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बाल संरक्षण मामले में जिलाधिकारी की सख्त पहल, त्रिस्तरीय जांच रिपोर्ट के आधार पर सीडब्ल्यूसी के अध्यक्ष एवं सदस्यों पर कार्रवाई की अनुशंसा।

बाल संरक्षण मामले में जिलाधिकारी की सख्त पहल, त्रिस्तरीय जांच रिपोर्ट के आधार पर सीडब्ल्यूसी के अध्यक्ष एवं सदस्यों पर कार्रवाई की अनुशंसा।

रिपोर्ट :विशाल समाचार 

स्थान:सीतामढ़ी बिहार 

बाल संरक्षण से समझौता नहीं: सीडब्ल्यूसी की लापरवाही पर कार्रवाई की अनुशंसा, बाल तस्करी, मानव तस्करी एवं देह व्यापार से जुड़े तत्वों पर होगी कठोर कानूनी कार्रवाई*

 

 

इस प्रकरण में जांच के दौरान चिन्हित एवं दोषी पाए गए अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध भी विधि सम्मत एवं आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने की अनुशंसा की गई।

 

बाल संरक्षण से जुड़े एक अत्यंत संवेदनशील मामले में जिलाधिकारी श्री रिची पांडेय ने गंभीरता, संवेदनशीलता एवं कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देते हुए त्रिस्तरीय जांच रिपोर्ट के आधार पर चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी), सीतामढ़ी के अध्यक्ष एवं सदस्यों की कार्यप्रणाली में पाई गई गंभीर अनियमितताओं एवं लापरवाही को रेखांकित करते हुए समाज कल्याण विभाग को उनके विरुद्ध कठोर एवं विधिसम्मत कार्रवाई की अनुशंसा की है।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025 में एक नाबालिग बालिका को पुलिस द्वारा मुक्त कराकर विधि के अनुरूप चाइल्ड वेलफेयर कमेटी, सीतामढ़ी के समक्ष प्रस्तुत किया गया था। समिति के आदेश पर बालिका को वन स्टॉप सेंटर में रखा गया तथा बाद में उसे सिवान जिला स्थित आश्रय गृह भेजा गया। नफीसा खातून नामक एक महिला के इस दावे पर कि वह उक्त बच्ची की मां है। बाल बाल कल्याण समिति, सीतामढ़ी के आदेश पर उक्त बच्ची को नफीसा खातून को सुपुर्द कर दिया गया।बाद में बालिका के वास्तविक पिता द्वारा दिए गए आवेदन एवं उपलब्ध तथ्यों के आधार पर पुलिस द्वारा नया कांड दर्ज किए जाने के उपरांत समिति की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठे।

 

प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी श्री रिची पांडेय द्वारा एक त्रिस्तरीय जांच समिति का गठन किया गया। समिति ने विस्तृत जांच कर अपना प्रतिवेदन समर्पित किया। जांच प्रतिवेदन के सूक्ष्म परीक्षण के उपरांत जिलाधिकारी ने समाज कल्याण विभाग को भेजे गए अपने विस्तृत प्रतिवेदन में उल्लेख किया है कि जांच के दौरान अनेक महत्वपूर्ण तथ्यों, पीड़िता के कथनों, उपलब्ध अभिलेखों, प्राथमिकी, न्यायालय में दिए गए बयानों तथा सामाजिक जांच प्रतिवेदन के समग्र परीक्षण से चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की कार्यप्रणाली में गंभीर त्रुटियां एवं लापरवाही परिलक्षित हुई हैं।

जांच रिपोर्ट में यह भी इंगित किया गया है कि उपलब्ध तथ्यों एवं साक्ष्यों का समुचित मूल्यांकन नहीं किया गया तथा कई महत्वपूर्ण परिस्थितियों की अपेक्षित गंभीरता से समीक्षा किए बिना निर्णय लिया गया। सामाजिक जांच प्रतिवेदन, शपथ-पत्र, प्रमाण-पत्र एवं अन्य अभिलेखों के संबंध में भी कई गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं, जिनकी जांच एवं विधिसम्मत कार्रवाई अपेक्षित है।

जिलाधिकारी ने अपने प्रतिवेदन में स्पष्ट किया है कि किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के तहत गठित संस्थाओं का दायित्व अत्यंत महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील है। ऐसे मामलों में कानून के अनुरूप निष्पक्ष, पारदर्शी एवं तथ्याधारित निर्णय लिया जाना अनिवार्य है। यदि किसी स्तर पर शक्तियों का दुरुपयोग, कर्तव्य की उपेक्षा अथवा बाल संरक्षण के उद्देश्य के विपरीत कार्य किया जाता है तो उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई होना आवश्यक है।

 

इन्हीं तथ्यों के आलोक में जिलाधिकारी ने समाज कल्याण विभाग से चाइल्ड वेलफेयर कमेटी, सीतामढ़ी के अध्यक्ष एवं सभी सदस्यों की नियुक्ति समाप्त करने तथा प्रकरण में जांच के दौरान चिन्हित अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध भी विधिसम्मत एवं आवश्यक कार्रवाई करने की अनुशंसा की है।

जिलाधिकारी श्री रिची पांडेय ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की सुरक्षा एवं उनके अधिकारों की रक्षा जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। बाल संरक्षण से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही, कर्तव्य की उपेक्षा अथवा कानून के विपरीत आचरण के प्रति जिला प्रशासन की शून्य सहिष्णुता की नीति है। भविष्य में भी ऐसे मामलों में पूरी पारदर्शिता, जवाबदेही एवं संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

— जिला जनसंपर्क कार्यालय, सीतामढ़ी

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