
कृषि योजनाओं का पारदर्शिता एवं गुणवत्ता के साथ हो प्रभावी क्रियान्वयन, लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई: जिलाधिकारी
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान:औरैया उत्तर प्रदेश
औरैया, जिलाधिकारी बृजेश कुमार की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट स्थित मानस सभागार में सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन (एस.एम.ए.ई.) योजना के अंतर्गत आत्मा गवर्निंग बोर्ड, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन तथा जनपद स्तरीय उर्वरक निगरानी समिति की संयुक्त बैठक आयोजित की गई।
बैठक में कृषि विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा करते हुए उनके प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
बैठक में उप कृषि निदेशक दुर्गेश कुमार सिंह ने वर्ष 2025-26 में एस.एम.ए.ई. योजना के अंतर्गत कराए गए कार्यों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करते हुए वर्ष 2026-27 में प्रस्तावित कार्यक्रमों एवं गतिविधियों की रूपरेखा से अवगत कराया। उन्होंने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन तथा उर्वरक निगरानी व्यवस्था की प्रगति पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने कृषि एवं विकास से जुड़े सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि शासन की मंशा के अनुरूप सभी कृषि योजनाओं का क्रियान्वयन पूर्ण पारदर्शिता, गुणवत्ता एवं समयबद्धता के साथ सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि शासन की जीरो टॉलरेंस नीति के अंतर्गत योजनाओं के संचालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही, शिथिलता अथवा अनियमितता स्वीकार नहीं की जाएगी तथा दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्यवाही की जाएगी।
बैठक में स्वयं सहायता समूहों की ओर से सचिव एन.जी.ओ. श्रीमती रीना पाण्डेय ने सुझाव दिया कि समूहों से जुड़े अधिक से अधिक कृषकों को कृषि विभाग सहित अन्य विभागों द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाए, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो तथा उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा सके। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को इस दिशा में समन्वित प्रयास करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने जनपद में आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने पर विशेष बल देते हुए जिला उद्यान अधिकारी को जनपद में अधिकाधिक पॉलीहाउस एवं ग्रीनहाउस स्थापित कराने हेतु कार्ययोजना तैयार कर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों के माध्यम से कृषकों की आय में वृद्धि तथा उच्च गुणवत्ता वाली फसलों का उत्पादन संभव है। बैठक में कृषक उत्पादक संगठनों (एफ.पी.ओ.) को और अधिक सशक्त बनाने पर भी विस्तार से चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि सभी एफ.पी.ओ. को योजनाओं के अंतर्गत नियमित प्रशिक्षण एवं भ्रमण कार्यक्रमों से जोड़ा जाए तथा प्रत्येक माह उनकी बैठक आयोजित कर समस्याओं एवं आवश्यकताओं की समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि एफ.पी.ओ. को कृषि आधारित उद्यमिता, विपणन एवं मूल्य संवर्धन के क्षेत्र में सक्षम बनाना आवश्यक है। इसके अतिरिक्त जिन एफ.पी.ओ., समाजसेवी संस्थाओं एवं समितियों द्वारा निराश्रित गौशालाओं को गोद लिया गया है, उनके प्रतिनिधियों के लिए कृषि विज्ञान केन्द्र, ग्वारी, अछल्दा में जीवामृत, घनामृत एवं वर्मी कम्पोस्ट निर्माण संबंधी विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कराने के निर्देश वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रभारी रामपलट को दिए, जिससे प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ गौ-आधारित कृषि प्रणाली को भी प्रोत्साहन मिल सके।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी राम कृपाल चौधरी, जिला उद्यान अधिकारी सुनील तिवारी, उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, सहायक निदेशक रेशम, जिला मत्स्य अधिकारी, सचिव एन.जी.ओ. श्रीमती रीना पाण्डेय, बोर्ड के कृषक सदस्य ख्यालीराम, प्रगतिशील कृषक, औद्यानिक कृषक, कृषि निवेश आपूर्तिकर्ता सुशील कुमार सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं प्रगतिशील कृषक उपस्थित रहे।

