
वारकरी सेवा में झलकी विठ्ठल भक्ति, चलवादी शिक्षण संस्था ने लाखों श्रद्धालुओं का किया आत्मीय स्वागत
रिपोर्ट: विशाल समाचार
स्थान:पुणे, महाराष्ट्र
पुणे, । आषाढ़ी वारी महोत्सव के अवसर पर “ज्ञानोबा-तुकाराम” और “विठ्ठल-विठ्ठल” के जयघोष से संतों की भूमि पुणे पूरी तरह भक्तिमय हो उठी। पंढरपुर की ओर प्रस्थान कर रहे लाखों वारकरी श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए पूरा शहर तैयार दिखा। इसी क्रम में चलवादी शिक्षण संस्था ने भी अपनी वर्षों पुरानी सेवा परंपरा को निभाते हुए वारकरी श्रद्धालुओं का श्रद्धा, समर्पण और आत्मीयता के साथ स्वागत किया।
विश्रांतवाड़ी स्थित आलंदी रोड पर एचडीएफसी बैंक के सामने चलवादी शिक्षण संस्था की उपाध्यक्ष तथा भाजपा-आरपीआई गठबंधन की सक्रिय कार्यकर्ता अधिवक्ता रेणुका चलवादी-शिर्के के नेतृत्व में पालखी यात्रा में शामिल वारकरी श्रद्धालुओं का उत्साहपूर्वक स्वागत किया गया। इस अवसर पर लंबी पदयात्रा कर रहे श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए उपयोगी बैग, बिस्कुट तथा शुद्ध पेयजल का वितरण किया गया।

कार्यक्रम में चलवादी शिक्षण संस्था के अध्यक्ष एवं आरपीआई के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. हुलगेश चलवादी, सामाजिक कार्यकर्ता स्वप्निल शिर्के तथा आकाश चलवादी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
इस अवसर पर अधिवक्ता रेणुका चलवादी-शिर्के ने कहा कि कई दिनों की कठिन पदयात्रा के बावजूद भगवान विठ्ठल के दर्शन की आस्था से वारकरी श्रद्धालुओं के चेहरों पर अद्भुत तेज दिखाई देता है। उनके पैरों की चप्पलें भले ही घिस जाएं, लेकिन भगवान विठ्ठल के प्रति उनकी श्रद्धा कभी कम नहीं होती। ऐसे संतस्वरूप वारकरी श्रद्धालुओं की सेवा करने का अवसर मिलना हमारे लिए सौभाग्य, आनंद और आत्मिक संतोष का विषय है। वारकरियों के चेहरों पर दिखाई देने वाली तृप्ति हमें सदैव नई ऊर्जा प्रदान करती है।

डॉ. हुलगेश चलवादी ने कहा कि वारी केवल महाराष्ट्र की परंपरा नहीं, बल्कि उसकी संस्कृति की आत्मा है। सिर पर तुलसी वृंदावन, हाथों में मंजीरे और मुख पर विठ्ठल नाम का जाप करते हुए धूप और वर्षा की परवाह किए बिना पंढरपुर की ओर बढ़ने वाले वारकरी श्रद्धालुओं की सेवा करना ही सच्ची ईश्वर सेवा है। उन्होंने कहा कि चलवादी शिक्षण संस्था कई वर्षों से इस पवित्र सेवा परंपरा का निर्वहन कर रही है और भविष्य में भी यह सेवा निरंतर जारी रहेगी।

लाखों श्रद्धालुओं की विशाल भीड़ के बीच चलवादी शिक्षण संस्था के कार्यकर्ताओं ने प्रत्येक वारकरी की श्रद्धा और आत्मीयता के साथ सेवा की। वारी महोत्सव के दौरान संस्था द्वारा किए गए इस सेवा कार्य की श्रद्धालुओं एवं स्थानीय लोगों ने सराहना की और यह सेवाभाव पूरे आयोजन का विशेष आकर्षण बना।

