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उच्च शिक्षा में वारकरी संप्रदाय को शामिल करने के लिए सरकार नया शैक्षणिक मॉडल तैयार करे : डॉ. राहुल वी. कराड

उच्च शिक्षा में वारकरी संप्रदाय को शामिल करने के लिए सरकार नया शैक्षणिक मॉडल तैयार करे : डॉ. राहुल वी. कराड

रिपोर्ट :विशाल समाचार 

स्थान:पुणे महाराष्ट्र

पुणे, । एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी (MIT-WPU) के कार्याध्यक्ष डॉ. राहुल विश्वनाथ कराड ने कहा कि सरकार को ऐसा शैक्षणिक मॉडल विकसित करना चाहिए, जिसके माध्यम से वारकरी संप्रदाय की परंपरा को उच्च शिक्षा का हिस्सा बनाया जा सके। इसके लिए शिक्षा विशेषज्ञों और चिंतकों को एक साथ आकर ठोस पहल करनी होगी। उन्होंने कहा कि विज्ञान, अध्यात्म और वारी की परंपरा के समन्वय से संस्कारित एवं मूल्यनिष्ठ नई पीढ़ी का निर्माण संभव है।

संत ज्ञानेश्वर महाराज एवं जगद्गुरु संत तुकाराम महाराज की पालखी यात्रा के पुणे आगमन पर एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी की ओर से भव्य एवं श्रद्धापूर्ण स्वागत किया गया। टाल-मृदंग की गूंज और ‘ज्ञानोबा-तुकाराम’ के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। इसी अवसर पर डॉ. राहुल कराड ने अपने विचार व्यक्त किए।

पालखी का स्वागत एमआईटी-डब्ल्यूपीयू के कार्याध्यक्ष डॉ. राहुल विश्वनाथ कराड तथा विश्वराज हॉस्पिटल की संचालिका डॉ. अदिति राहुल कराड ने किया।

इस अवसर पर श्रीमती उषा विश्वनाथ कराड, एडीटी यूनिवर्सिटी के कार्याध्यक्ष डॉ. मंगेश टी. कराड, नागपुर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. एस. एन. पठान, प्रख्यात वक्ता डॉ. संजय उपाध्ये सहित विश्वविद्यालय के पदाधिकारी, प्राध्यापक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

मीडिया से बातचीत करते हुए डॉ. राहुल कराड ने कहा कि नई पीढ़ी को वारकरी परंपरा से जोड़ने के लिए ज्ञानेश्वरी और तुकाराम गाथा का विभिन्न भारतीय एवं विदेशी भाषाओं में अनुवाद किया जाना चाहिए। उन्होंने विश्वधर्मी प्रा. डॉ. विश्वनाथ डी. कराड के संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि “विज्ञान और अध्यात्म के समन्वय से ही विश्व शांति स्थापित हो सकती है।” इसी विचारधारा के आधार पर शिक्षा और वारकरी परंपरा के समन्वय पर गंभीर चिंतन आवश्यक है।

उन्होंने बताया कि इसी उद्देश्य से एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी की ओर से ‘वारकरी सम्मेलन’ का आयोजन भी किया गया था। अब सरकार को भी इस विषय पर गंभीरता से विचार कर नई शैक्षणिक नीतियां एवं मॉडल विकसित करने चाहिए, ताकि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपरा और नैतिक मूल्यों को उच्च शिक्षा से प्रभावी रूप से जोड़ा जा सके।

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