पूणेमहाराष्ट्रस्वास्थ्य

स्टेंट निष्प्रभ होने पर लेज़र थैरेपी बनी जीवनदायी: उन्नत कार्डियक उपचार से मरीजों को मिल रही नई उम्मीद

स्टेंट निष्प्रभ होने पर लेज़र थैरेपी बनी जीवनदायी: उन्नत कार्डियक उपचार से मरीजों को मिल रही नई उम्मीद

रिपोर्ट:विशाल समाचार संवाददाता 

📍 स्थान : पुणे | महाराष्ट्र 

भारत में हृदय रोग तेजी से कम उम्र के लोगों को प्रभावित कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार कोरोनरी आर्टरी डिजीज से होने वाली मौतों में 50 प्रतिशत से अधिक मामले 50 वर्ष से कम आयु के लोगों में देखे जा रहे हैं। वहीं हर चार हृदयाघात में से एक मामला 40 वर्ष से कम आयु के मरीजों में पाया जा रहा है। महाराष्ट्र और विशेष रूप से पुणे में भी युवा वर्ग में हृदय रोगों के मामलों में वृद्धि दर्ज की जा रही है, जिसका मुख्य कारण असंतुलित जीवनशैली, तनाव, गलत खान-पान और शारीरिक निष्क्रियता बताया जा रहा है।

ऐसे समय में सह्याद्रि सुपर स्पेशालिटी हॉस्पिटल, डेक्कन जिमखाना में प्रगत कार्डियक लेज़र थैरेपी (Advanced Cardiac Laser Therapy) एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में उभर रही है। यह आधुनिक, न्यूनतम इनवेसिव तकनीक उन मरीजों के लिए उपयोगी साबित हो रही है, जिनमें पहले लगाए गए स्टेंट निष्प्रभ हो चुके हैं या धमनियों में पुनः गंभीर ब्लॉकेज बन गया है।

नई तकनीक से जटिल हृदय रोगों का उपचार आसान

विशेषज्ञों के अनुसार, कई मरीज एंजियोप्लास्टी के बाद भी वर्षों बाद दोबारा ब्लॉकेज, स्टेंट संकुचन या जटिल कोरोनरी आर्टरी रोग के साथ अस्पताल पहुंचते हैं। ऐसे मामलों में दोबारा स्टेंट लगाना, बायपास सर्जरी या बार-बार हस्तक्षेप करना जरूरी हो जाता है। लेकिन अब लेज़र-आधारित उपचार इन चुनौतियों का प्रभावी समाधान प्रदान कर रहा है।

यह तकनीक रक्त प्रवाह को बेहतर बनाने, अवरुद्ध धमनियों को खोलने और मरीजों को तेजी से रिकवरी में सहायता करती है। कई मामलों में यह अतिरिक्त स्टेंट या बड़ी सर्जरी की आवश्यकता को भी कम करती है।

मरीजों को मिल रहा नया जीवन:हॉस्पिटल के अनुसार इस तकनीक से कई जटिल मामलों में सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। एक 76 वर्षीय मरीज, जिनके पहले से लगाए गए स्टेंट में गंभीर ब्लॉकेज हो गया था, उन्हें बायपास सर्जरी से बचाकर सफल उपचार दिया गया। वहीं एक 21 वर्षीय युवक के जटिल कोरोनरी ब्लॉकेज का इलाज कर अतिरिक्त स्थायी इम्प्लांट से बचते हुए रक्त प्रवाह सामान्य किया गया। इसी तरह 56 वर्षीय एक मरीज, जिन्हें दो बार हार्ट अटैक आ चुका था, उनका लेज़र-असिस्टेड एंजियोप्लास्टी से सफल उपचार किया गया।

विशेषज्ञों की राय:हृदय रोग विशेषज्ञों का कहना है कि स्टेंट फेलियर और पुनः ब्लॉकेज के मामलों में यह तकनीक एक महत्वपूर्ण विकल्प बनकर सामने आई है।

डॉ. अभिजीत पलशीकर, कार्डियोलॉजी निदेशक, सह्याद्रि हॉस्पिटल ने कहा कि जटिल कोरोनरी रोगों के बढ़ते मामलों के बीच यह लेज़र तकनीक अधिक सटीक और प्रभावी उपचार उपलब्ध कराती है तथा कई मरीजों को बायपास सर्जरी से बचाने में मदद करती है।

वहीं अस्पताल निदेशक डॉ. निलेश सिंह ने कहा कि यह आधुनिक तकनीक मरीजों के लिए कम आक्रामक उपचार का बेहतर विकल्प प्रदान करती है, जिससे रिकवरी तेज होती है और उपचार परिणाम अधिक बेहतर होते हैं।

निष्कर्ष:स्टेंट निष्प्रभ होने, बार-बार ब्लॉकेज और जटिल कोरोनरी आर्टरी रोग से जूझ रहे मरीजों के लिए यह प्रगत कार्डियक लेज़र थैरेपी एक नई उम्मीद बनकर सामने आई है। यह तकनीक न केवल उपचार का विकल्प है, बल्कि मरीजों को जीवन की गुणवत्ता सुधारने और सामान्य जीवन में लौटने का अवसर भी प्रदान कर रही है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button