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महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव: BJP का बड़ा दांव, सुप्रिया सुले के होने वाले समधी को मैदान में उतारा

महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव: BJP का बड़ा दांव, सुप्रिया सुले के होने वाले समधी को मैदान में उतार

रिपोर्ट: विशाल समाचार 

स्थान:महाराष्ट्र राज्य 

Maharashtra MLC Election 2026: बीजेपी ने विधान परिषद चुनावों के लिए 10 उम्मीदवारों की घोषणा की है. ये सभी न केवल अपने-अपने क्षेत्रों के मजबूत नेता हैं, बल्कि पार्टी में उनका कद मजबूत माना जाता है.

महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव: BJP का बड़ा दांव, सुप्रिया सुले के होने वाले समधी को मैदान में उतारा

 

बीजेपी ने महाराष्ट्र विधान परिषद की 10 सीटों के लिए उम्मीदवार घोषित किए.

18 जून को होने वाले चुनाव में बीजेपी 11 सीटों पर लड़ेगी.

नागपुर विधान परिषद उपचुनाव के लिए डॉ. राजीव पोतदार उम्मीदवार बने.

सूची में उद्योगपति, किसान नेता और ओबीसी चेहरे शामिल किए गए.

बीजेपी ने महाराष्ट्र विधान परिषद की स्थानीय प्राधिकरण निर्वाचन क्षेत्रों की 16 सीटों में से 10 के लिए और नागपुर विधान परिषद चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है. आगामी 18 जून को होने वाले चुनाव में बीजेपी 11 सीटों पर, जबकि सहयोगी शिवसेना चार और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) दो सीटों पर चुनाव लड़ेगी. पार्टी ने नागपुर स्थानीय प्राधिकरण क्षेत्र के उपचुनाव के लिए डॉ. राजीव पोतदार को उम्मीदवार बनाया है

 

इसके अलावा बीजेपी ने विधान परिषद चुनावों के लिए जिन 10 उम्मीदवारों की घोषणा की है वो सभी न केवल अपने-अपने क्षेत्रों के मजबूत नेता हैं बल्कि पार्टी में भी उनका कद काफी मजबूत माना जाता है. हालांकि, इनमें कुछ ऐसे नेताओं का नाम भई शामिल है जो पार्टी से बाद में जुड़े थे और बीजेपी ने उनपर भरोसा जताया है. तो चलिए एक नजर उन दस नेताओं की प्रोफाइल पर डाल लेते हैं.

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अनिल लखानी

सबसे पहला नाम सुप्रिया सुले के होने वाले समधी अनिल लखानी है, जो वर्धा-चंद्रपुर-गढ़चिरौली से मैदान में हैं. लखानी के बेटे की शादी शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले की बेटी रेवती से होने वाली है. बता दें कि अनिल लखानी उद्योगपति परिवार से है. लंबे समय से बीजेपी से जुड़े है. संगठन में सक्रिय भूमिका में रहे हैं और बीजेपी कार्यकारिणी में महाराष्ट्र के सह कोषाध्यक्ष हैं. वो उद्योगपतियों को पार्टी से जोड़ने में माहिर हैं.

 

अविनाश ब्राह्मणकर

दूसरा नाम भंडारा-गोंदिया से अविनाश ब्राह्मणकर का है. अविनाश ब्राह्मणकर विदर्भ से ताल्लुक रखते है और भंडारा जिले से हैं. बीजेपी ने 2024 में कांग्रेस के दिग्गज नेता नाना पटोले के सामने विधानसभा में टिकट दिया था, लेकिन वो चुनाव हार गए थे. अब विधानपरिषद में नई जिम्मेदारी दी गई है और उन्हें मंत्रिपद मिल सकता है. अविनाश ब्राह्मणकर सीएम फडणवीस के करीबी होने के कारण पार्टी में अविनाश का कद मजूत माना जाता है. विदर्भ में पार्टी को मजबूत करने में इनकी सक्रिय भूमिका रही है.

 

प्रवीण पोटे पाटील

तीसरा नाम अमरावती से प्रवीण पोटे पाटिल का है, जो विदर्भ क्षेत्र के एक और कद्दावर नेता हैं. अमरावती जिले से ताल्लुक रखते हैं. इनकी संगठन, सहकार, शिक्षा और स्थानीय स्वराज संस्थाओं में मजबूत पकड़ मानी जाती है.

 

प्रवीण साल 2012 में एमएलसी चुने गए थे. 2014 में फडणवीस सरकार में राज्यमंत्री रहे हैं. फडणवीस के करीबी माने जाते हैं और इनका नाम साल 2021 के अमरावती दंगे में भी सामने आया था. इस मामले में वो गिरफ्तार तक हुए थे, लेकिन कोर्ट से उन्हें जमानत मिल गई थी.

 

धैर्यशील कदम

चौथा नाम सांगली-सातारा से धैर्यशील कदम का है, जो पश्चिम महाराष्ट्र से ताल्लुक रखते है. इन्हें संगठन से जुड़ा नेता माना जाता है. पश्चिम महाराष्ट्र में कांग्रेस और एनसीपी के खिलाफ बीजेपी को मजबूत करने में और बूथ स्तर पर पार्टी को ले जाने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है.

 

राजेंद्र राऊत

पांचवां नाम सोलापुर से राजेंद्र राऊत का है, जो पश्चिम महाराष्ट्र की सोलापुर जिले से आते है. इनकी पहचान प्रभावशाली क्षत्रिय नेता और किसान नेता के तौर पर है. वर्ष 2004 में सोलापुर जिले की बार्शी विधानसभा सीट से पहली बार निर्दलीय के तौर पर चुने गए थे. तब राजेंद्र ने उद्धव ठाकरे के करीबी नेता दिलीप सोपल को हराया था. साल 2019 से राजेंद्र बीजेपी के साथ हैं.

 

प्राजक्त तनपुरे

छठा नाम अहमदनगर (अहिल्यानगर) से प्राजक्त तनपुरे का है. प्राजक्त तनपुरे शरद पवार के करीबी रहे हैं. 30 मई 2026 को ही एनसीपी शरद पवार की पार्टी से बीजेपी में शामिल हुए हैं और आते ही उन्हें विधानपरिषद का तोहफा मिल गया है. इनका ताल्लुक अहिल्यानगर जिले से है और तनपुरे एनसीपी नेता जयंत पाटिल के बहन के बेटे हैं. साल 2019 में अहिल्यानगर (पूर्व अहमदनगर) जिले के राहुरी विस सीट से एनसीपी से जीते थे और महाविकास आघाड़ी सरकार में मंत्री बने बने थे. उत्तर और पश्चिम महाराष्ट्र में इनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है.

 

सुहास शिरसाट

सातवां नाम छत्रपति संभाजीनगर-जालना से सुहास शिरसाट का है, जो मराठवाड़ा क्षेत्र से ताल्लुक रखते है. सुहास को राजनीतिक हल्कों में ओबीसी चेहरे के रूप में देखा जाता है और ओबीसी समाज में इनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है. सुहास संगठन में कई प्रमुख जिम्मेदारी निभा चुके हैं.

 

अमरनाथ राजुरकर

आठवां नामनांदेड़ से अमरनाथ राजुरकर का है और ये भी मराठवाड़ा क्षेत्र से ताल्लुक रखते हैं. मराठवाड़ा के नांदेड़ जिले से हैं और अशोक चव्हाण के करीबी माने जाते हैं. ये कांग्रेस पार्टी से लंबे समय तक जुड़े रहे, लेकिन साल 2024 में अशोक चव्हाण के साथ बीजेपी में शामिल हो गए. साल 2010 और 2016 में एमएलसी रह चुके है.

 

अमरनाथ नांदेड़ शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे हैं और बाद में बीजेपी में जब शामिल हुए तो बीजेपी ने भी उन्हें नांदेड़ शहर का अध्यक्ष नियुक्त किया.

 

धाराशिव-लातूर-बीड

नौवां नाम धाराशिव-लातूर-बीड से बसवराज पाटील का है और ये भी मराठवाड़ा क्षेत्र से आते है. ये लिंगायत समाज के प्रमुख नेताओं में से एक माने जाते हैं. बसवराज पाटी धाराशिव (उस्मानाबाद) जिले से आते हैं. फरवरी 2024 में कांग्रेस से इस्तीफा देकर वो बीजेपी में शामिल हुए थे.

 

1999 में उमरगा से, 2009 और 2014 में औसा सीट से विधायक रहे हैं. 1999-2004 के दौरान महाराष्ट्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार में राज्यमंत्री रहे हैं. कांग्रेस ने उन्हें महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष भी बनाया था.

 

नंदकिशोर महाजन

दसवां नाम जलगांव से नंदकिशोर महाजन का है, जो उत्तर महाराष्ट्र के जलगांव से ताल्लुक रखते है. जमीनी संगठन कार्यकर्ता. स्थानीय स्वराज संस्थाओं में मजबूत पकड़. जलगांव जिला परिषद का चुनाव बीजेपी की टिकट से जीता था. नंदकिशोर महाजन राज्य के कैबिनेट मंत्री गिरीश महाजन के करीबी माने जाते हैं.

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