
पत्रकारिता की आड़ में कानून हाथ में लेने वालों पर उठे गंभीर सवाल
फर्जी प्रेस कार्ड, अवैध गतिविधियों और अधिकारों के दुरुपयोग पर सख्त कार्रवाई की मांग, वास्तविक पत्रकारों की साख बचाने की जरूरत
रिपोर्ट: विशाल समाचार
स्थान: नई दिल्ली
नई दिल्ली/लखनऊ। देश में पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है, लेकिन हाल के वर्षों में कुछ ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें कुछ लोग पत्रकारिता की आड़ लेकर स्वयं को कानून से ऊपर समझने लगे हैं। ऐसे मामलों ने न केवल मीडिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि निष्पक्ष और ईमानदारी से काम करने वाले पत्रकारों की छवि को भी प्रभावित किया है।
हाल ही में सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो और तस्वीरें वायरल हुई हैं, जिनमें कुछ लोग वाहनों पर लिखे “PRESS” की स्वयं जांच करते, लोगों से पूछताछ करते या प्रशासनिक कार्रवाई जैसी भूमिका निभाते दिखाई दे रहे हैं। यदि कोई व्यक्ति बिना कानूनी अधिकार के इस प्रकार की कार्रवाई करता है, तो यह गंभीर विषय है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
कानूनी जानकारों का कहना है कि किसी वाहन को रोकना, दस्तावेज़ों की जांच करना, चालान करना या कानून लागू करना केवल अधिकृत सरकारी एजेंसियों का अधिकार है। पत्रकार का कार्य समाचारों का संकलन, तथ्यों का सत्यापन और जनहित के मुद्दों को सामने लाना है, न कि पुलिस या प्रशासन की भूमिका निभाना।
वरिष्ठ पत्रकारों का भी मानना है कि कुछ लोगों की ऐसी गतिविधियों से पूरी पत्रकार बिरादरी की प्रतिष्ठा प्रभावित होती है। उनका कहना है कि वास्तविक पत्रकार समाज और शासन के बीच जवाबदेही का सेतु होते हैं, इसलिए पत्रकारिता की आड़ में होने वाली अवैध गतिविधियों पर रोक लगाना आवश्यक है।
इस बीच मांग उठी है कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, गृह मंत्रालय तथा सभी राज्य सरकारें ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच कराएं। यदि कोई व्यक्ति पत्रकारिता की आड़ में कानून हाथ में ले रहा है, पहचान पत्र का दुरुपयोग कर रहा है, फर्जी प्रेस कार्ड का इस्तेमाल कर रहा है या आम नागरिकों पर अनुचित दबाव बना रहा है, तो उसके विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
साथ ही यह भी मांग की जा रही है कि फर्जी पत्रकारों, अवैध प्रेस कार्ड, सरकारी सुविधाओं के दुरुपयोग तथा मीडिया के नाम पर चल रहे अवैध कार्यों की व्यापक जांच कराई जाए। इससे वास्तविक पत्रकारों की गरिमा सुरक्षित रहेगी और मीडिया की विश्वसनीयता भी मजबूत होगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि पत्रकारिता लोकतंत्र की आत्मा है, लेकिन पत्रकारिता भी कानून के दायरे में है। कानून सभी नागरिकों के लिए समान है और किसी भी व्यक्ति या संस्था को कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता। इसलिए समय की मांग है कि पत्रकारिता की गरिमा बनाए रखने के लिए दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो और ईमानदार पत्रकारों का सम्मान सुरक्षित रखा जाए।


