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अॅड. बी.सी. (बापूसाहेब) कांबळे की 107वीं जयंती 15 जुलाई को मनाई जाएगी

अॅड. बी.सी. (बापूसाहेब) कांबळे की 107वीं जयंती 15 जुलाई को मनाई जाएगी

रिपोर्ट :डीएस तोमर 

स्थान: पुणे महाराष्ट्र 

पुणे। प्रख्यात विधिवेत्ता, संविधान विशेषज्ञ, वरिष्ठ समाजसेवी, पत्रकार, शिक्षाविद् एवं विश्व रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर के निकट सहयोगी रहे अॅड. बी.सी. (बापूसाहेब) कांबळे की 107वीं जयंती 15 जुलाई 2026 को श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाई जाएगी। इस अवसर पर विभिन्न सामाजिक एवं बौद्ध संगठनों द्वारा उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके विचारों और कार्यों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया जाएगा।

बापूसाहेब कांबळे का जन्म 15 जुलाई 1919 को महाराष्ट्र के सांगली जिले के पलूस गांव में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा के बाद उन्होंने सातारा स्थित रयत शिक्षण संस्था से अध्ययन किया। मैट्रिक उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने पुणे के फर्ग्युसन कॉलेज में प्रवेश लेकर बी.ए. की शिक्षा प्राप्त की। छात्र जीवन में ही उनकी लेखन प्रतिभा सामने आई। उनके एक लेख से प्रभावित होकर डॉ. भीमराव आंबेडकर ने उन्हें मुंबई बुलाया और समाजहित के कार्यों में सक्रिय रूप से जुड़ने का अवसर दिया।

बापूसाहेब ने डॉ. आंबेडकर द्वारा स्थापित विभिन्न प्रकाशनों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। विशेष रूप से ‘जनता’ समाचार पत्र के संपादक के रूप में उन्होंने सामाजिक न्याय, समानता और जागरूकता के विचारों को व्यापक स्तर पर जन-जन तक पहुंचाया।

एलएलबी की शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने मुंबई उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में कार्य किया। उन्होंने बौद्ध समाज के अधिकारों, जनगणना में बौद्धों की सही गणना तथा उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष किया। वे बौद्ध धर्म के गहन अध्येता और संविधान विशेषज्ञ के रूप में भी प्रतिष्ठित रहे। उन्होंने मुंबई के सिद्धार्थ लॉ कॉलेज तथा डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर कॉलेज, वडाला में विधि के प्राध्यापक के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं।

संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के दौरान वर्ष 1952 में डॉ. आंबेडकर ने उन्हें आंदोलन में शहीद हुए लोगों की जानकारी संकलित कर विस्तृत प्रतिवेदन तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी। बापूसाहेब ने प्रत्येक शहीद के परिवार से संपर्क कर लगभग 400 पृष्ठों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की, जिसे विधानसभा में प्रस्तुत किया गया। इस रिपोर्ट के आधार पर संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के 105 शहीदों का आधिकारिक रिकॉर्ड स्थापित हुआ।

वर्ष 1952 में वे मुंबई के परेल-प्रभादेवी विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए और 1952 से 1957 तक विधायक रहे। इसके बाद वर्ष 1957 में लोकसभा के लिए निर्वाचित होकर सांसद बने। उन्होंने संसद और समाज दोनों स्तरों पर वंचित, शोषित एवं कमजोर वर्गों के अधिकारों की प्रभावी आवाज उठाई। वे डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के निष्ठावान सहयोगी और समर्पित कार्यकर्ता के रूप में सदैव स्मरण किए जाते हैं।

बापूसाहेब कांबळे ने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के जीवन एवं विचारों पर आधारित 24 खंडों के प्रकाशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने ‘रिपब्लिकन’ साप्ताहिक के संपादक के रूप में भी उल्लेखनीय योगदान दिया। वर्ष 1995 में मुंबई के शिवाजी पार्क में आयोजित एक सभा में उन्होंने युवाओं से रिपब्लिकन आंदोलन का नेतृत्व संभालने का आह्वान किया था।

उनकी 107वीं जयंती के अवसर पर भारतीय बुद्ध सासन सभा, रिपब्लिकन पार्टी (कांबळे) तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में केंद्रीय उपाध्यक्ष बाबासाहेब वडगांवकर, केंद्रीय सचिव एच.बी. जाधव, प्रा. के.वी. सोनकांबळे, पूर्व विधायक अॅड. एल.टी. सावंत, पुणे शहर निमंत्रक भीमराव दा. सोनवणे, वरिष्ठ कार्यकर्ता दिनकर कांबळे, पुणे शहर अध्यक्ष आनंदराव सदानंद कांबळे, सम्राट अशोक बुद्ध विहार, येरवडा के अध्यक्ष सागर साधू वानखेडे, ‘नीले वादळ’ के अध्यक्ष सचिन सुरेश रोकड़े, महिला समिति की अध्यक्षा मालनताई सुरेश गायकवाड, कार्याध्यक्ष छायाताई बालासाहेब जाधव, संघटक कमलताई भीमराव कदम सहित अनेक पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने उनके सामाजिक योगदान को स्मरण किया।

वक्ताओं ने कहा कि अॅड. बी.सी. (बापूसाहेब) कांबळे का संपूर्ण जीवन सामाजिक न्याय, समानता, शिक्षा, संवैधानिक मूल्यों और बौद्ध समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए समर्पित रहा। उनके विचार आज भी नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

मीडिया को यह जानकारी भारतीय बुद्ध सासन सभा, पुणे शहर जिला के अध्यक्ष आयुष्मान सुरेश भाऊ रोकड़े ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से दी।

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