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लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन पर जिलाधिकारी ने जताई नाराजगी

लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन पर जिलाधिकारी ने जताई नाराजगी

रिपोर्ट: विशाल समाचार 

स्थान:सीतामढ़ी बिहार 

सीतामढ़ी, 23 जून। जिलाधिकारी रिची पांडेय की अध्यक्षता में सोमवार को समाहरणालय स्थित विमर्श कक्ष में अभियोजन समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में पुलिस अधीक्षक अमित रंजन, विधि शाखा के प्रभारी पदाधिकारी, जिला अभियोजन पदाधिकारी, सहायक लोक अभियोजक, विशेष लोक अभियोजक, पुलिस पदाधिकारी एवं अन्य विधि पदाधिकारी उपस्थित रहे।

 

बैठक में स्पीडी ट्रायल एवं सामान्य वादों की समीक्षा की गई। लंबित मामलों के निष्पादन की धीमी प्रगति पर जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त करते हुए सभी अभियोजन एवं विधि पदाधिकारियों को मामलों का शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि अभियोजन पदाधिकारी और पुलिस पदाधिकारी आपसी समन्वय के साथ कार्य करें, ताकि न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।

 

जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि प्रत्येक मामले में राज्य का पक्ष मजबूती से रखा जाए, जिससे अधिक से अधिक मामलों में दोषसिद्धि सुनिश्चित हो सके। दोषसिद्धि के कम मामलों पर असंतोष जताते हुए उन्होंने अभियोजन अधिकारियों को अपने कार्य में सुधार लाने तथा अगले माह प्रत्येक न्यायालय में अधिकाधिक दोषसिद्धि सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए।

 

उन्होंने कहा कि जिन मामलों में सुनवाई अंतिम चरण में है, उनमें गवाहों की गवाही समय पर पूरी कराकर विचारण प्रक्रिया को शीघ्र समाप्त किया जाए, ताकि अभियुक्तों को जल्द सजा दिलाई जा सके। जिला लोक अभियोजन पदाधिकारी एवं अपर लोक अभियोजकों को सभी थानाध्यक्षों के साथ नियमित मासिक बैठक कर केस डायरी एवं चार्जशीट की गुणवत्ता में सुधार लाने का निर्देश भी दिया गया।

 

बैठक में पोक्सो अधिनियम, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम, मद्य निषेध कानून सहित विभिन्न महत्वपूर्ण मामलों की समीक्षा की गई। इसके अलावा उत्पाद अधिनियम के तहत दर्ज मामलों के प्राथमिकता के आधार पर निष्पादन पर जोर दिया गया।

 

जिलाधिकारी ने एक्साइज एक्ट, पोक्सो एक्ट, एनडीपीएस एक्ट, एससी/एसटी एक्ट, हत्या, डकैती, बलात्कार एवं शस्त्र अधिनियम से जुड़े गंभीर मामलों को चिन्हित कर उनका समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावी एवं परिणामोन्मुख बनाना सभी संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है।

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