
अनुसूचित जातियों का उप-वर्गीकरण जातीय जनगणना के बाद ही हो, मांग को लेकर 27 जुलाई को पुणे में RPI (आठवले) का महामोर्चा
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान :पुणे महाराष्ट्र
पुणे, प्रतिनिधि। रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) ने मांग की है कि अनुसूचित जातियों के उप-वर्गीकरण का निर्णय राष्ट्रीय जातीय जनगणना के आधिकारिक आंकड़े सामने आने के बाद ही लिया जाए। पार्टी का कहना है कि इससे पहले उप-वर्गीकरण लागू करने से समाज में आंतरिक विभाजन की स्थिति पैदा हो सकती है और कई समाजों के साथ अन्याय होने की आशंका है। इसी मांग को लेकर 27 जुलाई (सोमवार) को सुबह 11 बजे पुणे में भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा (जिलाधिकारी कार्यालय परिसर) से विशाल महामोर्चा निकाला जाएगा।
पुणे श्रमिक पत्रकार भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में शहर अध्यक्ष संजय सोनवणे, उपमहापौर परशुराम वाडेकर और प्रदेश सचिव बालासाहेब जानराव ने बताया कि अनुसूचित जातियों के 59 समाजों के बीच सामाजिक एकता बनाए रखना पार्टी की प्राथमिकता है। उनका कहना है कि उप-वर्गीकरण की प्रक्रिया राष्ट्रीय जातीय जनगणना पूरी होने और आधिकारिक जनसंख्या के आंकड़े उपलब्ध होने के बाद ही शुरू की जानी चाहिए, ताकि सभी समाजों के साथ समान और न्यायपूर्ण व्यवहार हो सके।
पार्टी नेताओं ने कहा कि अनुसूचित जातियों के विभिन्न समाज दशकों से सामाजिक न्याय, समान अधिकार और आरक्षण के लिए एकजुट होकर संघर्ष करते आए हैं। इसलिए किसी भी नीति पर जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय तथ्यात्मक और आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर फैसला किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि वर्ष 2027 की जनगणना के बाद जनसंख्या के अनुपात के अनुसार आरक्षण व्यवस्था की भी समीक्षा की जाए।
प्रदेश सचिव बालासाहेब जानराव ने कहा कि यदि भविष्य में उप-वर्गीकरण आवश्यक माना जाता है, तो वह केवल राष्ट्रीय जातीय जनगणना के आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर ही किया जाना चाहिए। जनगणना रिपोर्ट आने से पहले कोई भी निर्णय लेने से वंचित समाजों के हित प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए केंद्र और राज्य सरकार इस प्रक्रिया को जनगणना पूरी होने के बाद ही लागू करें।


