सीतामढ़ी

झजनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़ा का शुभारंभ, छोटे परिवार एवं जन्म अंतराल अपनाने का दिया गया संदेश

झजनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़ा का शुभारंभ, छोटे परिवार एवं जन्म अंतराल अपनाने का दिया गया संदेश

रिपोर्ट: विशाल समाचार 

स्थान:सीतामढ़ी बिहार 

सीतामढ़ी,  विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार के निर्देशानुसार 11 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक आयोजित जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़ा का शुभारंभ शनिवार को सदर अस्पताल, सीतामढ़ी में किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन सिविल सर्जन डॉ. आर. के. यादव, अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. मनोज कुमार, अस्पताल प्रबंधक विजय झा, पीरामल फाउंडेशन के जिला प्रबंधक प्रभाकर कुमार, दुर्गा प्रसाद, बिकेश कुमार, विक्रम कुमार तथा पीएसआई (इंडिया) के विनय कुमार ने संयुक्त रूप से किया।

 

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सिविल सर्जन डॉ. आर. के. यादव ने कहा कि जनसंख्या किसी भी देश के विकास का महत्वपूर्ण आधार है, लेकिन अनियंत्रित जनसंख्या वृद्धि विकास की गति को प्रभावित करती है। सीमित एवं नियोजित परिवार न केवल आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त होता है, बल्कि बच्चों को बेहतर पोषण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और उज्ज्वल भविष्य प्रदान करने में भी सक्षम होता है।

 

उन्होंने बताया कि वर्तमान में भारत का कुल प्रजनन दर (TFR) 2.1 है, जबकि बिहार का कुल प्रजनन दर 2.9 है। इस अंतर को कम करने के लिए परिवार नियोजन सेवाओं को जन-जन तक पहुंचाना तथा योग्य दंपतियों को उपलब्ध सभी स्थायी एवं अस्थायी परिवार नियोजन साधनों की सही जानकारी देना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि महिला बंध्याकरण, पुरुष नसबंदी, अंतरा इंजेक्शन, छाया, माला-एन, कंडोम, आईयूसीडी एवं पीपीआईयूसीडी जैसे परिवार नियोजन साधनों के बारे में लोगों को जागरूक किया जाए, ताकि वे अपनी आवश्यकता के अनुसार सही विकल्प का चयन कर सकें।

 

डॉ. यादव ने दो बच्चों के जन्म के बीच कम-से-कम तीन वर्ष का अंतर रखने पर विशेष बल देते हुए कहा कि इससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी आती है, कुपोषण की समस्या घटती है तथा मां और शिशु दोनों का स्वास्थ्य बेहतर रहता है। उन्होंने सभी स्वास्थ्यकर्मियों से अपील की कि वे समुदाय स्तर पर नियमित परामर्श, गृह भ्रमण एवं जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से योग्य दंपतियों तक परिवार नियोजन सेवाओं की जानकारी पहुंचाएं।

 

उन्होंने कहा कि जनसंख्या स्थिरीकरण केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज का दायित्व है। इस अभियान को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग, आईसीडीएस, शिक्षा विभाग, पंचायती राज संस्थाएं, स्वयंसेवी संस्थाएं तथा समुदाय के जागरूक नागरिकों को मिलकर कार्य करना होगा। तभी बिहार को राष्ट्रीय प्रजनन दर के स्तर तक लाने का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकेगा।

 

इस अवसर पर परिवार नियोजन सेवाओं की उपलब्धता, गुणवत्तापूर्ण परामर्श, योग्य दंपतियों की पहचान, पुरुष सहभागिता बढ़ाने तथा समुदाय में छोटे परिवार एवं स्वस्थ जन्म अंतराल के संदेश को व्यापक रूप से पहुंचाने का संकल्प लिया गया।

 

कार्यक्रम में जिला अस्पताल के चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों सहित अस्पताल प्रबंधक विजय झा, पीरामल फाउंडेशन के जिला प्रबंधक प्रभाकर कुमार, दुर्गा प्रसाद, बिकेश कुमार, विक्रम कुमार, पीएसआई (इंडिया) के विनय कुमार, मनीषा कुमारी, संजय कुमार, शोभा कुमारी सहित बड़ी संख्या में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

 

जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़ा के दौरान जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों पर योग्य दंपतियों को परिवार नियोजन संबंधी परामर्श, अस्थायी एवं स्थायी परिवार नियोजन सेवाएं तथा जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। अभियान का उद्देश्य जनसंख्या स्थिरीकरण के साथ-साथ मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार, परिवारों की खुशहाली तथा सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करना है।

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