पूणेमहाराष्ट्रराज्य

आदित्य बिड़ला ज्वेलरी के इंद्रिया ने ‘एक राग’ को पेश किया: भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत को एक अनूठा सम्मान

आदित्य बिड़ला ज्वेलरी के इंद्रिया ने ‘एक राग’ को पेश किया: भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत को एक अनूठा सम्मान

रिपोर्ट: विशाल समाचार 

स्थान:पुणे, महाराष्ट्र 

पुणे, 1 जून 2026: नृत्य, कारीगरी, वास्तुकला और क्षेत्रीय परंपराओं की भारत की समृद्ध विरासत से प्रेरणा लेते हुए, आदित्य बिड़ला ग्रुप के मशहूर ज्वेलरी ब्रांड इंद्रिया ने ‘एक राग’ पेश किया है। यह एक अनूठी सांस्कृतिक प्रदर्शनी है, जो ‘नृत्य’ के दर्शन पर आधारित है, जहां हर मूवमेंट एक कहानी बन जाता है और शरीर भावनाओं को उकेरने का एक कैनवास।

 

भारत की विविध सांस्कृतिक पहचान को एक साझा लय में पिरोने के मकसद से शुरू किया गया यह अभियान पुणे, हैदराबाद, भुवनेश्वर और दिल्ली में चल रहा है। हर शहर अपनी नृत्य शैली, कलात्मक छाप, आभूषणों की परंपराओं और दुल्हनों के अनूठे अंदाज के जरिए अपनी क्षेत्रीय कहानी पेश करता है। यह अलग-अलग इलाकों की दुल्हनों के सपनों को दर्शाता है, जो गरिमा, सुंदरता, चाहत और उत्सव की एक जैसी भावनाओं से आपस में जुड़े हैं और अपने सपनों की दुल्हन बनने की हर लड़की की ख्वाहिश को जीवंत करते हैं।

 

पुणे में, एक राग महाराष्ट्र के उत्सवी माहौल और लावणी के जोशीले अंदाज से प्रेरित है। लावणी एक ऐसा नृत्य है जो अपनी लय, आत्मविश्वास और बेहतरीन कला प्रदर्शन के लिए जाना जाता है। फीनिक्स मार्केट सिटी, पुणे में लगाई गई यह प्रदर्शनी ‘दीप स्तंभ’ पर आधारित है, जो रोशनी, समृद्धि और शुभ शुरुआत का पारंपरिक प्रतीक है। इस जगह को पारंपरिक महाराष्ट्रीयन शैली को ध्यान में रखकर सजाया गया है, जहां नृत्य के कदम, संगीत और आभूषण मिलकर एक खूबसूरत कहानी बयां करते हैं।

 

लावणी की ही तरह, जहां हर कदम आत्मविश्वास और भावनाओं से भरा होता है, यह जगह भी एक दुल्हन के अनूठे व्यक्तित्व और उन सदाबहार सांस्कृतिक रीति-रिवाजों को दर्शाती है जो उसकी पहचान बनाते हैं। इस प्रदर्शनी के केंद्र में इंद्रिया के गहने रखे गए हैं, जो नथ, पाटला चूड़ियां और कोल्हापुरी साज जैसे खास जेवरों के जरिए इस इलाके की सांस्कृतिक झलक पेश करते हैं। यह उन सजने-संवरने की परंपराओं को उजागर करता है, जो आज भी महाराष्ट्रीयन दुल्हनों की विरासत और रस्मों-रिवाजों से गहराई से जुड़ी हुई हैं।

 

इस अभियान पर बात करते हुए, इंद्रिया के मार्केटिंग और विजुअल मर्चेंडाइजिंग हेड शांतिस्वरूप पांडा ने कहा, “एक राग के जरिए हम एक ऐसा अनुभव तैयार करना चाहते थे जहां संस्कृति को सिर्फ देखा न जाए, बल्कि गहराई से महसूस किया जाए। हर इलाके की इंस्टॉलेशन की अपनी अलग विजुअल भाषा है, लेकिन फिर भी सब एक जैसी भावनात्मक लय से जुड़ी हैं, जो भारत के अलग-अलग सांस्कृतिक रूपों को दर्शाती है। ‘एक राग’ के जरिए ज्वेलरी सिर्फ सजने-संवरने की चीज नहीं रह जाती, बल्कि पहचान, कलाकारी और विरासत का एक जीवंत रूप बन जाती है, जो अलग-अलग दुल्हनों के सपनों को एक साझा भावनात्मक अनुभव में पिरोती है।”

 

जैसे-जैसे ‘एक राग’ पूरे देश में अपनी यात्रा कर रहा है, यह अभियान भारत की क्षेत्रीय कलाकारी को अनोखी कहानियों और आज के दौर के सांस्कृतिक अनुभवों के जरिए पेश करने की इंद्रिया की प्रतिबद्धता को और मजबूत करता जा रहा है। विरासत, कला, कारीगरी और डिजाइन को एक साथ लाकर यह पहल ब्रांड के उस नजरिए को आगे बढ़ाती है जिसमें ज्वेलरी सिर्फ पहनने के लिए नहीं, बल्कि महसूस करने के लिए बनाई जाती है।

 

 

 

 

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button