरदोई उत्तर प्रदेश 

जिला हरदोई के ग्राम मिरकापुर में आयोजित संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के चतुर्थ दिवस पर सम्पूर्ण क्षेत्र भक्ति, श्रद्धा एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत रहा। असलापुर धाम से पधारे सुप्रसिद्ध कथावाचक, अखिल विश्व कल्याण पीठ के पीठाधीश्वर, परम पूज्य अनूप ठाकुर जी महाराज ने श्रद्धालुओं को कथा अमृत का रसपान कराते हुए भगवान श्रीराम के दिव्य प्राकट्य एवं उनके आदर्श चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया।

महाराज श्री ने कहा कि भगवान श्रीराम केवल अयोध्या के राजा ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के लिए मर्यादा, सत्य, त्याग, कर्तव्य और धर्म के सर्वोच्च आदर्श हैं। उनका सम्पूर्ण जीवन हमें यह शिक्षा देता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी धर्म और सत्य का मार्ग कभी नहीं छोड़ना चाहिए। श्रीराम का अवतार अधर्म, अन्याय और अत्याचार के विनाश तथा धर्म की पुनः स्थापना के लिए हुआ था।

कथा के दौरान महाराज श्री ने राजा दशरथ की पुत्र प्राप्ति की अभिलाषा, ऋषि श्रृंगी द्वारा संपन्न पुत्रयेष्टि यज्ञ तथा भगवान विष्णु के श्रीराम स्वरूप में अवतार लेने की दिव्य कथा का अत्यंत मार्मिक एवं भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जब पृथ्वी पर रावण और अन्य दुष्ट शक्तियों के अत्याचार बढ़ गए तथा देवता भी भयभीत हो उठे, तब भगवान ने धर्म की रक्षा और भक्तों के कल्याण हेतु अयोध्या में महाराज दशरथ के घर श्रीराम के रूप में अवतार धारण किया।

 

महाराज श्री ने कहा कि श्रीराम जन्मोत्सव केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि मानव जीवन में सदाचार, संयम, सेवा और कर्तव्यनिष्ठा को अपनाने की प्रेरणा का पर्व है। भगवान श्रीराम का चरित्र हमें माता-पिता की सेवा, गुरुजनों के सम्मान, समाज के प्रति उत्तरदायित्व और राष्ट्र के प्रति समर्पण की शिक्षा देता है। उन्होंने कहा कि जिस परिवार और समाज में राम के आदर्शों का पालन होता है, वहां सदैव सुख, शांति और समृद्धि का वास रहता है।

कथाव्यास श्री अनूप ठाकुर जी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में भगवान श्रीराम के आदर्शों को आत्मसात करने की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है। राम कथा मनुष्य के भीतर संस्कार, विनम्रता, करुणा और धर्मनिष्ठा का संचार करती है तथा जीवन को सही दिशा प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि श्रीराम का नाम ही भवसागर से पार लगाने वाला दिव्य मंत्र है।

श्रीराम जन्मोत्सव प्रसंग के दौरान सम्पूर्ण कथा पंडाल “जय श्रीराम”, “सियाराम मय सब जग जानी” एवं “राम लला की जय” के जयघोषों से गुंजायमान हो उठा। श्रद्धालु भक्त भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव की झांकी का दर्शन कर भाव-विभोर हो गए। संगीतमयी भजनों, हरिनाम संकीर्तन एवं भक्ति रस से ओतप्रोत वातावरण ने सभी को आध्यात्मिक आनंद से सराबोर कर दिया।

कथा श्रवण कर उपस्थित श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक शांति एवं दिव्य आनंद का अनुभव किया। इस मौके पर यजमान परिवार सहित परिक्षित प्यारेलाल जी, प्रदीप सिंह, जयवीर सिंह, विजय सिंह, अजीत सिंह राठौर, अमन सिंह, सुंदरम सिंह, रमेश सक्सेना तथा क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिकों, धर्मप्रेमी सज्जनों एवं श्रद्धालु भक्तों ने उपस्थित होकर धर्म लाभ प्राप्त किया!

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