उत्तर प्रदेशऔरैयाप्रशासन

जिला प्रशासन की बडी कार्यवाही लगभग 20 करोड रुपये मूल्य की सरकारी भूमि कराई गई कब्जा मुक्त।

जिला प्रशासन की बडी कार्यवाही लगभग 20 करोड रुपये मूल्य की सरकारी भूमि कराई गई कब्जा मुक्त।

 

39 वर्ष पुराने अवैध आदेश को निरस्त कर सरकारी भूमि को कराया कब्ज़ा मुक्त, नगर पंचायत दिबियापुर को सौंपी गई भूमि।

रिपोर्ट: विशाल समाचार 

स्थान:औरैया उत्तर प्रदेश 

औरैया, जनपद में सरकारी एवं सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर अवैध कब्जों के विरुद्ध जिलाधिकारी ब्रजेश कुमार के निर्देशन में चलाए जा रहे अभियान के तहत जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण कार्यवाही करते हुए लगभग 1.36 एकड की सरकारी भूमि, जिसकी अनुमानित कीमत बाजार के अनुसार करीब 20 करोड रुपये है, को अवैध कब्जे से मुक्त कराकर नगर पंचायत दिबियापुर को सुपुर्द कर दिया।

उक्त प्रकरण तहसील सदर के राजस्व ग्राम ककराही का है, जहां सार्वजनिक उपयोग के लिए संरक्षित कन्या पाठशाला की भूमि को वर्ष 1987 में चकबंदी के दौरान कथित रूप से अनियमित एवं अवैध तरीके से ऊसर भूमि से प्रतिस्थापित करते हुए उसके अभिलेखों में परिवर्तन कर निजी संस्था जनता बालिका विद्यालय के नाम दर्ज कर दिया गया था। इस आधार पर वर्षों से उक्त सरकारी भूमि पर निजी कब्जा बना हुआ था। मामले में उत्तर प्रदेश राज्य सरकार की ओर से तहसीलदार सदर द्वारा चकबंदी अधिकारी के दिनांक 24 दिसंबर 1987 के आदेश के विरुद्ध बन्दोबस्त अधिकारी न्यायालय में अपील प्रस्तुत की गई। अपील की सुनवाई के दौरान बन्दोबस्त अधिकारी चकबंदी ने पाया कि प्रथम चक्र की चकबंदी में सार्वजनिक प्रयोजन के लिए सुरक्षित गाटा संख्या 215 (नया गाटा संख्या 255), रकबा 1.36 एकड की प्रकृति एवं उपयोगिता को बदलते हुए उसे ऊसर भूमि पर स्थानांतरित किया गया तथा कन्या पाठशाला के स्थान पर निजी संस्था जनता बालिका विद्यालय का नाम दर्ज कर दिया गया, जो विधि सम्मत नहीं है, निर्णय में स्पष्ट किया गया कि उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम, 1953 के अंतर्गत सार्वजनिक अथवा लोकहित के लिए आरक्षित भूमि को किसी निजी संस्था के नाम दर्ज किए जाने का कोई प्रावधान नहीं है। साथ ही द्वितीय चक्र की चकबंदी के दौरान प्रथम चक्र में सुरक्षित सार्वजनिक भूमि की नवैयत परिवर्तित करने का अधिकार भी चकबंदी अधिकारियों को प्राप्त नहीं हैं।

उक्त प्रकरण की सुनवाई के दौरान यह भी पाया गया कि वर्ष 1987 का आदेश आकार पत्र-45 पर विधिवत प्रक्रिया का पालन किए बिना दर्ज किया गया था। इस अनियमितता की जानकारी राज्य सरकार को वर्ष 2021 में प्राप्त एक प्रार्थना पत्र के माध्यम से हुई, जिसके बाद मामले की विधिक समीक्षा कराई गई। न्यायालय ने आदेश को धोखाधडीपूर्ण तथा अधिकार क्षेत्र से परे पारित मानते हुए तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया तथा भूमि को पुनः सरकार में निहित घोषित किया गया।

न्यायालय के आदेश के अनुपालन में 06 जुलाई 2026 को जिलाधिकारी के निर्देश पर तहसीलदार सदर के नेतृत्व में राजस्व एवं पुलिस टीम की उपस्थिति में बुलडोजर की सहायता से भूमि पर से अवैध कब्जा हटवाया गया। कब्जामुक्त कराई गई भूमि को नियमानुसार नगर पंचायत दिबियापुर को सुपुर्द कर दिया गया। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी, सार्वजनिक एवं ग्राम समाज की भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा अथवा अभिलेखों में अनियमित परिवर्तन किसी भी दशा में स्वीकार नहीं किया जाएगा। ऐसे सभी मामलों की विधिक समीक्षा कर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्यवाही की जाएगी तथा सार्वजनिक संपत्तियों को सुरक्षित किया जाएगा।

जिलाधिकारी बृजेश कुमार ने यह भी कहा कि सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने का अभियान आगे भी प्रभावी रूप से जारी रहेगा, जिससे सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button