
पीएम मोदी के नेतृत्व के 12 वर्ष: सुभाषितम संदेश में कहा- ‘सेवाभाव’ है राष्ट्र निर्माण की अमूल्य पूंजी
रिपोर्ट: विशाल समाचार
स्थान:दिल्ली पुलिस
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र में अपने 12 वर्ष पूरे होने के महत्वपूर्ण अवसर पर देशवासियों को समर्पित एक विशेष ‘सुभाषितम’ संदेश साझा किया है। इस संदेश में उन्होंने राष्ट्र-निर्माण में समर्पण और सेवाभाव को अपनी सबसे बड़ी पूंजी बताते हुए जन-सेवा और ‘राष्ट्र प्रथम’ की प्रतिबद्धता दोहराई।
प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर लिखा, “राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पण और सेवाभाव हमारी अमूल्य पूंजी रही है। बीते 12 वर्षों में ‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना से प्रेरित निरंतर प्रयासों से ही आज हम एक सशक्त और आत्मनिर्भर भारत की ओर तेजी से अग्रसर हैं।”
इस अवसर पर उन्होंने एक प्रेरक संस्कृत श्लोक भी साझा किया:
आर्यकर्मणि रज्यन्ते भूतिकर्माणि कुर्वते।
हितं च नाभ्यसूयन्ति स वै पण्डित उच्यते॥
अर्थ: जो व्यक्ति सदैव श्रेष्ठ एवं सदाचारपूर्ण कर्मों में लगा रहता है, निरंतर उन्नति और लोककल्याण के कार्यों में संलग्न रहता है तथा दूसरों के हितकारी कार्यों का सम्मान करता है, उनसे द्वेष नहीं करता—वही वास्तव में बुद्धिमान कहलाता है।
पर्यावरण संरक्षण पर लगातार सुभाषितम संदेश
यह संदेश पीएम मोदी की हालिया श्लोक श्रृंखला का हिस्सा है। ठीक एक दिन पहले 8 जून को उन्होंने प्रकृति के साथ संतुलन पर जोर देते हुए एक और संस्कृत श्लोक साझा किया था। 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर भी उन्होंने प्रकृति संरक्षण को सांस्कृतिक दायित्व बताते हुए ‘मधु वाता ऋतायते’ श्लोक शेयर किया था।
इन संदेशों के माध्यम से प्रधानमंत्री लगातार भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत, मूल्यों और समसामयिक राष्ट्र निर्माण को जोड़ते नजर आ रहे हैं।
12 वर्षों के कार्यकाल को याद करते हुए यह संदेश ऐसे समय में आया है, जब सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र के साथ आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को तेज गति से आगे बढ़ा रही है।


